योगी सरकार में अपराधियों के हौसले पस्त, थाने आकर कर रहे आत्मसमर्पण

    दिनांक 29-सितंबर-2020   
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पिछली सरकारों में अपराधी, पुलिस पर हमला कर रहे थे। वर्दी का इकबाल खत्म होता जा रहा था। पर योगी सरकार में अपराधियों को पुलिस से डर लग रहा है। प्रदेश में कानून का राज है। अपराधी अब जेल में रहना चाहते हैं। फरार अपराधी स्वयं गले में तख्ती टांग कर थाने पहुंच रहे हैं, जिसमें लिखा होता है—पुलिस से डर लगता है।
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गत 27 सितम्बर को कसाई नईम हाथ जोड़े हुए संभल जनपद के थाना नखासा पहुंचा। गैंगेस्टर, गोकशी एवं अन्य कई मुकदमे नईम के खिलाफ दर्ज हैं। यह अपराधी काफी दिनों से फरार चल रहा था। पुलिस ने इसके सिर पर 15 हजार का ईनाम घोषित किया था। नईम खुद से थाना नखासा पहुंचा। उसने गले में एक तख्ती टांग रखी थी, जिस पर लिखा था, “ मैंने गलत काम किया है। मुझे सम्भल पुलिस से डर लगता है। मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूं। मैं अपराधी हूं और आत्मसमर्पण कर रहा हूं। मुझे गोली मत मारो।”

वर्ष, 2019 में बुलंदशहर जिले के खुर्जा में हिस्ट्रीशीटर अपराधी निज़ाम स्वयं थाने पर पहुंच गया। निजाम ने पुलिस को बताया कि वह अपराधी है और गिरफ़्तार हो कर जेल जाना चाहता है। उसके सिर पर 25,000 रुपए का ईनाम था। इस अपराधी ने कानून के भय से अपने गले में एक तख्ती लटका ली थी, जिस पर लिखा हुआ था, “साहब मैं अपराधी हूँ, मुझे गिरफ़्तार कर लो।”  निजाम वर्ष, 2019 के जुलाई माह में हुई लूट की घटना में शामिल था।

 कानपुर में खुद ही पहुंच गया वांछित अपराधी, कहा –“मैं लंगड़ा नहीं होना चाहता हूं”
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सचेंडी थाना क्षेत्र के छत्तापुरवा का रहने वाला शातिर लुटेरा नारायण उर्फ़ लाला कुछ दिनों से एक स्कूटी लूटने की घटना में फरार चल रहा था। पुलिस के मुताबिक़ धर्मेद्र उर्फ़ पाटू और राहुल उर्फ़ शेरा के साथ मिलकर नारायण उर्फ़ लाला ने स्कूटी लूटी थी। पाटू और शेरा पेशेवर अपराधी हैं। घटना के बाद से तीनों फरार चल रहे थे। करीब एक हफ्ते पहले पाटू और शेरा लूट के इरादे से किसान नगर में पहुंचे थे तभी बिधनू थाने की पुलिस से मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ के दौरान पाटू के पैर में गोली लगी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके कुछ दिन बाद 9 अगस्त, 2019 को नारायण उर्फ़ लाला खुद से बिधनू थाने के इन्स्पेक्टर के पास पहुंच गया। उसने पुलिस को बताया कि "उसे डर लग रहा है। वह पुलिस की गोली से लंगड़ा नहीं होना चाहता। वह अपनी इच्छा से जेल जाना चाहता है।" 


 गैंगेस्टर आसिफ उर्फ़ चीका खुद ही पहुँच गया पुलिस के पास
सहारनपुर में 20 जुलाई, 2019 को एक गोकशी का अभियुक्त जो तीन महीने से फरार चल रहा था, उसके खिलाफ गैंगेस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई थी। वह अभियुक्त स्वयं चलकर पुलिस के पास पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। आसिफ उर्फ़ चीका सहारनपुर के कुतुबशेर थाने पर पहुंचा और वहां के थाना प्रभारी के कक्ष में दाखिल हुआ। थाना प्रभारी के सामने जाते ही उसने कहा कि " मेरा नाम आसिफ उर्फ़ चीका है। मेरे खिलाफ गोकशी का मामला दर्ज है। तीन महीने से फरार चल रहा हूँ। अभी दो दिन पहले शारिक उर्फ़ खच्चर को कोतवाली पुलिस ने मुठभेड़ में घायल कर दिया। मुझे बहुत डर लग रहा है। अगर मैं इसी तरह फरार रहा तो किसी दिन पुलिस की गोली का शिकार हो जाऊंगा। इससे बेहतर है कि गिरफ्तार होकर जेल चला जाऊं।”

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पंजाब– हरियाणा हाईकोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश के कानून-व्यवस्था की तारीफ़ की

वर्ष, 2019 के जून माह में, पंजाब–हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश की ही तर्ज पर गैंगस्टर्स को जड़ से उखाड़ फेंका जाए। कोर्ट ने कहा कि ‘ गैंगस्टर्स के बीच अपने– अपने क्षेत्रों में वर्चस्व कायम करने के लिए घटनाएं हो रही हैं। यह समाज और कानून–व्यवस्था दोनों के लिए खतरनाक है।’  उल्लेखनीय है कि लुधियाना में वर्ष, 2013 में पिंकू की राजेश कुमार उर्फ़ बाक्सर ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। यह घटना गैंगस्टर्स के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद के चलते हुई थी। जनपद न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई के बाद राजेश कुमार उर्फ़ बाक्सर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस मुकदमे के दोषी राजेश कुमार उर्फ़ बाक्सर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, मगर हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया और कहा कि “पंजाब और हरियाणा में इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं जिसमें दो गैंग वर्चस्व कायम करने के लिए एक–दूसरे को निशाना बना रहे हैं। इसलिए दोनों राज्यों को उतर प्रदेश की तर्ज पर गैंगस्टरों से सख्ती से निपटने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए।” 

 उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1986 लागू है। इसके अंतर्गत कई प्रावधान एवं विशेषाधिकार हैं। इसे गैंगस्टर्स और संगठित अपराध में लिप्त अपराधियों पर नियंत्रण करने के लिए बनाया गया है। इस कानून के अंतर्गत कम से कम दो वर्ष और अधिक से अधिक आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। इस कानून के तहत गवाहों की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रावधान है और ऐसे अपराधियों पर अलग से अदालत गठित कर उनके खिलाफ सुनवाई की जाती है।