28 बरस बाद आया फैसला, न्यायालय ने कहा सभी आरोपी निर्दोष

    दिनांक 30-सितंबर-2020
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अयोध्या ढांचा विध्वंस मामले में फैसला आ गया है। लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर समेत जिन नेताओं को झूठा फंसाया गया सभी को सम्मान सहित निर्दोष करार दिया गया है

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बच्चा – बच्चा राम का / जन्म भूमि के काम का, राम लला के वास्ते खाले कर दो रास्ते जैसे नारों से पूरा देश गूंज रहा था। वर्ष 1989 के आस- पास श्रीराम मंदिर आन्दोलन जन आन्दोलन बन चुका था. 1990 में कारसेवकों पर मुलायम सरकार ने गोलियां भी चलवाईं। कितने ही निर्दोष कारसेवकों की जान इस गोलीबारी में गई। 1992 में अयोध्या में उमड़ी भीड़ ने विवादित ढांचा ढाह दिया।
1992 में विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह , लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती समेत 32 प्रमुख लोगों को षड़यंत्र रचने का आरोपी बनाया गया था. बुधवार को 28 बरस बाद सीबीआइ की विशेष अदालत ने सभी को बरी कर दिया. न्यायालय ने माना कि यह घटना अचानक हुई थी. इस संबंध में साजिश रचने का कोई प्रमाण नहीं मिला.
ऐसा गिरा ढांचा
6 दिसंबर 1992 को गृह मंत्रालय को आईबी के माध्यम से सूचना मिली कि करीब 200 से ज्यादा कारसेवक विवादित स्थल में दाखिल हो चुके हैं. राज्य पुलिस और पीएसी उनको रोक नहीं पा रही है. स्थानीय अफसरों ने भी प्रयास किया मगर उनको रोकने में असफल रहे. यह सूचना उस समय के प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और गृहमंत्री एसबी चव्हाण को तुरंत दी गई. केंद्रीय गृह सचिव ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी से कहा कि फैजाबाद में तुरंत केद्रीय सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया जाए. तत्कालीन गृहमंत्री एसबी चव्हाण ने दिन में साढ़े 12 बजे मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से बात की। चव्हाण ने कहा कि विवादित स्थल को तत्काल खाली कराया जाना चाहिए। कुछ देर बाद कल्याण सिंह ने अयोध्या  के कमिश्नर से बात की। उन्हें बताया गया कि कारसेवक ढांचे पर चढ़ चुके हैं और वहां कोई स्थाई निर्माण नहीं हो रहा है.
दिन में करीब एक बजे आईटीबीपी के महानिदेशक ने गृह मंत्रालय को सूचित किया कि ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और भीड़ पर नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा है. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल बी सत्यनारायण रेड्डी से वार्ता की और तत्काल दखल देने के लिए कहा. इस बीच उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने कल्याण सिंह से संपर्क किया. करीब डेढ़ बजे दिन में फैजाबाद जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का आदेश मिला कि किसी भी परिस्थिति में कारसेवकों पर गोली नहीं चलाई जाएगी. दिन में करीब 2 बजे केंद्रीय गृह मंत्री ने कल्याण सिंह से दोबारा बात की और यह पूछा है कि ढांचे की सुरक्षा के लिए अब तक क्या इंतजाम किए गए हैं ? कल्याण सिंह ने बताया कि गोली चलाने के अलावा अन्य सभी इंतजाम किए जा रहे हैं.
दिन में करीब दो बजकर तीस मिनट पर केंद्रीय गृह सचिव ने रक्षा सचिव से बात कर कुछ हेलीकॉप्टर तैयार रखने को कहा. करीब दिन में तीन बजे इंटेलिजेंस ब्यूरो ने गृह मंत्रालय को सूचित किया कि पहला ढांचा गिरा दिया गया. स्थिति तेजी से बिगड़ रही है. शाम साढ़े चार बजे मुख्य विवादित ढांचा और कुछ देर में तीसरा ढांचा भी ढह गया.

श्रीराम जन्म भूमि आन्दोलन बना जन आन्दोलन
अशोक सिंघल 1983 में विश्व हिन्दू परिषद में आये और 1984 में विहिप के सयुंक्त महामंत्री बनाए गए. उसी वर्ष अशोक सिंघल ने राम जन्म भूमि के मुद्दे को उठाया. उन्होंने सन 1983 में दिल्ली के विज्ञान परिषद में प्रेस कांफ्रेंस करके पहली बार विहिप के बैनर से यह मांग की कि काशी, मथुरा और अयोध्या को मुक्त कराया जाएगा. सन 1984 में राम जन्म भूमि के लिए पहली एकात्मता यात्रा निकाली गई. इसके बाद अशोक सिंघल ने राष्ट्र के जागरण के लिए गो माता, गंगा माता और भारत माता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रदेशों से रथ यात्राएं निकाली. यह सभी रथ यात्राएं दिल्ली में आकर एकत्र हुईं .
इस बीच वर्ष 1986 में सिविल कोर्ट के आदेश पर राम मंदिर का ताला खोला गया. वर्ष 1989 में प्रयागराज के कुम्भ में देवरहा बाबा एवं रामचंद्र परमहंस की उपस्थिति में यह तय हुआ कि गांव – गांव में शिला पूजन कराया जाएगा . सबसे पहला शिला पूजन बद्रीनाथ में हुआ. पूरे भारत में पौने तीन लाख गांवों से पूजन करने के बाद शिलाएं मंगाई गईं. इन शिलाओं को मंदिर निर्माण में लगाया जाने का संकल्प लिया गया था. 9 नवम्बर 1989 को विहिप ने अयोध्या में शिलान्यास किया. 29 मई 1990 को प्रबोधिनी एकादशी को कार सेवा करने का फैसला लिया गया. अयोध्या में भारी संख्या में कारसेवक पहुंचे. इस मौके पर भेष बदल कर अशोक सिंघल अयोध्या पहुंच गए और सबको चौंका दिया. पुलिस ने अयोध्या में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।