नई शिक्षा नीति के जरिए सामाजिक समरसता की ओर बढ़ते कदम

    दिनांक 29-सितंबर-2020   
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डॉ. प्रकाश बरतूनिया
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर निर्मित की गई है। इसमें गुणवत्ता पर तो सर्वाधिक बल दिया ही गया है साथ ही शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों की चिन्ता की गई है। छात्र, शिक्षक, अभिभावक एवं समाज के हितों को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्र हितों को सर्वोपरि मान कर इस शिक्षा नीति को निर्मित किया गया है। 
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29 जुलाई, 2020 को भारत सरकार द्वारा जारी की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बहुत चिन्तन, मनन और अध्ययन के पश्चात घोषित हुई है। घोषित किये जाने से पूर्व इस पर पूरे देश में अनेक गोष्ठियां, संगोष्ठियां, सेमिनार, सम्मेलन, वर्कशॉप आदि के आयोजन किये गये। इन कार्यक्रमों में देशभर के सुविख्यात शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, विद्वानों द्वारा व्यक्त किए गए मत, विचार, सुझाव, नवाचार आदि प्राप्त कर इन्हें इस शिक्षा नीति में सम्मिलित किए जाने के प्रयास भी दिखाई देते हैं। इनके अतिरिक्त आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक निश्चित अवधि तक ऑन-लाइन या लिखित सुझाव भी आमंत्रित किये गये थे। इसमें अधिक से अधिक लोगों के सुझाव एवं विचार सम्मिलित किये जाने के प्रयास भी हुए हैं। इन सब प्रयासों के मन्थन के बाद निकले नवनीत के रूप में आज यह शिक्षा नीति हमारे सामने विद्यमान है।

नई शिक्षा नीति में शिक्षा, शिक्षण तथा शिक्षक की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिये जाने का उल्लेख हैं। इसमें व्यवसायिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा एवं जीवन पर्यन्त सीखने, प्रौद्योगिकी का प्रयोग, डिजिटल शिक्षा, ऑन-लाइन शिक्षा के साथ भारतीय भाषाओं, कला और संस्कृति के संवर्धन, लैंगिक समावेशी निधि, बालिकाओं की शिक्षा आदि के विशेष प्रावधान सम्मिलित हैं। शिक्षा से जुड़े लगभग सभी पहलुओं पर समग्रता, समेकित एवं व्यापक रूप से विचार-विमर्श कर इन्हें अंतिम रूप दिया गया है। इसीलिए नई शिक्षा नीति को सर्वसमावेशी, सर्वस्पर्शी, समेकित, समतावादी एवं समग्रतावादी शिक्षा नीति माना गया है।

पिछड़ा वर्ग विकास की योजनाएं एवं सुविधाएं
शिक्षा नीति में समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्ग के विकास हेतु अनेक योजनाओं एवं सुविधाओं के प्रावधान किये गये हैं। शिक्षा नीति में पिछड़ा वर्ग का आशय केवल अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी मात्र से नहीं है, बल्कि इसमें इसका व्यापक अर्थ लिया गया है। यानी इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित समूह भी सम्मिलित है। पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए विद्यालय निर्माण को बढ़ावा देने की दृष्टि से न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेष शिक्षा क्षेत्र
देश के ऐसे पिछड़े क्षेत्रों में जो उच्च शिक्षण संस्थाओं और तकनीकि शिक्षण संस्थाओं से वंचित रह गए हैं, उन क्षेत्रों में विशेष शिक्षा क्षेत्र (सेज) की स्थापना की जाएगी। विशेष शिक्षा क्षेत्र की अवधारणा स्वतंत्रता के पश्चात शिक्षा जगत में पहली बार सामने आई है। पिछड़े वर्ग की शिक्षा के लिए ऐसे विशेष शिक्षा क्षेत्रों की स्थापना करने के लिए पर्याप्त धनराशि का आवंटन भी विशेष रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। विशेष शिक्षा क्षेत्रों में पाठ्यक्रम अधिक समावेशी बनाया जाएगा। इन क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं में शिक्षण देने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेष शिक्षा क्षेत्रों में सकल नामाकंन अनुपात (जी.ई.आर- ग्रास इन्रोलमेंट रेशियो) के लक्ष्य अन्य क्षेत्रों से अधिक निर्धारित किये जाएंगे। इन क्षेत्रों में उत्तम गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षा संस्थान भी स्थापित किये जाएंगे।
 
पिछड़े वर्ग के उत्थान हेतु सहायता की योजनाएं
शिक्षा नीति-2020 में पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृद्धि एवं आर्थिक सहायता में वृद्धि की जाएगी। शिक्षण संस्थाओं को भी इसी प्रकार के प्रयास किये जाने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स चलाये जायेंगे। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि पिछड़े वर्ग के कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए एक विशेष व्यवस्था रहेगी, जिससे इन्हें अन्य छात्रों के साथ शिक्षा में बराबरी के अवसर मिल सकें। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पिछड़ा वर्ग और सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूह के छात्रों के लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल का विस्तार किया जाएगा ताकि इन वर्गों को सुविधा उपलब्ध हो सके। पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा में वर्तमान ड्राप-आउट दर को कम करने का लक्ष्य भी रखा गया है, विशेषकर छात्राओं के वर्तमान ड्राप-आउट रेट को कम करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति में शिक्षा बजट को भी अन्तराष्ट्रीय बजट की समानता के अन्तर्गत लाते हुए 6 फीसदी तक कर दिये जाने की घोषणा की गई है, जो पूर्व में मात्र 3 फीसदी के आस-पास था। इसे पिछले बजट की राशियों से लगभग दोगुनी बजट राशि बढ़ाये जाने का प्रावधान किया गया है।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा के सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर निर्मित की गई है। इसमें गुणवत्ता पर तो सर्वाधिक बल दिया ही गया है साथ ही शिक्षा से जुड़े सभी हितधारकों की चिन्ता की गई है। छात्र, शिक्षक, अभिभावक एवं समाज के हितों को प्राथमिकता देते हुए राष्ट्र हितों को सर्वोपरि मान कर इस शिक्षा नीति को निर्मित किया गया है। इसमें समाज के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, समाजसेवी, सह्दय, सेवाभावी, क्रीड़ा, कला, साहित्य, संस्कृति से जुड़े हुए सदस्य तथा समाज के लिए कुछ करने की भावना रखने वाले सदस्यों की भावना, अनुभव, ज्ञान, विशेषज्ञता का लाभ शिक्षा जगत को दिलाये जाने के प्रयास दिखाई दिये जाते हैं।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पिछड़े वर्ग (अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूह) के विकास की अनेक योजनाओं और सुविधाओं का प्रावधान कर इन वर्गों को अवसरों की समानता उपलब्ध कराये जाने का प्रयास सामाजिक समरसता की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। आशा है राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भविष्य में देश की एकता और अखण्डता को और अधिक सशक्त बनाएगी तथा समाज में सौहार्दता का वातावरण निर्मित करने में निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करेगी।
(लेखक बाबासाहेब आंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलाधिपति हैं)