पाकिस्तान: सेना के खिलाफ बोलने की सजा, अगवा कर महिला अधिवक्ता को चार दिनों तक प्रताड़ित किया गया

    दिनांक 07-सितंबर-2020   
Total Views |
पाकिस्तान में यदि सेना के बारे में कुछ कहा तो गायब कर दिए जाओगे। बाद में उसकी लाश किसी सड़क या खेत में लावारिस पड़ी मिलती है। यदि कोई बच गया तो उसका हाल ऐसा होता है कि वह बोलने लायक नहीं रहता। कुछ ऐसा ही महिला अधिवक्ता इशरत नसरीन के साथ हुआ

pakistan_1  H x 
पाकिस्तानी सेना बेलगाम हो गई है। प्रधानमंत्री इमरान खान की भी उसके सामने नहीं चल रही। सैन्य अधिकारी जो चाहते, वह करते हैं। सेना के अधिकारी धीरे-धीरे अन्य विभागों पर भी काबिज होने लगे हैं। बावजूद इसके उनके काम-काज पर यदि कोई ऐतराज करता है तो उसे रहस्यमय तरीके से गायब कर दिया जाता है। या फिर देशद्रोही साबित कर उसके सामने ऐसे हालात पैदा कर दिए जाते हैं कि विरोधियों को एक दिन अपने देश को ही अलविदा कह देना पड़ता है। अभी ऐसे दो उदाहरण सामने हैं। एक मामले में एक महिला वकील का अपहरण कर चार दिनोें तक प्रताड़ित किया गया। एक दूसरे मामले में सेना में भ्रष्टाचार की पोल खोलने पर पर एक सैन्य अधिकारी को पाकिस्तान विरोधी और भारत समर्थक साबित कर उसे देश निकालने का षड़यंत्र रचा जा रहा है।
जनसभाओं में पाकिस्तानी सेना की पोल खोलने के लिए चर्चित पंजाब प्रांत के ओकारा जिले के दिपालपुर कस्बे की महिला अधिवक्ता इशरत नसरीन को एक रात अचानक कुछ लोग उठा ले गए। घटना वाली रात जब वह अपने कार्यालय में बैठकर कुछ जरूरी काम निपटा रही थीं तभी तीन-चार लोग वहां किसी केस में सलाह लेने के नाम पर वहां आए। फिर इसपर चर्चा करने के बहाने उन्हें कहीं ले गए। चार दिनों तक सुराग नहीं नहीं मिला कि महिला को ले जाने वाले कौन थे और उन्हें कहां ले गए ? महिला अधिक वक्ता के छह बच्चे हैं। मां के घर नहीं लौटने पर उन्होंने स्थानीय थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। चार दिनों बाद महिला वकील कस्बे के एक खेत में बेहोशी की हालत में मिलीं। उनके हाथ-पैर रस्सियों से जकड़े थे। मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। चार दिनों तक उन्हें नशे का इंजेक्शन एवं प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण वह न ठीक से बोल पा रही थीं, न ही चलने की स्थिति में। आस-पास के लोगों को पता लगते ही वहां भीड़ इकट्ठी हो गई।
लंदन में रहकर पाकिस्तानी सेना की बखिया उधेड़ने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया ने सोशल मीडिया पर इससे संबंधित एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें लोग खेतों में पड़ी इशरत नसरीन से उनके बारे में पूछते दिखे कि वह कौन हैं, उनकी यह हालत किसने बनाई ? बहुत मुश्लिक से वह जवाब देती हैं कि दिपालपुर की रहने वाली हैं। पेशे से अधिवक्ता हैं। उनका अपहरण कर लिया गया था। बाद में पुलिस की मदद से उन्हें कस्बे के सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया गया।
पाकिस्तान के अखबार ‘ द नेशन’ के 26 अगस्त के अंक में छपी खबर ‘एडवोकेट नसरीन नॉमिनेट एक्स हस्बैंड इन ऐबडक्शन केस’ में दावा किया गया कि उनका अपने पूर्व पति अकमल से संपत्ति विवाद है। उन्होंने ही नजर फरीद, हक नवाज एवं आवा नाम के व्यक्तियों की मदद से उनका अपहरण किया था। उन्होंने इशरत नसरीन को चार दिनों तक अज्ञात स्थान पर रखा। नशे का इंजेक्शन दिया जाता था और प्रताड़ित किया जाता था। मगर ‘द नेशन’ में छपी खबर को लोग सही नहीं मानते। आम समझ है कि खबर एवं महिला वकील का बयान प्लांटेड है। इसकी वजह है इशरत नसरीन का वह भाषण जिसमें वह अधिवक्ता की यूनिफार्म में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी सेना को देश का गद्दार बता रही हैं। एक्टिविस्ट आरिफ अजाकिया ने सोशल मीडिया पर वह वीडियो भी शेयर किया है। महिला अधिवक्ता हजारों के मजमे में आक्रामक ढंग से सेना की पोल खोलती दिखाई दे रही हैं।
इस समय सेना ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर, बलूचिस्तान एवं सिंध में अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने का अभियान चला रखा है। इस नजरिए से आम लोगों की दलील है कि सैनिकों की ज्यादतियों से बचने के लिए इशरत नसरीन ने पुलिस में ऐसे बयान दिए हैं। आरिफ अजाकिया कहते हैं कि सेना में डोमिनेट करने वाले पंजाबियों ने गैर पंजाबी इलाके में भयंकर उत्पात मचा रखा है। वे भ्रष्टाचार, अय्याशियों में आकंठ डूबे हैं। जब कोई उनके विरूद्ध आवाज उठाता है उसे या तो गायब कर दिया जाता है अथवा देश छोड़ने को विवश कर दिया जाता है। जिन्हें गायब किया जाता है, बाद में उनकी लाशें किसी सड़क या खेत में लावारिस पड़ी मिलती हैं।

pakistan_1  H x 
 वो लोग जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने गायब कर दिया है।
वाइस फॉर मिसिंग पर्सन ऑफ ट्वीटर हैंडल से 40 लोगों की तस्वीरें साझा की गई हैं जो केपीके, सिंध और बलूचिस्तान से गायब कर दिए गए। इस मामले में मानवाधिकार संगठनों एवं अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से हस्तक्षेप की मांग की गई है। एक्टिविस्ट शाजिया चांदो ने भी सोशल मीडिया पर दो भाईयों प्रियल व जमीन शाह की तस्वीरें डाली हैं जिसमें वे एक लापता युवक का पोस्टर लिए खड़े हैं। दोनों भाईयों के बारे में शाजिया ने लिखा है-‘‘वो जो पूछते थे पता लापता लोगों का वह खुद भी लापता हो गए।’’ पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने हाल में वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, उसमें मानवाधिकारों के दमन पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में मीडिया कवरेज को दबाने, धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने, गैर मुस्लिमों की नाबालिग बच्चियों के कन्वर्जन, ईशनिंदा कानून का बेजा इस्तेमाल की बढ़ती घटनाओं की आलोचना के साथ अवाम एवं मीडिया की अवाज दबाने को अपनाई जा रही दमनकारी नीतियों खुलासा किया गया है। आयोग के महासचिव हरिस खालिक कहते हैं-‘‘ राजनीतिक विरोधियों को बड़े ही व्यवस्थित ढंग से निपटा जा रहा है।’’
सैन्य अधिकारी की पोल खोलने वाले पत्रकार को बता रहे भारत का एजेंट
अधिवक्ता इशरत नसीन के अलावा इस वक्त जो पत्रकार सेना एवं सरकार के निशाने पर हैं एक न्यूज पोर्टल चलाते हैं। उनका नाम अहमद नूरानी है। उन्होंने हाल में अपनी वेबसाइट पर प्रधानमंत्री इमरान खान के वरिष्ठ सैन्य सलाहाकर एवं सेवानिवृत ले. जनरल असिम सलीम बाजवा के आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे होने का रहस्योद्घाटन किया था। इसके बाद से उन्हें देशद्रोही एवं भारतीय एजेंट साबित की साजिश रची जा रही है। नूरानी की रिपोर्ट कई सीरिज में आई हैं। उन्होंने तथ्य सहित साबित करने की कोशिश की है कि कैसे बाजवा एवं उनके बेटे भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं। नूरानी की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी कमान के कमांडर रहते बाजवा एवं उनके बेटे 99 कंपनियों के मालिक बन गए। वे 130 कंपनियों की फ्रंचाइजी, 13 कॉमर्शियल प्रॉपर्टी तथा दो शॉपिंग सेंटर के मालिक हैं। उन्होंने चीन एवं पाकिस्तान सरकार को चूना लगाकर करीब 2000 करोड़ रूपये की अवैध संपत्ति इकट्ठी कर ली है। मगर नूरानी के इस रहस्योद्घाटन की जांच कर असलियत सामने लाने की बजाए सेना व सरकार उनके पीछे पड़ गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया भी नूरानी की एक्सक्सूलिस स्टोरी को सराहने की बजाए उन्हें ही भारतीय जेंट और देशद्रोही साबित करने पर तुला है। सेना हिमायती माने जाने वाले न्यूज चैनल एआरवाई पर नूरानी ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ चैनल पर रिपोर्ट दिखाने से लोग उन्हें तरह-तरह की धमकियां दे रहे हैं। न्यूज पोर्टल ‘जर्नलिज्म पाकिस्तान’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एआरवाई ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि नूरानी ने दो पत्रकारों मुबशिर जैदी एवं गुल बुखारी की मदद से बाजवा के खिलाफ मनगढ़ंत स्टोरी तैयार की है। चैनल ने उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। इसके बाद से नूरानी को धमकियां मिल रही हैं। इस मुददे पर पत्रकार बिरादरी भी उनका साथ नहीं दे रही। नूरानी ने न्यूज चैनल की रिपोर्ट और धमकियों को लेकर ट्वीट किया है-‘‘एक न्यूज चैनल ने मेरी तस्वीर चलाकर मुझे गद्दार और भारतीय एजेंट कहने की कोशिश की कि कोई मुझे जान से मार दे। इसके बाद मार देने की धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे पाकिस्तान में किसी सहाफी, किसी एक सहाफी तंजीम, यहां तक कि इस्लामाबाद प्रेस क्लब को तौफीक न हुई कि एक सतर की मजम्मत ही कर दे।’’ जाहिर है सोची-समझी रणनीति के तहत ही पत्रकार बिरादरी ने खामोशी अख्तियार कर रखी है। और वह रणनीति है सेना की करतूतों का विरोध का मलतब है खुद ही निपट जाना।