पाकिस्तान का बेटी बेचो अभियान

    दिनांक 30-सितंबर-2020   
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पाकिस्तान में चलने वाली चीन की परियोजनाओं से जुड़े अधिकारी काम खत्म होने के बाद भी वहां डटे रहे। इसी दौरान उन्होंने एक गिरोह तैयार किया और स्थानीय एजेंट की मदद से पाकिस्तानी लड़कियों को चीन में देह व्यापार में धकेला जाने लगा। ‘चीनी दूल्हों’ के गिरोह की कलई खोलती रिपोर्ट की दूसरी कड़ी -
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पिछले साल पहली बार निकाह के बहाने पाकिस्तानी लड़कियों को उन्हें चीन में देह व्यापार में धकेलने वाले ‘
चीनी दूल्हों’ के एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। इसमें छह लोग पकड़े गए थे, जिनमें एक चीनी दूल्हा शामिल था (फाइल चित्र)

हमदर्दी नहीं, हैवानियत पाकिस्तानियों एवं चीनियों के बीच शादी-ब्याह का सिलसिला कब, कैसे शुरू हुआ। इसके वर्ष, समय एवं कारण को लेकर तरह-तरह के दावे हैं। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसकी शुरुआत गिलगित से हुई। यह इलाका चीन के शिनजियांग प्रांत से सटा है। सांस्कृतिक तौर पर दोनों इलाकों में खास फर्क नहीं है। गिलगित के उइगर मुसलमानों का शिनजियांग के मुसलमानों के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता है। बड़ी संख्या में गिलगित की लड़कियां शिनजियांग में ब्याही गई हैं, पर जबसे इन पर कट्टरवाद फैलाने का आरोप लगा है, चीनी सरकार ने शिनजियांग के मुसलमानों को एक तरह से नजरबंद कर दिया है। गिलगित की लड़कियों और शिनजियांग के दूल्हों को भी आने-जाने की इजाजत नहीं हैं।

चीन सरकार ने शिनजियांग के मुसलमानों पर मजहबी पाबंदी लगा रखी है। इस बार उन्हें रोजा भी नहीं रखने दिया गया। गिलगित के लोगों का कहना है कि आने-जाने पर पाबंदी से दोनों ओर के कई परिवार तबाह हो गए हैं। अब पाकिस्तान-चीन के पुराने रिश्ते का हवाला देकर लड़कियों को चीन में देह व्यापार में पहुंचाया जा रहा है। जो पाकिस्तानी परिवार निकाह को लेकर जल्द शीशे में नहीं उतरते, उन्हें शिनजियांग का हवाला दिया जाता है। एक कहानी यह भी है कि फैसलाबाद के हवेली बहादरशाह में एक बिजली परियोजना के कार्यान्वयन के लिए चीन के झांग से एक व्यक्ति आया था। काम पूरा होने के बाद वह यहां से जाने के बजाए ईसाई लड़कियों की तस्करी के धंधे में लग गया। इसके लिए उसने एक गिरोह बनाया, जिसमें स्थानीय लोगों को एजेंट के तौर पर शामिल किया। कहते हैं, पहले गिरोह प्रति लड़की 90 लाख से एक करोड़ रुपये तक देता था। लेकिन जैसे-जैसे गिरोह की संख्या बढ़ी, लड़कियों की कीमत घटती गई। संघीय जांच एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अन्य चीनी विकास योजना को पूरा कराने चीन से आए लोगों ने फैसलाबाद के ईडन गार्डन में प्रतिमाह 30 हजार रुपये में किराये का फ्लैट लेकर रहना शुरू किया। उन्हें स्थानीय पुलिस से सुरक्षा मिली हुई थी। प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद वे यहां करीब नौ महीने रहे। इस दौरान गिरोह को अमली जामा पहनाया गया। गिरोह के सरगना जियानहाई ने धंधे को विस्तार देने के लिए कुछ समय के लिए अपने बहनोई वांग पेंग को भी पाकिस्तान बुलाया था। खुफिया एजेंसी कहती है कि रिंगाल्डर जियानहाई की पत्नी और पिता दिखावे के लिए चीन में मैरिज ब्यूरो चलाते हैं। मैसेजिंग एप वीचैट के जरिए पाकिस्तानी एजेंट उन्हें स्थानीय लड़कियों की तस्वीरें भेजते हैं। फिर वही तस्वीरें दिखाकर लड़कियों का सौदा किया जाता है। जियानहाई व उसका बहनोई पेंग स्थानीय एजेंट की मदद से लड़कियों की खोज के लिए चर्च व अविकसित क्षेत्रों का दौरा करते थे। वहां कोई लड़की पसंद आने पर इनका निकाह वाला नाटक शुरू होता था।

पाकिस्तान के कराची शहर स्थित सूफी दरगाह ‘दाता दरबार’ के बाहर भीख मांगने वाली एक बच्ची को यह गलतफहमी थी कि उसे कोई मूर्ख नहीं बना सकता। होश संभालते ही वह भीख मांगने लगी थी। वह रोजाना लोगों को अपनी मजबूरियों की नई-नई कहानियां सुनाती और उनसे अच्छी-खासी रकम ऐंठ लेती थी। लेकिन एक दिन उसकी यह होशियारी ही उस पर भारी पड़ गई। कुछ लोगों के बहकावे में आकर वह मान बैठी कि जल्द ही उसके दिन बहुरने वाले हैं। उसे भीख मांगने से छुटकारा मिल जाएगा और वह भी विदेश में विलासितापूर्ण जीवन बिता सकेगी। उसके सपनों का राजकुमार उसकी सारी इच्छाएं पूरी करेगा। लेकिन तीन महीने की यातना भरी जिंदगी गुजारने के बाद उसके सारे भ्रम टूट चुके हैं। वह फिर से दरगाह के बाहर भीख मांग रही है। पहले यह काम करते हुए उसकी आबरू बची हुई थी, लेकिन सब्जबाग दिखाने वाले दलाल उसे अपने साथ ले गए और एक बंद कोठरी में रख कर तीन महीने तक उसकी आबरू को तार-तार किया। रूह को झकझोर देने वाली यह पाकिस्तान की ऐसी पहली घटना नहीं है। ऐसी तमाम कहानियों ने इन दिनों पाकिस्तान व चीन में खलबली मचा रखी है। इसे लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बीते चार-पांच वर्ष में करीब 2,000 लड़कियों को चीन में देह व्यापार में पहुंचा दिया गया। कई का तो पता भी नहीं है कि वह जिंदा हैं या मार दी गइं। आशंका है कि कुछ लड़कियों को विदेश ले जाकर उनके अंगों को प्रत्यारोपित करा दिया गया। सलीम इकबाल बताते हैं कि चीन में देह व्यापार में फंसी कई लड़कियां उनके संपर्क में हैं

पाकिस्तान में हाल के दिनों में ऐसे कई गिरोहों का खुलासा हुआ है, जो देश के गरीब परिवारों की बेटियों को विदेश में विलासिता की जिंदगी बिताने का सब्जबाग दिखाकर चीनी दूल्हों से निकाह के नाम पर उन्हें चीन में देह व्यापार में धकेल रहे हैं। वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे में पहले केवल पाकिस्तानी ईसाई लड़कियोंं का शोषण हो रहा था, पर अब हिंदू-मुस्लिम बहू-बेटियां भी इन गिरोहों की चपेट में हैं। पाकिस्तानी लड़कियों का सौदा करने वाले एक गिरोह में चीनी युवकों के अलावा स्थानीय दलाल, मौलवी, चर्चों के पादरी, वकील, कई शीर्ष पुलिस अधिकारी व पाकिस्तान में वेश्यालय चलाने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। चीन में देह व्यापार से पाकिस्तानी लड़कियों को बाहर निकालने के लिए संघर्षरत फैसलाबाद के सामाजिक कार्यकर्ता सलीम इकबाल बताते हैं कि इस गिरोह में डीएसपी स्तर के कई पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है। वकील-पुलिस अधिकारियों का गठजोड़ लड़कियों को विदेश भेजने के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी कराने में इस गिरोह की सहायता करते हैं।

गैंग की महिलाएं निर्धन परिवारों की बच्चियों के चीनी युवकों से निकाह का झांसा देकर सौदा कराती हैं। निकाह का खर्च चीनी युवक उठाते हैं। इसके अलावा, लड़की के परिवार वालों को 30 से 50,000 रु. की आर्थिक मदद दी जाती है, जबकि दलाल के तौर पर पाकिस्तान में काम करने वाले चीनी दूल्हे हर लड़की के बदले स्थानीय दलाल को 3-5 लाख रुपये देते हैं। इस खेल को अंजाम देने के लिए बाकायदा मैरिज ब्यूरो चलाए जा रहे हैं। अखबारों एवं शहरों की दीवारों पर इश्तहार लगाए जाते हैं। इसके माध्यम से गरीब मां-बाप को प्रलोभन दिया जाता है। चूंकि पाकिस्तान, चीन का मित्र देश है, इसलिए चीनियों की संदिग्ध गतिविधियों की ओर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया। अब जबकि ईसाई लड़कियों के साथ मुस्लिम लड़कियों के गायब होने पर देश में बवाल मचा हुआ है तो सरकारी एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। पाकिस्तान के दक्षिण तटीय शहर कराची, लाहौर व फैसलाबाद में बहुतायत ईसाई रहते हैं। पंजाब प्रांत के गांवों एवं देश की राजधानी इस्लामाबाद में भी इनकी अच्छी-खासी आबादी है, जो अब धीरे-धीरे घट रही है। पाकिस्तानी ईसाई अन्य समुदाय के मुकाबले राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सबसे कमजोर माने जाते हैं, इसलिए कोई इनकी परवाह नहीं करता। हाल में संघीय जांच एजेंसी एफआईए ने रावलपिंडी, लाहौर, फैसलाबाद और इस्लामाबाद सहित अगल-अलग शहरों में छापे मारकर अलग-अलग गिरोहों के 20 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 14 चीनी व बाकी पाकिस्तानी एजेंट हैं। इनके कब्जे से तीन पाकिस्तानी लड़कियां भी बरामद की गई हैं। पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार-पांच वर्षों में करीब दो हजार पाकिस्तानी लड़कियां चीन में देह व्यापार में पहुंचा दी गर्इं। कई का तो पता भी नहीं है कि वह जिंदा हैं या मार दी गईं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि कुछ लड़कियों को विदेश ले जाकर उनका अंग प्रत्यारोपण करा दिया गया। सलीम इकबाल बताते हैं कि चीन में देह व्यापार में फंसी कई लड़कियां उनके संपर्क में हैं। उनमेंं से कुछ किसी भी तरह वहां से निकलना चाहती हैं, जबकि अधिकांश ने इसी नरक को अपना भाग्य मान लिया है तथा अन्य समाज के डर से वहां से निकलना नहीं चाहतीं।

पुलिस कार्रवाई या अन्य तरह से चीनी युवकों के चंगुल से छूटी लड़कियां बताती हैं कि लड़की पसंद आने पर चीनी युवक स्थानीय दलालों की मदद से चर्च या किसी मजहबी-धार्मिक स्थल पर चट-पट शादी कराने का ढोंग रचते हैं। फिर महीनों तक उन्हें दूसरे शहरों में किराए के घरों में रखा जाता है। पासपोर्ट-वीजा सहित दूसरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद लड़कियों को चीन ले जाकर देह व्यापार में धकेल दिया जाता है। चीनी दूल्हे के चंगुल से निकलने में सफल कराची के दरगाह के बाहर भीख मांगने वाली 13 वर्षीया बच्ची ने बताया कि निकाह के बाद उसे जिस कमरे में रखा गया, वहां पहले से कई लड़कियां एवं मर्द थे। वह जितने दिन वहां रही, करीब दस चीनी पुरुषों ने उसका शारीरिक शोषण किया। बाकी लड़कियों के साथ भी यही हुआ। उन्हें कोठरी से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। उनमें एक स्थानीय व्यक्ति मुखिया था, जिसे सब बॉस बुलाते थे। गूगल एप की मदद से वह चीनी लड़कों एवं पाकिस्तानी लड़कियों के बीच दुभाषिए का काम करता था। उन्हें जब अपने ‘पतियों’ से कुछ कहना होता या दूल्हे को अपनी दुलहन से कुछ कहना होता तो मोबाइल फोन पर गूगल एप की मदद से उनकी बातें चीनी-उर्दू में अनुवादित की जाती थीं। उसने बताया कि वह कोठरी वास्तव में देह व्यापार में उतारी जाने वाली लड़कियों की कार्यशाला थी, जहां उन्हें चीनी मर्दों से अंतरंग संबंध बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता था।

एक अखबार के संवाददाता को इस कोठरी की भनक लगी तो वह वहां पहुंच गया। इसी समय मौका पाकर वह बच्ची भाग निकली। बाकी लड़कियों का क्या हुआ, उसे नहीं मालूम। पाकिस्तानी न्यूज पोर्टल उर्दू प्वाइंट से बातचीत में फैसलाबाद की एक पीड़ित ईसाई लड़की महक परवेज ने बताया कि उसे एक शादी समारोह में एक स्थानीय एजेंट की मदद से एक चीनी युवक ने पसंद किया। उसने खुद को ईसाई बताया। उसने दो दिन में उसके मां-बाप को राजी कर चीन ले जाने के नाम पर उससे शादी कर ली। फिर उसे एक फ्लैट में रखा। शहर के जिस कॉलोनी में यह फ्लैट था, उसके आसपास तीन और फ्लैट में कई चीनी युवक रहते थे, जिनके साथ कई पाकिस्तानी लड़कियां थीं। लड़कियों को बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी। एक बार महक नाश्ता लेने बाहर गई तो ‘पति’ ने उसे खूब पीटा। वह एक हाथ से अपंग था और ईसाई भी नहीं था। उसके साथ रहने वाली लड़कियों को उत्तेजक कपड़े पहनने व दूसरे मर्दों के साथ हमबिस्तर होने को कहा जाता था। एक दिन वह भी मौका पाकर भाग निकली। अब वह सलीम इकबाल की मदद से इस गिरोह के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

नाजिर कॉलोनी की सोबिया मुकद्दस का निकाह लिंग चोकेन के साथ, मारिया का जिया हे बिन और एक अन्य मारिया का निकाह चिन चिन के साथ होता, इससे पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इन चीनी युवकों के पास से काफी मात्रा में धन बरामद हुआ। नवाबनवाला की सायरा खुशकिस्मत थी जो डोंग ह्यां के साथ निकाह के बाद चीन से वापस आने में सफल रही। एक अन्य पाकिस्तानी ईसाई लड़की नोरिन कंवल का निकाह चीनी युवक शिन जियान से तय हुआ था, पर पुलिस ने इससे पहले ही खेल बिगाड़ दिया। मगर निकाह के बाद सामिया की आगिन का चेन यी बिन के साथ चीन जाने के बाद अता-पता नहीं है। चीन से भागकर आई इब्ने-मरियम कॉलोनी की नताशा रॉबिन ने बताया कि ली चांग ली से उसका निकाह हुआ था। चीन में उसे आपत्तिजनक गतिविधियों में धकेलने का प्रयास किया गया। मना करने पर प्रताड़ित किया जाने लगा। इसके बाद वह भाग कर अपने देश आ गई। इस मामले में पुलिस को एक स्थानीय एजेंट नदीम की तलाश है, जो निकाह और अच्छी नौकरी का झांसा देकर पाकिस्तान ही नहीं, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, उत्तर कोरिया तथा वियतनाम की कई लड़कियों को चीन में देह व्यापार में पहुंचा चुका है।      (लेखक पाकिस्तानी मामलों के जानकार हैं)