हिंदू सभ्यता मिटा रहे कट्टरपंथी

    दिनांक 03-सितंबर-2020   
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पाकिस्तान में कट्टरपंथी मुसलमान चुन-चुन कर हिंदुओं की सभ्यता-संस्कृति को मिटाते जा रहे हैं। ल्यारी, जहां बड़ी संख्या में देवालय थे, वहां अब कुछ नहीं है। बीते कुछ वर्षों के दौरान अकेले कराची में ही 1,000 मंदिर नष्ट कर दिए गए। हाल ही में कराची के ल्यारी में करीब 100 साल पुराने हनुमान मंदिर को जमींदोज कर उसमें रखी सोने की मूर्तियां गायब कर दी  गई
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कराची के ल्यारी में आजादी के पहले बने मंदिर को एक हनुमान मंदिर को तोड़ दिया गया


पाकिस्तान में रातोंरात एक प्राचीन हनुमान मंदिर को जमींदोज कर दिया गया। जिस समय मंदिर के आसपास बसे लोग गहरी नींद में थे, इस मंदिर पर बुल्डोजर चलाया गया और मूर्तियां भी गायब कर दी गईं। कई मूर्तियां सोने की थीं, जिनका पता नहीं चल रहा। स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच कर सात दिन में स्थिति स्पष्ट करने का दावा किया था। लेकिन सात दिन बाद भी न तो आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई और न ही यह बताया गया कि मंदिर तोड़ने के बाद उसके अंदर रखी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और अन्य सामान कहां गए। उसे किसने गायब किया? यह घटना कराची के ल्यारी इलाके की है। पाकिस्तान में मंदिर तोड़ने की यह पहली घटना नहीं है। सुनियोजित साजिश के तहत इस इस्लामिक देश से धीरे-धीरे हिंदू संस्कृति और सभ्यता को मिटाया जा रहा है।

कराची शहर के ल्यारी के बगदादी इलाके में एक कपड़ा मिल है। उसके पीछे आठ दशक पुराना एक हनुमान मंदिर था। इससे सटे एक निजी बिल्डर द्वारा रिहायशी सोसायटी तैयारी कराई जा रही है। मंदिर के इर्द-गिर्द हिंदुओं के करीब 20 परिवार कच्चे-पक्के मकान में रहते थे, उन्हें भी ध्वस्त कर दिया गया। हीरालाल ने बताया कि छह महीना पहले बिल्डर ने यह कहकर उनसे जमीन अधिग्रहण किया था कि, यहां जो इमारत बनेगी उसमें उन्हें दो कमरे दिए जाएंगे। बिल्डर ने जमीन के साथ यह कहते हुए मंदिर को भी अपने कब्जे में ले लिया कि इसे यथावत रखा जाएगा। मंदिर के पुजारी हर्षी का कहना है कि लॉकडाउन से पहले तक वह मंदिर में नियमित पूजा-पाठ कर रहा था। लॉकडाउन खुलने के बाद उसने मंदिर जाना चाहा तो बिल्डर ने यह कहकर रोक दिया कि अभी मंदिर-मस्जिदें बंद हैं। धार्मिक स्थलों को खुलने की इजाजत मिलने पर वह यहां नियमित पूजा-पाठ कर सकते हैं। पुजारी ने कई बार कोशिश की, लेकिन उसे चारदीवारी के अंदर मंदिर तक नहीं जाने दिया गया। अंत में उसने स्थानीय लोगों से विनती की कि उसे मंदिर और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की सफाई और दीया-बत्ती करने के लिए वहां तक जाने दिया जाए। मगर कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। इस बीच, 16 अगस्त की रात मंदिर को बुल्डोजर से जमींदोज कर दिया गया। उसमें रखी तमाम प्रतिमाएं, पूजन सामग्री, देवी-देवताओं की तस्वीरें या तो गायब कर दी गर्इं या नष्ट कर दी गर्इं। साथ ही, हिंदुओं के 20 घरों को भी तोड़ दिया गया। पुजारी हर्षी का कहना है कि तेल-सिंदूर चढ़ाने से मंदिर की कई सोने की प्रतिमाएं काली पड़ गई थीं, जिनका अता-पता नहीं है।

घटना के अगले दिन एक स्थानीय व्यक्ति मोहम्मद इरशाद बलूच द्वारा मंदिर तोड़ने की जानकारी हिंदुओं को देने पर वहां भीड़ इकट्ठी हो गई। इरशाद बलूच का कहना है कि वह बचपन से मंदिर देखता आ रहा था। अचानक गायब कर दिए जाने से हिंदुओं के साथ वह भी मर्माहत है। मंदिर तोड़ने के विरोध में वहां हिंदुओं की भारी भीड़ इकट्ठी होने पर ल्यारी के सहायक आयुक्त अब्दुल करीम मेमन भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। फिर किसी तरह गुस्साई भीड़ को शांत कराया गया। उस दौरान मेमन ने पुरातत्विद सहित सात अधिकारियों की टीम गठित कर मंदिर तोड़ने, मूर्तियां गायब करने, मंदिर के जमीन का मालिकाना हक सहित तमाम पहलुओं पर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने तथा इसके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। ल्यारी के हिंदू कार्यकर्ता मोहन लाल कहते हैं, समिति गठन के पखवाड़ा बाद भी न तो इस पर रिपोर्ट आई है, न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है। ऐसे में वे अगला कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। प्रशासन से इंसाफ नहीं मिलने पर कराची के हिंदू कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हालांकि वहां से भी हिंदुओं का इंसाफ मिलने की उम्मीद कम ही है। ऐसा एक नहीं अधिकांश मामलों में देखा जा चुका है। पाकिस्तान की अदालतें यदि हिंदुओं को इंसाफ दिलाने के प्रति सजग और सक्रिय रहतीं तो इस देश में न केवल मंदिर सुरक्षित रहते, बल्कि अल्पसंख्यों की बहू-बेटियां भी सरेआम उठाए जाने से बच जातीं। पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार और उनकी बेटियों के कन्वर्जन की घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।

नहीं पहुंच सकते मंदिरों तक
ब्रिटिश विद्वान एवं यात्री रिचर्ड बर्टन की मानें तो पूरे विश्व में सिंध प्रांत का लाकी इकलौता ऐसा क्षेत्र था, जहां बड़ी संख्या में शिवालय थे। लेकिन अब यहां कुछ भी नहीं है। सरकारों की गलत नीतियों व बहुसंख्यकों के कुदृष्टिकोण के चलते लाकी ही नहीं, देश के बाकी हिस्से में भी पूजास्थलों के अवशेष ही बचे हैं। यहां के ऐतिहासिक मंदिरों पर शोध करने वाली पत्रकार रीमा अब्बासी कहती हैं कि मंदिरों को धरोहर न मानकर इसे संकीर्ण दृष्टि से देखने के कारण अब इनके अवशेष भी मिटने के कगार पर हैं। खैबर पख्तूनख्वा एवं बलूचिस्तान प्रांत में गिनती के मंदिर और धर्मस्थल बचे हैं। लाहौर में अब केवल दो मंदिर हैं, जिनमें से एक का कपाट बंद रहता है। शहर में पिछले कुछ वर्षों में एक हजार मंदिर नष्ट कर दिए गए। अधिकतर मंदिर तो बिल्डर ही हड़प गए। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने बंटवारे के बाद भारत जाने वाले हिंदुओं की संपत्ति दस हजार रुपये में बेचने की एक योजना 1961 में लागू की थी। हालांकि धार्मिक स्थलों को इससे दूर रखा गया था, लेकिन योजना में खामियों के चलते हिंदुओं की संपत्तियों के पास मौजूद धार्मिक स्थलों के निकट मकान, गोदाम आदि बना दिए गए। मंदिर तक जाने का रास्ता नहीं छोड़ा गया। रावलपिंडी के पुराना बाजार स्थित 1926 में निर्मित यमुना देवी मंदिर में श्रद्धालु अनाज की बोरियों पर चढ़कर मंदिर के छत से मंदिर के अंदर जाते हैं। बीबीसी उर्दू की पत्रकार रहीं नुखबत मलिक के मुताबिक, सबसे पहले 2015 में खैबर पख्तूनख्वा के कर्क जिले के गांव टेरी स्थित परमहंस महाराज की समाधि के चारों ओर मकान बनाकर वहां पहुंचने का रास्ता बाधित किया गया। समाधि स्थल पर कृष्ण मंदिर था, जिसे तोड़कर वहां इमारत खड़ी कर दी गई। 

6 माह पहले एक बिल्डर ने हिंदुओं की जमीन अधिग्रहीत की थी। उसने जमीन के साथ मंदिर को अपने कब्जे में लेकर चारदीवारी खड़ी कर दी। लॉकडाउन से पहले तक मंदिर का पुजारी वहां पूजा-पाठ कर रहा था, लेकिन लॉकडाउन के बाद बिल्डर यह कहकर रोक दिया कि अभी धार्मिक स्थल बंद हैं। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद मंदिर में नियमित पूजा-पाठ की जा सकती है। 16 अगस्त की रात मंदिर को बुल्डोजर से जमींदोज कर दिया गया और उसमें रखी सोने की मूर्तियों सहित अन्य चीजें या तो गायब कर दी गई या नष्ट  कर दी गई।

पाकिस्तान हिंदू परिषद के अध्यक्ष एवं नेशनल असेंबली के सदस्य डॉक्टर रमेश वांकोआनी ने इस मसले को सर्वोच्च न्यायालय और तमाम बड़े राजनेताओं के दरबार में उठाया, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। परिषद का दावा है कि देश में ऐसे 1400 मंदिर व धर्मस्थल हैं, जहां तक पहुंचना अब संभव नहीं। पंजाब के चकवाल शहर से 30 किलोमीटर दूर कटासराज गांव के प्रसिद्ध शिव मंदिर के साथ भी यही हुआ। इसके इर्द-गिर्द के सारे भूखंड पर सीमेंट फैक्ट्रियों ने कब्जा कर लिया। मंदिर के प्राकृतिक झील से पानी निकाल कर फैक्ट्रियों में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके कारण झील सूखने लगी है। पाकिस्तान वक्फ बोर्ड के पुजारी रहे जयराम कहते हैं कि 1917 में सरकार ने ऐसी नीतियां अपनार्इं कि देश से हिंदू संस्कृति ही मिटने लगी।

इधर राममंदिर आंदोलन, उधर मंदिरों पर हमला
अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद पाकिस्तान में कट्टरपंथियों ने 125 से अधिक मंदिर नष्ट कर दिए। उस दौरान बांग्लादेश, पाकिस्तान और ईरान सहित कई देशों में भारतीय दूतावास पर हमले भी हुए थे। 2-8 दिसंबर, 1992 के दौरान पाकिस्तान के हिंदुओं को सर्वाधिक तबाही झेलनी पड़ी थी। पाकिस्तान में बीबीसी के लिए काम करने वाले फोटो पत्रकार शिराज हसन कहते हैं कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के बाद पाकिस्तान में लोग मंदिरों पर पर टूट पड़े। सौ से अधिक मंदिरों को जमींदोज कर दिया गया, लूटपाट की गई। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं खंडित की गर्इं। पाकितान की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस उत्पात में 500 से अधिक हिंदू परिवार प्रभावित हुए थे। हसन अपने एक ट्वीट में लिखते हैं कि बंटवारे के बाद से कई हिंदू परिवार मंदिरों में रहते हैं। बाबरी आंदोलन के समय पाकिस्तान में सर्वाधिक यही परिवार प्रताड़ित किए गए। इस दौरान रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर का गुबंद दंगाइयों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। ल्यारी में मंदिर ढहाने की ताजी घटना में भी हिंदुओं को इंसाफ मिलने की उम्मीद कम ही है।             (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)