क्या माफिया मुख्तार अंसारी को पंजाब जेल संरक्षण मिल रहा है ?

    दिनांक 11-जनवरी-2021
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कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी, अलका राय के सवाल पर चुप हैं. माफिया मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश की जेल में लाया जाना है ताकि न्यायिक प्रक्रिया समय से पूरी हो सके मगर मुख्तार पंजाब की जेल से यूपी नहीं आना चाहता है. लगातार पंजाब सरकार उसकी बीमारी का हवाला देकर उसे पंजाब जेल में ही निरुद्ध किए हुए है

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अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद न्यायालय से मुख्तार के विरुद्ध वारंट जारी किया गया था मगर पंजाब की सरकार का कहना है कि वह अपना जवाब उच्चतम न्यायालय में दाखिल करेगी.
कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर पूर्व विधायक कृष्णा नंद राय की पत्नी अलका राय का कहना है कि “ यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्तार अंसारी को पंजाब जेल से यूपी लाने के लिए याचिका दायर की थी. नोटिस लेकर गाजीपुर पुलिस गई थी, लेकिन वहां के अधिकारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया. मैं, प्रियंका गांधी से निवेदन कर रही हूं कि ऐसे अपराधी को बचाने की कोशिश न करें. उसे वहां से भेजा जाए, ताकि न्यायालय में लंबित मुकदमे में न्याय मिल सके. प्रियंका गांधी भी महिला हैं और मैं भी महिला हूं, मुझे विश्वास है कि वह मेरी भावनाओं को समझेंगीं.”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “ उत्तर प्रदेश में भय,आतंक फैलाने वालों की कोई जगह नहीं है, ये वहीं प्रदेश है जहां 2017 से पहले गुंडों, मफियाओं और अपराधियों का आतंक रहता था,लेकिन आज वहीं अपराधी, माफिया गले मे तख्ती लटका कर माफी मांग रहे हैं. उन पर हो रही कार्रवाइयों को लेकर उनके रहनुमाओं को अब परेशानी हो रही है. उनको छटपटाहट हो रही है. उनके गुर्गों पर शासन का बुलडोजर चल रहा है.”
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ए.के. जैन का कहना है कि “यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि जब कोर्ट की ओर से मुख्तार अंसारी को न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए आदेश भेजा जा रहा है, तो उसकी अवहेलना किस आधार पर पंजाब की जेल के अधिकारी कर रहे हैं. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को आधार बनाकर किन कारणों से नहीं भेज रहे हैं. इससे स्पष्ट है कि इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संरक्षण पंजाब में है जिस कारण उसे बचाया जा रहा है. यूपी में सीएम योगी के निर्देश पर यूपी पुलिस की ओर से जो अभियान माफिया के खिलाफ चलाया जा रहा है, उससे डरकर वह वहां से नहीं आना चाहता है. यह बड़ा खुशी का विषय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है. वह ऐसे जेल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए, जो सक्षम न्यायालय के आदेशों की स्पष्ट रूप से अवहेलना कर रहे हैं