विदेशी फंडिंग की बाढ़ रुकी तो बौखलाए मोदी विरोधी

    दिनांक 29-सितंबर-2020
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पीएम  नरेंद्र मोदी की लगातार चुनावी जीत ने विदेशी धन के बूते राष्ट्र को क्षति पहुंचाने वाले इन संगठनों को भारी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय गद्दारों के लिए विदेशी फंडिंग की बाढ़ पर प्रधानमंत्री मोदी ने रोक लगाई है जिससे वे आक्रामक हो गए हैं, लेकिन उनके पास ‘द वायर’ और ‘स्क्रॉल’ जैसी माओवादी वेबसाइटों पर बकवास लिखने के सिवा कुछ नहीं बचा है।
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जॉर्ज सोरोस

पिछले कई दशकों से भारत में ऑक्सफैम , फोर्ड फाउंडेशन तथा ऐसे ही कई अन्य विदेशी मूल वाले संगठन विदेशी धन के सहारे भारत में विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियां फैलाने में लगे हुए हैं। इनमें से आक्सफैम पिछले दो दशकों में ज्यादा ही षड्यंत्रकारी भूमिका में रहा है। इस संगठन में ब्रिटिश सरकार की सीधी भागीदारी है। 2002-2005 के दौरान ब्रिटेन सरकार ने उसे दो करोड़ पाउंड की मदद दी है। ऑक्सफैम की कई अवैध और गैरकानूनी गतिविधियों में कश्मीर तथा देश के अन्य भागों में भारतीय राज्य व्यवस्था के खिलाफ भावनाएं भड़काना प्रमुख हैं। 2003 में आॅक्सफैम इंडिया ने वायलेंस मिटिगेशन ऐंड एमीलियोरेशन प्रोजेक्ट (वीएमएपी) नाम से एक परियोजना शुरू करके कश्मीर के हालात के लिए भारत सरकार को दोषी ठहराने वाले पर्चों और लेखों की श्रृंखला का प्रकाशन शुरू किया था। कश्मीर में ऑक्सफैम म ऐसे गैर-सरकारी संगठनों को मदद देता रहा है जो कथित ‘कश्मीरी हितों’ के लिए काम करते रहे हैं। इसी संस्था की मदद पाने वाले गौहर फाजिली नाम के व्यक्ति ने तो 2006 में भारतीय सेना को खुलेआम गाली देते हुए अलगाववाद का समर्थन करना शुरू किया था। 

ऑक्सफैम के बिछाए जाल में देश में अनेक राष्ट्रविरोधी संगठनों और गतिविधियों से जुड़े लोग शामिल हैं। फरवरी 2020 में लखनऊ में सीएए-विरोधी भड़काऊ पर्चे बांटने के आरोप में गिरफ्तार हुए मैग्सेसे पुरस्कार विजेता नक्सली संदीप पांडे ने 2005 में भारत-पाक शांति मार्च नाम से एक आयोजन किया था। इस मार्च के लिए धन देने वालों में एसोसिएशन फॉर इंडियाज डेवलपमेंट, राज मश्रुवाला, महाराष्ट्र फाउंडेशन और ऑक्सफैम  शामिल थे। संदीप पांडे का महाश्वेता देवी, अरुंधति रॉय, राजिंदर सच्चर, प्रफुल्ल किदवई और आनंद पटवर्धन जैसे अन्य चरम वामपंथी सेकुलरों के साथ लंबे समय से करीबी संबंध रहा है। विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम के प्रावधानों से बचने के लिए आक्सफैम नए-नए गैर-सरकारी संगठन बनाता है। उसने अमन नाम से ऐसा ही एक संगठन फोर्ड फाउंडेशन के साथ मिल कर बनाया था। अमन के अन्य दानदाताओं में एक्शन एड, राजीव गांधी फाउंडेशन और नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया शामिल हैं। कुख्यात राष्ट्रविरोधी हर्ष मंदर लंबे समय तक एक्शन एड का प्रमुख रहा है। राजीव गांधी फाउंडेशन की चालबाजियां तो सभी को पता हैं। लेकिन, रोचक जानकारी यह है कि अमन को मदद देने वाले नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया के तत्कालीन ट्रस्टियों में किरण कार्णिक (अध्यक्ष), डॉ. एमएस स्वामिनाथन,  एन. राम, मनमोहन सिंह, पी. साईनाथ, अनिता रामपाल, आंद्रे बतीले, मल्लिका साराभाई,  दीपक पारेख जैसे लोगों के साथ फोर्ड फाउंडेशन का एक प्रतिनिधि शामिल था। उल्लेखनीय है कि आॅक्सफैम के मौजूदा मुख्य अधिशासी अधिकारी अमिताभ बहार अतीत में इसी नेशनल फाउंडेशन आफ इंडिया से जुड़े रहे हैं।


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उल्लेखनीय है कि अमन संगठन का पूरा नाम अमन पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट उर्फ अमन पंचायत है, जिसका संस्थापक पूर्व नक्सली दिलीप सीमियन है। दिलीप सीमियन भारतीय राज्यव्यवस्था के खिलाफ पहले नक्सलबाड़ी युद्ध में प्रत्यक्ष भागीदारी में रहा था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से घोर नफरत करने वाला नक्सली सीमियन आजकल अशोका विश्वविद्यालय में अध्यापक है। 2000 के दशक के मध्य में ही अमन ट्रस्ट नाम के एक अन्य गैर-सरकारी संगठन ने पाकिस्तान के हमदर्द विश्वविद्यालय के साथ शांति और संघर्ष अध्ययन नामक एक शैक्षिक पाठ्यक्रम शुरू किया था। इस पाठ्यक्रम को फोर्ड फाउंडेशन और आक्सफैम द्वारा वित्त पोषित किया गया था। इस अमन ट्रस्ट के निदेशक ऑक्सफैम , ग्रेट ब्रिटेन के पूर्व कर्मी जमाल किदवई थे। इनके अलावा एक अमन समुदाय भी है जिसका नेतृत्व उसी दुराग्रही हर्ष मंदर के हाथ में है। इस संगठन का प्राथमिक लक्ष्य ‘गुजरात में प्रभावित आबादी’ के साथ काम करना था। सरल भाषा में इसका मतलब है कि अमन समुदाय भी उन अनगिनत गैर सरकारी संगठनों और चरम वामपंथी कट्टरपंथियों में शामिल था जिन्होंने गुजरात दंगों के नाम पर विभिन्न गतिविधियों में बेखौफ अकूत धन कमाया। अमन समुदाय की ऑक्सफैम के साथ साझेदारी थी। 

आक्सफैम के वैश्विक संपर्कों के तार अमेरिका से संचालित कुख्यात यूनिटेरियन यूनिवर्सलिस्ट होल्डीन इंडिया प्रोग्राम से भी जुड़े हैं। यूनिटेरियन यूनिवर्सलिस्ट होल्डीन ठेठ ईसाई संगठन है जो अन्य ईसाई संप्रदायों की ही तरह भारत में हिंदुओं के कन्वर्जन में सक्रिय है। कन्वर्जन से जुड़ी गतिविधियों को छिपाने के लिए यह यहां ‘सामाजिक न्याय’, ‘महिला सशक्तीकरण’ के लिए जमीनी स्तर के कामों की आड़ लेता है। विश्व स्तर पर यूनिटेरियन यूनिवर्सलिस्ट के साझेदारों में कुख्यात एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठन शामिल हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के मुख्य दानदाताओं में कुख्यात जॉर्ज सोरोस और आॅक्सफैम शामिल हैं। ऑक्सफैम और ऐक्शन एड जैसे संगठनों की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के अंतहीन संजाल के बारे में बहुत हल्के में आकलन करें तो भी इन्होंने भारत की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को अकेले और संयुक्त रूप से जितना नुकसान पहुंचाया है और भारतीय समाज के खिलाफ जिस तरह का युद्ध छेड़ा है, उसने भारत को तीन दशक पीछे धकेल दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार चुनावी जीत ने विदेशी धन के बूते राष्ट्र को क्षति पहुंचाने वाले इन संगठनों को भारी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय गद्दारों के लिए विदेशी फंडिंग की बाढ़ पर प्रधानमंत्री मोदी ने रोक लगाई है जिससे वे आक्रामक हो गए हैं, लेकिन उनके पास ‘द वायर’ और ‘स्क्रॉल’ जैसी माओवादी वेबसाइटों पर बकवास लिखने के सिवा कुछ नहीं बचा है।