कोविड-19/वैक्सीन : चुस्त तंत्र, पुख्ता इंतजाम

    दिनांक 01-जनवरी-2021   
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भारत में बड़े पैमाने पर कोरोना वैक्सीन का उत्पादन होगा। सभी को वैक्सीन उपलब्ध हो, इसके लिए केंद्र सरकार 160 करोड़ वैक्सीन का आदेश दे चुकी है। कब, किसे और कैसे वैक्सीन दी जाएगी, इसकी भी योजना तैयार है। परिवहन, आपूर्ति से लेकर टीकाकरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक ऐप भी विकसित किया गया है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वैक्सीन के उत्पादन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट का दौरा किया

कोरोना से जूझ रही दुनिया के लिए भारत उम्मीद बन कर उभरा है। देश में जल्द ही बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो जाएगा। हालांकि भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश के लिए सभी को वैक्सीन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। 

दुनियाभर में बिकने वाली वैक्सीन का 60 प्रतिशत उत्पादन भारत में ही होता है। भारत का दवा क्षेत्र करीब 2.9 लाख करोड़ रुपये का है। बीते दिनों आॅस्ट्रेलिया के राजदूत बैरी ओ फैरेल ने भारत में वैक्सीन निर्माता कंपनियों का दौरा किया था। उन्होंने कहा था कि केवल भारत के पास ही दुनिया की जरूरतें पूरी करने लायक वैक्सीन उत्पादन करने की क्षमता है। दूसरे देशों के राजनयिकों का भी यही मत था। 

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है। इसने अब तक एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की 5 करोड़ खुराक का भंडारण कर लिया है और जुलाई 2021 तक कोवीशील्ड की 40 करोड़ खुराक तैयार करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, यह नई उत्पादन शृंखला भी शुरू कर रहा है ताकि एक साल में वैक्सीन की 100 करोड़ खुराक तैयार कर सके। दवाओं की पैकेजिंग करने वाली कंपनी स्कॉट काइशा भी वैक्सीन वायल का उत्पादन बढ़ा रही है। डेनमार्क की कूरियर कंपनी डीएचएल वैक्सीन को भारत सहित दुनियाभर में पहुंचाने की तैयारियों में जुट गई है। एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला के मुताबिक, भारत में बड़े पैमाने पर सस्ती वैक्सीन तैयार होगी। संस्थान के पुणे परिसर में हर घंटे एस्ट्राजेनेका की हजारों खुराक का उत्पादन हो रहा है। 

भारत शीर्ष पर
देशवासियों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए भारत ने 160 करोड़ खुराक के लिए आॅर्डर दिया है। इतनी बड़ी मात्रा में दुनिया का कोई भी देश वैक्सीन नहीं खरीद रहा है। यही नहीं, भारत ने वैक्सीन की खरीद से लेकर भंडारण और वितरण तक का खाका भी तैयार कर लिया है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के लॉन्च एंड स्केल स्पीडोमीटर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत एवं अमेरिका ने आॅक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका को वैक्सीन की 50 करोड़ खुराक का आॅर्डर दिया है। इसके अलावा, भारत ने नोवावैक्स को 1 करोड़ वैक्सीन का आॅर्डर दिया है। हालांकि भारत ने सनोफी-जीएसके से वैक्सीन खरीद के लिए अभी तक कोई करार नहीं किया है, लेकिन रूसी कंपनी गामलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित स्पुतनिक-5 की 10 करोड़ खुराक का आॅर्डर दिया है। फिलहाल भारत में रूसी वैक्सीन का परीक्षण अंतिम चरण में है। हैदराबाद की डॉ. रेड्डी कंपनी इसका उत्पादन करेगी।

ऐसे काम करेगा को-विन एप

सरकार ने कोविड-19 टीकाकरण की निगरानी के लिए जो एप विकसित किया है, उस पर निम्नलिखित तरीके से पंजीकरण कराया जा सकता है-
  •  एप को मुफ्त डाउनलोड किया जा सकता है। यह वैक्सीन डाटा रिकॉर्ड करने में मदद करेगा।
  •  यदि किसी को वैक्सीन चाहिए तो वह इस पर अपना पंजीकरण करा सकता है।

  • को-विन प्लेटफॉर्म पर 5 मॉड्यूल हैं- एडमिनिस्ट्रेटर, रजिस्ट्रेशन, वैक्सिनेशन, बेनेफिशियरी एक्नॉलेजमेंट और रिपोर्ट।

  • एडमिनिस्ट्रेटर मॉड्यूल टीकाकरण सत्र का संचालन करने वाले प्रशासक के लिए है। इस मॉड्यूल के जरिए वे सत्र तैयार कर सकते हैं। इसी आधार पर वैक्सीन लगाने वालों और प्रबंधकों की तैनाती की जाएगी।
  • रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल उन लोगों के लिए होगा जो टीकाकरण के लिए अपना पंजीकरण कराना चाहते हैं। इसमें सर्वेक्षक या स्थानीय प्रशासन भी डाटा अपलोड कर सकता है।

  • वैक्सीनेशन मॉड्यूल में लाभार्थी का ब्योरा और टीकाकरण से जुड़ी सूचनाएं अद्यतन की जाएंगी।
  • बेनेफिशियरी एक्नॉलेजमेंट मॉड्यूल लाभार्थी को एसएमएस भेजेगा और टीकाकरण के बाद क्यूआर (मैट्रिक्स बारकोड) आधारित प्रमाणपत्र भी जारी करेगा।

  • रिपोर्ट मॉड्यूल के तहत रिपोर्ट तैयार की जाएगी कि टीकाकरण के लिए कितने सत्रों का आयोजन किया गया। कितने लोगों का टीकाकरण हुआ और कितने लोगों ने टीका नहीं लगवाया या चूक गए।


एकाधिकार की कोशिश
अमीर देश कोरोना की दवा या वैक्सीन पर अपना एकाधिकार नहीं छोड़ना चाहते। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि दुनियाभर में कितने लोगों को कोरोना वायरस लील रहा है। उन्हें तो अपने मुनाफे से मतलब है। न्यूज एजेंसी राइटर्स के मुताबिक एक गुप्त बैठक में अमीर देशों, खासकर यूरोपीय संघ और अमेरिका ने बौद्धिक संपदा अधिकार छोड़ने के प्रस्ताव का विरोध किया। अगर इनका यही रवैया रहा तो यह मुद्दा विश्व व्यापार संगठन की जनरल काउंसिल में उठ सकता है। यदि वहां इस पर आम सहमति नहीं बनी तो फिर इसका निबटारा मतदान से होगा, जिसकी बहुत कम संभावना है। एकाधिकारों में ढील के पैरोकारों का कहना है कि अगर अमीर देश नहीं माने तो यह कोरोना से जंग की राह में बड़ा रोड़ा साबित हो सकता है। इनकी दलील है कि जैसे एड्स के मामले में अधिकार छोड़े गए, वैसे ही कोरोना के मामले में भी छोड़ने चाहिए। इनका आरोप है कि अमीर देश लोगों की जिंदगी से ज्यादा अपने मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं।

अधिकारों में छूट का प्रस्ताव सबसे पहले भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने किया था। पांच कोरोना वैक्सीन पर शोध का दावा करने वाले चीन ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया है। दरअसल, जिन देशों में सबसे पहले वैक्सीन बनने की उम्मीद है, उनमें अधिकतर अमीर देश हैं। सही मायने में दुनिया एक वैश्विक गांव की तरह है। अगर अमेरिकी शेयर बाजार गिरेगा तो उसका असर पूरब के देशों के सूचकांक पर दिखेगा। चीन में कोई वायरस हमला करेगा तो सबसे अधिक लोग अमेरिका में मारे जाएंगे। लेकिन दुनिया के बड़े नेता इस बात को समझ नहीं पाते। मसलन, चीन ने अपनी छवि बचाने के लिए कोरोना के बारे में दुनिया को देरी से जानकारी दी, जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि कूटनीति से लेकर आर्थिक मोर्चे तक चीन का भी कम नुकसान नहीं हुआ है। वहीं, अमेरिका ने महामारी के दौर में महाशक्ति की भूमिका निभाने की बजाए अपनी ऊर्जा चीन को गलत ठहराने में लगाई। उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन वित्तीय सहायता बंद कर दी। आज अमेरिका दुनिया का सबसे संक्रमित देश है। इसी तरह, दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों ने कोरोना मुद्दे पर दूरदर्शिता दिखाने की जगह सियासी मुनाफे पर नजरें गड़ाए रखीं। जब उन्हें कोरोना महामारी के विरुद्ध लड़ाई में संसाधन जुटाने चाहिए थे, उस समय उन्होंने जुमलों से काम चलाया। इसका खामियाजा उनका देश भुगत रहा है।

भारत में टीकाकरण
केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से देशवासियों को बचाने के लिए टीकाकरण की पूरी योजना तैयार कर ली है। साथ ही, टीकाकरण योजना की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए को-विन नामक एक ऐप भी विकसित किया गया है। सरकार का कहना है कि हर उस भारतीय को वैक्सीन लगाई जाएगी, जिसे लगाना जरूरी है।

28_1  H x W: 0 केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा है कि सरकार ने अगस्त में कोविड-19 के लिए वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन पर नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप (ठएॠश्अउ) बनाया था। नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ने कोविड-19 के टीकाकरण, वैक्सीन के चुनाव, इसकी खरीद और आपूर्ति की निगरानी रूपरेखा भी तैयार कर ली है। फिलहाल इसमें स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एक करोड़ कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, अग्रिम पंक्ति के दो करोड़ कर्मचारी जिसमें केंद्र और राज्यों की पुलिस, सैन्य बल, होमगार्ड्स, नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन वॉलंटियर्स तथा नगरपालिका कर्मचारी  शामिल हैं, इस तरह, सरकार ने पहले 27 करोड़ लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसमें 50 साल या इससे अधिक उम्र वाले लोगों का सबसे पहले टीकाकरण कराया जाएगा। साथ ही, 50 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोग जो स्वास्थ्य कारणों से गंभीर खतरे की श्रेणी में आते हैं यानी जिन्हें मधुमेह, रक्तचाप या अन्य बीमारियां हैं, उन्हें भी पहले वैक्सीन उपलब्ध करायी जाएगी।

निगरानी के लिए तंत्र

इतना ही नहीं, राज्य स्तर पर प्रत्येक राज्य में स्टेट स्टीयरिंग कमेटी (एसएससी) गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। यह समिति केंद्र के साथ समन्वय करेगी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में स्टेट टास्क फोर्स (एसटीएफ) बनाई जाएगी, जो वैक्सीन के परिवहन, आपूर्ति और मानवसंसाधन जैसे पहलुओं पर निर्णय लेगी, जबकि राज्य नियंत्रण कक्ष (एसटीआर) टीकाकरण शुरू होने पर सक्रिय होंगे।

वैक्सीन को लेकर संदेह

कोरोना वैक्सीन को लेकर कई तरह के संदेह जताए जा रहे हैं। दुष्प्रचार अभियान, अफवाह और एंटी-वैक्सीन लॉबी की चुनौतियां भी अपनी जगह होंगी। ऐसे में सरकार ने संचार रणनीति बनाई है। इसके तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा कि टीकाकरण क्यों अनिवार्य है? साथ ही, इसके जरिए सरकार वैक्सीन से जुड़ी हर तरह की जानकारी लोगों तक पहुंचाएगी। अमूमन सभी तरह की वैक्सीन का इनसान के शरीर पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सरकार कोरोना वैक्सीन से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में भी लोगों को बताएगी ताकि वे घबराएं नहीं। इसी तरह, जो स्वास्थ्य कर्मी वैक्सीन लगाएंगे उन्हें प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की जाएगी।

मोबाइल तकनीक का प्रयोग
केंद्र सरकार ने वैक्सीन की निगरानी के लिए जो को-विन ऐप बनाया है, उसके लिए सभी राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों के डाटा को ऐप पर अपलोड किया जाएगा, फिर उसकी जांच की जाएगी। इस ऐप पर वैक्सीन लगाने वालों का डाटा भी होगा। इसके साथ वैक्सीन की उपलब्धता, आपूर्ति और निगरानी के साथ जिन लोगों को वैक्सीन मिल गई है, उसका डाटा भी इस ऐप पर होगा।

सरकार की तैयारी

सरकार का दावा है कि मौजूदा कोल्ड-चेन की मदद से वह शुरुआती 3 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के जरिए वैक्सीन उपलब्ध कराने में सक्षम है। यह नियमित प्रतिरक्षीकरण कार्यक्रम के साथ-साथ चलता रहेगा। मौजूदा कोल्ड चेन प्रणाली के तहत देशभर में 28,947 स्थानों पर 85,634 से ज्यादा उपकरण मौजूद हैं। इनमें डीप फ्रीजर्स, वॉक-इन कूलर्स, वॉक-इन रेफ्रिजरेटर्स, बिना बिजली के चलने वाले आइस बॉक्स जैसे पैसिव डिवाइस हैं।

  इनका इस्तेमाल स्वास्थ्य मंत्रालय को यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोसेस (यूआईपी) में किया जाता है। इस समय भारत में 13 तरह की वैक्सीन लगाई जाती हैं। इनमें 11 वैक्सीन राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जबकि दो वैक्सीन कुछ राज्यों के चुनिंदा जिलों में ही लगाई जाती हैं।
    (लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में निदेशक हैं)