चुनाव की गड़गड़ाहट, दल-बदल के बादल

    दिनांक 08-सितंबर-2020
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संजीव कुमार, पटना

यदि सब कुछ सामान्य रहा तो नवंबर में बिहार विधानसभा के लिए चुनाव हो सकते हैं। लेकिन पिछले कई महीने से बिहार के  नेता ‘दल-बदल खेल’ जम कर खेल रहे हैं। इस खेल को चारा घोटाले की सजा काट रहे लालू यादव भी हवा दे रहे हैं। वे नियमों को ताक पर रखकर रिम्स में रोजाना अपना दरबार लगा रहे हैं

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बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर नेताओं का एक-दूसरे दल में जाना शुरू हो गया है। जदयू से अपना नाता तोड़कर श्याम रजक ने अपने पुराने घर राजद में वापसी कर ली है, वहीं राजद के 7 विधायक जदयू में जा चुके हैं। 1 सितंबर को बखरी के राजद विधायक वीरेन्द्र कुमार जदयू में शामिल हो गए।

राजद और जदयू के बीच दल-बदल का खेल 16 अगस्त से शुरू हुआ है। उस दिन राज्य सरकार के मंत्री श्याम रजक ने पार्टी और मंत्री पद छोड़ने की घोषणा कर राजनीतिक माहौल गरमा दिया था। प्रतिक्रिया में जदयू ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। जदयू अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें मंत्रिमंडल से भी बाहर कर दिया।

16 अगस्त को ही राजद ने अपने 3 विधायकों-महेश्वर प्रसाद यादव, प्रेमा चौधरी और फराज फातमी को पार्टी से निष्कासित कर दिया। दूसरे दिन महेश्वर प्रसाद यादव एवं प्रेमा चौधरी जदयू में शामिल हो गए। सासाराम के राजद विधायक अशोक कुशवाहा भी उसी दिन जदयू में शामिल हुए। 20 अगस्त को फराज फातमी ने जदयू का दामन थामा। फराज फातमी पूर्व सांसद अली अशरफ फातमी के सुपुत्र हैं। उनके साथ राजद को छोड़कर जदयू में शामिल होने वालों में लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय तथा पालीगंज के विधायक जयवर्द्धन यादव भी शामिल थे। जयवर्द्धन यादव रामलखन सिंह यादव के पौत्र एवं पूर्व सांसद प्रकाशचंद्र यादव के पुत्र हैं। रामलखन सिंह यादव कभी बिहार में यादवों के सर्वोच्च नेता होते थे। उन्हें ‘शेर-ए-बिहार’ कहा जाता था। चंद्रिका राय भी राज्य के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं। इनके पिता दारोगा प्रसाद राय बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय की शादी लालू प्रसाद के पुत्र एवं राजद नेता तेज प्रताप यादव के साथ हुई थी। यह शादी काफी दिनों तक मीडिया की सुर्खियों बनी रही। तेज प्रताप ने अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय पर तलाक का मुकदमा दायर कर रखा है। इस कारण अब दोनों परिवारों में बेहतर संबंध नहीं हैं।

बिहार की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार दिनेश इसे समाजवादी खेमे की स्वाभाविक गति मानते हैं। 1967 से लेकर 1970 तक का कालखंड काफी अनिश्चितताओं से भरा हुआ था। उस समय अक्सर ‘आयाराम-गयाराम’ की सरकार बनती थी। जदयू और राजद दोनों समाजवादी खेमे के दल हैं। दोनों गठबंधन में भी कई समीकरण बन रहे हैं। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सतत संपर्क में हैं। मांझी का राजग में शामिल होने का निर्णय सीटों के बंटवारे को लेकर अटका हुआ है। हालांकि जल्दी ही यह निश्चित हो जाएगा कि ‘हम’ राजग का हिस्सा बनेगा या फिर तीसरे मोर्चे में शामिल होगा। महागठबंधन में अपनी लगातार उपेक्षा से मांझी खिन्न थे। 22 अगस्त को उन्होंने अपनी पार्टी की कार्य समिति की बैठक करके अपना रास्ता अलग कर लिया। 27 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनकी बैठक हुई थी। वहीं लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चिराग पासवान भी राजग में नीतीश कुमार की मनमानी को लेकर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं।

इसका लाभ लेने के लिए भाजपा के धुर विरोधी यशवंत सिन्हा राज्य में तीसरे मोर्चे के लिए भागदौड़ कर रहे हैं। उनकी कवायद है कि पप्पू यादव, असद्दुदीन ओवैसी तथा वाम मोर्चा के साथ मिलकर एक तीसरा मोर्चा बनाया जाए। वहीं प्लुरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया चौधरी भी हाथ-पैर मार रही हैं। 1 सितंबर को पटना नगर निगम के पूर्व आयुक्त अनुपम कुमार ‘सुमन’ प्लुरल्स पार्टी में शामिल हुए हुए हैं। गत वर्ष पटना में जल-जमाव को लेकर राज्य सरकार की काफी फजीहत हुई थी। इसको लेकर अनुपम कुमार ‘सुमन’ ने राज्य सरकार व मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाया था। पुष्पम प्रिया चौधरी ने इन्हें प्लुरल्स पार्टी का महासचिव बनाया है। बिहार में आम आदमी पार्टी की कोई विशेष उपस्थिति नहीं है, लेकिन वह भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजधानी रांची में भी गरमाहट देखी जा रही है। यहां रिम्स निदेशक के आवास में  राजद अध्यक्ष और चारा घोटाले के मामले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव अपनी चिकित्सा करा रहे हैं। कहने को तो वे बीमार हैं, इसलिए रिम्स में भर्ती हैं, लेकिन वे प्रतिदिन नेताओं से मिल रहे हैं। वहीं वे चुनावी गणित को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। रिम्स में लालू के दरबार में अभिनेता अली खान भी हाजिरी लगा चुके हैं। वे बिहार के शेरघाटी से चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक हैं।

जदयू और राजद दोनों समाजवादी खेमे के दल हैं। दोनों गठबंधन में भी कई समीकरण बन रहे हैं। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय  अध्यक्ष जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सतत संपर्क में हैं।



अब एक चर्चा यह भी है कि शरद यादव भी घरवापसी कर सकते हैं। यानी वे फिर से जदयू में आ सकते हैं।
राजग में अपने अपमान को लेकर पूर्व सांसद पुतुल सिंह (स्व. दिग्विजय सिंह) एवं उनका परिवार भी काफी मर्माहत है। इनका गुस्सा नीतीश कुमार पर है। दिग्विजय सिंह के समय से ही नीतीश कुमार का इस परिवार से मनमुटाव है। दिग्विजय सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी पुतुल सिंह 2010 के उप चुनाव में बतौर निर्दलीय बांका की सांसद बनी थीं। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गई थीं। 2014 में पुतुल सिंह बांका से बतौर भाजपा प्रत्याशी राजद के जयप्रकाश यादव से चुनाव हार गई थीं। 2019 के चुनाव में यह सीट जदयू के खाते में चली गई जहां से गिरधारी यादव निर्वाचित हुए। पुतुल सिंह ने 2019 का चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ा था, लेकिन वह हार गई थीं। भाजपा ने पुतुल सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था। अब मां के अपमान का बदला उनकी बेटी श्रेयसी सिंह लेंगी। ऐसा माना जा रहा है कि अंतरराष्टÑीय स्तर की निशानेबाज श्रेयसी सिंह राजद के साथ जुड़कर सियासत के अखाड़े में कूदेंगी। कहा जा रहा है कि पुतुल सिंह बांका, अमरपुर, सुल्तानगंज, धोरैया और जमुई से अपने समर्थकों को टिकट दिलाना चाहती हैं।

 आगामी विधानसभा चुनाव में वाम दल भी अपनी गोटी लाल करने के चक्कर में लग गए हैं। चुनाव को लेकर वामपंथी दलों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि वामपंथी दल महागठबंधन के ही सहयोगी होंगे। सीट बंटवारे के बाद वामपंथी दलों के नेताओं का सघन प्रवास शुरू हो सकता है। बंगाल, महाराष्ट्र, असम और केरल समेत कई राज्यों के प्रमुख वामपंथी नेता अपने प्रचार का दम-खम दिखाएंगे। भाकपा, माकपा और भाकपा (माले) द्वारा चुनाव प्रचार की तैयारियों पर सतत रणनीति बनाई जा रही है। माकपा ने तो चुनाव प्रचार की रणनीति के लिए कई नेताओं के नाम भी तय कर लिए हैं। इन नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा जाएगा। कोरोना संकट को देखते हुए चुनाव प्रचार की रणनीति काफी सोच-समझकर बनाई जा रही है।

माकपा के राष्ट्रीय  महासचिव सीताराम येचुरी, पोलित ब्यूरो की सदस्य एवं पूर्व सांसद बृंदा करात, सुभाषिनी अली के अतिरिक्त बंगाल विधानसभा में माकपा विधायक दल के नेता सुजान चक्रवर्ती, पार्टी के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्र, विमान बोस, पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम एवं मोहम्मद हन्नान मोला जैसे कई नेता प्रचार अभियान को धार दे सकते हैं। भाकपा ने भी चुनाव प्रचार की रणनीति पर अपना काम तेज कर दिया है। अतुल कुमार अंजान, डी़ राजा, डॉ. के नारायण, सपन बनर्जी, अमरजीत कौर, कन्हैया कुमार जैसे एक दर्जन से अधिक नेता प्रचार की कमान थामेंगे। भाकपा-माले की ओर से महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के अलावा पोलित ब्यूरो के सदस्य स्वदेश भट्टाचार्य, कविता कृष्णन, रामजी राय, संदीप सौरव समेत कई लोग मुख्य प्रचारक हो सकते हैं।
फिलहाल नेताओं की भागदौड़ ही देखने को मिल रही है, मतदाता अपनी-अपनी समस्याओं से ही जूझ रहे हैं। अब आने वाला समय बताएगा कि बिहार में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।