भारत—नेपाल सीमा पर विदेशी फंडिंग से उगते मदरसे, सुरक्षा एजेंसियां चौकस

    दिनांक 30-सितंबर-2020   
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भारत—नेपाल खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय जिलों में एकाएक मदरसों का खुलना, मस्जिदों-मुसाफिरखानों का पुनर्निर्माण, निश्चित ही किसी नई साजिश की ओर इशारा है। हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों के पास से कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। खबर है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के नेपाल से लगे जिलों में नए—नए मदरसे खुल गए हैं, साथ ही इन्हें सऊदी अरब, तुर्की और कतर जैसे देशों से पैसा भेजा जा रहा है।
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भारत—नेपाल खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारतीय जिलों में एकाएक मदरसों का खुलना, मस्जिदों-मुसाफिरखानों का पुनर्निर्माण, निश्चित ही किसी नई साजिश की ओर इशारा है। हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों के पास से कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। खबर है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के नेपाल से लगे जिलों में नए—नए मदरसे खुल गए हैं, साथ ही इन्हें सऊदी अरब, तुर्की और कतर जैसे देशों से पैसा भेजा जा रहा है। सीमा से सटे गांव—शहरों के मुसाफ़िर खानों और मस्जिदों के लिए भी दावत—ए—इस्लामिया नामक संगठन के जरिये फंडिंग हो रही है। इन इलाकों में "तालीम" नाम का एक एनजीओ सक्रिय है, जो मदरसों के लिए आर्थिक गतिविधियों का संचालन करने में लगा है।

जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों के हाथ मुस्तकीम उर्फ अबू यूसुफ नाम का आतंकी लगा था, जिसने पूछताछ में बहुत ही अहम जानकारियां दी है। मुस्तकीम की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में उसके घर से विस्फोटक पदार्थ, फिदायीन जैकेट्स भी मिली थी। इस दौरान आतंकी ने बताया था कि वह 2017 में नेपाल बॉर्डर में सप्तपुरी तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल हुआ था। इस जानकारी के बाद उत्तर प्रदेश के महाराज गंज, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और सिद्धार्थ नगर के जिलों के साथ—साथ बिहार के रौतहट, परसा, कपिलवस्तु, सुनसारी बारा जिलों में सक्रिय मदरसों की जाँच—पड़ताल शुरू की गई है। अकेले सिद्धार्थ नगर जिले में पिछले एक साल में 47 नए मदरसे खुले हैं, जबकि जिले में 452 मदरसे पहले से थे। जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों में भी मस्जिद—मदरसों के एकाएक बढ़ने के प्रमाण मिले हैं।

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सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट में ये बात सामने आई है कि भारत—नेपाल सीमा के खुले होने से कोई भी बेरोकटोक आ जा सकता है। करेंसी की अदला—बदली में भी कोई परेशानी नही है। लिहाजा भारत विरोधी विरोधियों का इस रास्ते काम करना सरल है। पिछले तीन दशकों से माफिया दाऊद की डी कंपनी भी यहां सक्रिय रही है। तो दूसरी तरफ आतंकी संगठन लश्कर—ए—तैयबा का सरगना मुहम्मद उमर मदनी की भारत—नेपाल सीमांत इलाकों में सक्रियता भारत की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बड़ा रही हैं। इनके साथ—साथ ही आईएसआई एजेंट यूनिस अंसारी, जालिम मियां उत्तर प्रदेश-नेपाल में ज्यादा सक्रिय है और अपनी गतिविधियों को बखूबी अंजाम दे रहे हैं।

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बहरहाल, भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने भारत—नेपाल सीमा पर अपने गुप्तचर तंत्र और सुरक्षाबलों को और चौकन्ना किया है। इस मसले पर उत्तर प्रदेश स्थित बस्ती के आईजी अनिल कुमार राय कहते हैं कि केंद्र से मिले इनपुट के बाद से जांच पड़ताल की जा रही है, साथ ही नेपाल से भी जानकारी साझा की गई है। भारत—नेपाल की खुली सीमा को तारबाड़ और अन्य सुरक्षा उपायों से सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।