सबके सुख की कामना का शुभचिंतन हो हमारा ध्येय

    दिनांक 14-जनवरी-2021
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पोंगल आनंद का दिन है। संकल्प का भी दिन है। सूर्य जैसे तपश्चर्या करता है, वैसे सबके साथ स्नेह मधुर संबंध रखना, सबकी गलतियों को क्षमा करना। और अपने लोगों को साथ रखना, अपने लोगों को शुभचिंतन करके सारा कर्म करना, यह तपस्या सालभर करनी।

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गत 14 जनवरी को चेन्नै में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने पोंगल के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पोंगल पर मैं आपका शुभचिंतन करता हूं। यह पर्व पूरे भारत में संपन्न होता है। मेरे लिए आनंद की बात है कि आज, इससे पहले भी एक बार तिरुपुर में पोंगल के दिन मैं उपस्थित था। इस उत्सव का पूर्ण स्वरूप तमिलनाडु में हमें देखने को मिलता है। पहली बात है, नई फसल, नवान्न घर में आती है। समृद्धि का प्रतीक है तो लक्ष्मी की पूजा होती है। सूर्य की पूजा होती है, क्योंकि सूर्य ऊर्जा बढ़ाता है। दिन बड़ा होने लगता है। सूर्य की तपस्या है। ऐसा कहते हैं सूर्य का एक रथ है, लेकिन रथ का एक ही पहिया है। घोड़े सात हैं, लगाम सातों की हैं। और रास्ता है नहीं, फिर भी रोज सूर्य इधर से उधर जाता हुआ दिखता है। ऐसी तपस्या करके पूरे विश्व को प्रकाश देने वाला सूर्य है। स्वाभविक रूप से हम उसकी पूजा करते हैं। पूजा करना यानी जिसकी पूजा करते हैं, उसके जैसा होने का प्रयास करना। लक्ष्मी की पूजा करते हैं, लक्ष्मी शक्ति रूपा है तो शक्तिवान बनना है। तपवान बनना है। सूर्य का तप है। सूर्य के पास प्रकाश है, ज्ञान है। कर्म करने का उत्साह है। और कोई गो पूजा करते हैं। अपने लिए काम करने वाले पशु, उनके प्रति भी हम कृतज्ञ हैं। हमारे लिए काम कौन करता है, सभी काम करते हैं। तो गो एक प्रतीक है पूरे पर्यावरण का। पूरे पर्यावरण के लिए हम कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, यह साल भर करना है, आज प्रतीक रूप में किया है।
 
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उन्होंने कहा कि पोंगल आनंद का दिन है। पोंगल संकल्प का भी दिन है। सूर्य जैसे तपश्चर्या करता है, वैसे सबके साथ स्नेह मधुर संबंध रखना, सबकी गलतियों को क्षमा करना। और अपने लोगों को साथ रखना, अपने लोगों को शुभचिंतन करके सारा कर्म करना, यह तपस्या सालभर करनी। ऐसा पूरा अर्थ पोंगल का तमिलनाडु में आने पर अनुभव होता है, तीन दिन। बाकी जगह एक ही दिन में थोड़ा-थोड़ा करते हैं। अर्थ तो यही है सर्वत्र। परंतु उसके प्रत्यक्ष आचरण के लिए कुछ प्रतीक रूप कार्यक्रम तीनों दिन यहां पर होता हुआ मैंने देखा। बहुत संतोष हुआ, बहुत उत्साह मिला, बहुत प्रेरणा मिली।
इससे पूर्व श्री भागवत ने मकर संक्रांति के अवसर पर चैन्नै महानगर के पेरंबूर भाग, कुमरन नगर, पोनियम्मन मेडु बस्ती के नवशक्ति काडमबाड़ी अमन मंदिर में गो पूजन किया तथा मंदिर में पूजन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।

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