कुछ खास ही होंगे इंटरनेट से जुड़े शहर

    दिनांक 15-जनवरी-2021
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बालेन्दु शर्मा दाधीच


इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट शहर चुस्त-दुरुस्त और व्यवस्थित रखे जा सकेंगे।उनमें स्पष्ट सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक कार्यकुशलता सुनिश्चित की जा सकेगी। ‘सिस्को’ का अनुमान है कि इन सब व्यवस्थाओं के चलते इन शहरों में अगले बीस वर्ष के दौरान ऊर्जा की खपत में 30 प्रतिशत तक की कमी की जा सकेगी
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स्मार्ट शहर की एक परिकल्पना
स्मार्ट शहर ऐसे ‘कनेक्टिड शहर’ हैं जिनके भीतर की आधारभूत संरचना के विभिन्न अवयव स्वतंत्र रूप से काम नहीं करते बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए एक-दूसरे के साथ जुडेÞ हैं। जैसे, किसी शहर में संचालित परिवहन व्यवस्था के प्रबंधकों, यातायात पुलिस, आपातकालीन सुविधाओं के संचालकों और आम नागरिकों के लिए यह जानकारी पाना बहुत आसान हो जाएगा कि इस समय शहर में कहां दुर्घटना हुई है, कहां बारिश के कारण सड़कों पर भारी यातायात है और कहां रास्ता एकदम साफ है। शायद किसी के मन में यह सवाल उठे कि आज भी तो हम ‘ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम’ (जीपीएस) के जरिए इस तरह की सूचनाओं का पता लगा सकते हैं। जी हां, किंतु जीपीएस सुविधा उपग्रह से हो रही निगरानी पर आधारित है जो मौसम की खराबी जैसी स्थितियों में उतनी कारगर नहीं रहती। लेकिन एक स्मार्ट सिटी की सड़कों के अपने स्थानीय नेटवर्क से मिलने वाली सूचनाएं ज्यादातर स्थितियों में सटीक और विश्वसनीय होंगी। बहरहाल, यहां पर इस तथ्य पर भी गौर किया जाना चाहिए कि स्मार्ट शहरों की अवधारणा में स्वयं जीपीएस की भी भूमिका है।

बुनियादी रूप में स्मार्ट शहरों के ये चार पहलू हैं-
  1.  शहरों और उनमें रहने वाले समुदायों के बीच व्यापक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल प्रौद्योगिकियों का प्रयोग। 2. संबंधित क्षेत्र के भीतर दैनिक जीवन और कामकाज के वातावरण को सकारात्मक रूप से रूपांतरित करने में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का प्रयोग। 3. इसी तरह की सूचना और संचार तकनीकों को सरकारी प्रणालियों में समाहित किया जाना। 4. इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकी से लोगों को जोड़ना तथा इस संपर्क में निहित नवाचार और ज्ञान का अधिकतम लाभ उठाना।

  2. कुछ लोग आलोचना करते हैं कि इन शहरों में तो तकनीक का ही बोलबाला है, इनसानों की भूमिका दोयम दर्जे की है। कुछ विचारकों का कहना है कि इस तरह के शहर इतने अधिक सुविधा-सम्पन्न और स्वचालित हो जाएंगे कि इनसानों को अपने मस्तिष्क और श्रम के प्रयोग की न्यूनतम जरूरत पड़ेगी। अनेक आलोचक इन्हें शहरीकरण की समस्या के समाधान की बजाए शहरीकरण को और बढ़ावा देने वाली परिकल्पना मानते हैं। दूसरी ओर स्मार्ट शहरों के हिमायती लोगों का मानना है कि ये शहर अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन स्तर, चौतरफा कार्यकुशलता और धन का श्रेष्ठतम इस्तेमाल सुनिश्चित करेंगे। सामान्य शहरों की तुलना में स्मार्ट शहरों की संरचना, प्रशासन, जीवनशैली कई मायनों में भिन्न होगी।

    स्मार्ट शहरों में दिखेंगे ये बदलाव
  3. आधारभूत संरचना: इन शहरों की सड़कें भी स्मार्ट होंगी और उनके किनारे लगी बत्तियां भी। जिन सड़कों पर यातायात नहीं है, वहां बत्तियां खुद-ब-खुद कम जलेंगी और बिजली बचाएंगी। सड़कों के खराब होने पर तुरंत मरम्मत होगी, बारिश आदि के समय जल-जमाव से बचाव की व्यवस्था डिजिटल माध्यमों से स्वत: संचालित हो रही होगी।

  4. भवन: निजी, सरकारी और तमाम तरह के दूसरे भवनों में एअर कंडीशनिंग, बिजली की खपत, रोशनी, स्वच्छ हवा के आने-जाने की व्यवस्था, सुरक्षा आदि में तकनीक का दखल होगा और वह इन सबका जिम्मा संभाले होगी। बिजली हरित स्रोतों से आ रही होगी, जैसे सौर ऊर्जा, क्योंकि भवनों के डिजाइन बनाते समय ही सोलर पैनल की जरूरत को ध्यान में रखा गया होगा। आग लगने का पता लगाने और आग बुझाने की स्वचालित व्यवस्था हर कमरे में मौजूद होगी।

  5. सेवाएं: बिजली-पानी की आपूर्ति, परिवहन, चिकित्सा सेवाओं, सीवर आदि की समस्याएं नहीं होंगी, क्योंकि हर सेवा कुशलता के साथ नियोजित की गई होगी, इन सेवाओं के विकल्प पहले से तैयार होंगे और संसाधनों की बर्बादी रोकने की पुख्ता व्यवस्था होगी। न पानी बर्बाद होगा, न बिजली क्योंकि सब कुछ निगरानी और नियंत्रण के दायरे में होगा।

  6. परिवहन: दुर्घटनाओं, यातायात की सघनता, ट्रैफिक जाम, झगड़ों, ट्रैफिक के उल्लंघन आदि की सूचनाएं एक केंद्रीय प्रणाली के तहत हमेशा उपलब्ध होंगी। किन सड़कों पर कौन सी लेन में किस तरह का यातायात चलेगा, इसकी पुख्ता निगरानी होगी। लोग सुरक्षित होंगे क्योंकि एक केंद्रीकृत सूचना प्रणाली से पूरे शहर में यातायात संबंधी सूचनाएं और दिशानिर्देश मिल रहे होंगे।

  7. पर्यावरण: वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ऊर्जा का नियंत्रण, अपशिष्ट पदार्थों का प्रबंधन आदि की बेहतरीन व्यवस्था इन शहरों में होगी। घरों की छतों पर उद्यान लगे होंगे या फिर सौर ऊर्जा प्रणालियां लगी होंगी। सड़कों के किनारे, पार्कों तथा घरों के आसपास तथा छतों पर मौजूद पौधों या पेड़ों के प्रबंधन की उत्तम व्यवस्था होगी ताकि शहर में कार्बन डाईआॅक्साइड का स्तर नियंत्रित रहे और आक्सीजन का स्तर अच्छा बना रहे। सड़कों के किनारे शोर को रोकने के लिए शोर-रोधी पैनल लगे होंगे।

  8. जनजीवन: पूरे शहर में हर स्थान पर वाई-फाई नेटवर्क उपलब्ध होगा जहां नागरिक सेवाओं से संबंधित सूचनाएं, जरूरी खबरें, मनोरंजन संबंधी सूचनाएं, पार्किंग, ट्रैफिक की स्थिति का ब्योरा, नए रोजगारों के उपलब्ध होने की सूचनाएं, अस्पतालों में खून वगैरह की जरूरत संबंधी सूचनाएं आदि निरंतर आएंगी।

  9. सुरक्षा व्यवस्था: शहर में हर समय चारों तरफ कैमरों के माध्यम से निगरानी रहेगी और अपराध के होने से पहले तथा बाद में उनकी सूचना पुलिस प्रणालियों के पास पहुंच जाएगी। पुलिस के समय-रहते सतर्क हो जाने के कारण अपराध की रोकथाम हो सकेगी और यदि अपराध हो चुका है तो उनकी जांच काफी आसान हो जाएगी, क्योंकि विभिन्न स्थानों पर लगे कैमरे इन गतिविधियों को कैद कर रहे होंगे। इतना ही नहीं, अपराधी के भागने के मार्ग से लेकर उनकी पहचान तक का पता लगाना आसान होगा।

  10. आपदा नियंत्रण: इस तरह के व्यवस्थित तथा सूचना की सहजता पर आधारित स्मार्ट शहर में प्राकृतिक और मानवीय आपदाओं तथा दुर्घटनाओं का नियंत्रण अपेक्षाकृत अधिक सुगमता के साथ किया जा सकेगा। न सिर्फ आपदाओं की जानकारी तुरंत मिल सकेगी बल्कि राहत और बचाव के कार्यों में भी कार्यकुशलता लाई जा सकेगी। जगह-जगह सेंसरों की मौजूदगी और उनसे मिलने वाले डेटा के विश्लेषण की व्यवस्था के कारण अनेक आपदाओं को घटित होने से पहले ही रोका जा सकेगा। मिसाल के तौर पर किसी स्थान पर जमीन का धंसना, किसी इमारत में दरार का पड़ जाना या फिर किसी स्थान पर बिजली के नंगे तार का गिर पड़ना।

  11. प्रशासन: चूंकि हर प्रकार का डेटा सुगमता से उपलब्ध होगा इसलिए सरकारों और प्रशासन को योजनाएं बनाने में आसानी होगी। सर्वत्र इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी सुगम हो जाएगी।

  12. बाजार: बाजार की वितरण व्यवस्थाएं अधिक सुचारु रूप से चल सकेंगी। सड़कों पर दबाव घटने, बिजली आदि की पर्याप्त आपूर्ति होने, इंटरनेट की सर्वत्र उपलब्धता, ट्रैफिक की बेहतर स्थिति आदि के कारण आॅनलाइन और आॅफलाइन दोनों ही प्रकार के व्यवसायों के लिए स्थितियां अधिक अनुकूल होंगी। ग्राहकों तक बाजारों की सूचनाएं अधिक सुगमता से पहुंचेंगी और बाजारों तक ग्राहकों के डेटा की पहुंच आसान होगी।

इन सब व्यवस्थाओं के कारण स्मार्ट शहरों को चुस्त-दुरुस्त और व्यवस्थित रखा जा सकेगा और उनमें स्पष्ट सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक कार्यकुशलता सुनिश्चित की जा सकेगी। नेटवर्किंग के क्षेत्र की प्रसिद्ध कंपनी सिस्को का अनुमान है कि इन सब व्यवस्थाओं के चलते इन शहरों में अगले बीस वर्ष के दौरान ऊर्जा की खपत में 30 प्रतिशत तक की कमी की जा सकेगी। स्मार्ट सिटी एक भविष्योन्मुखी, आधुनिक अवधारणा है और उपरोक्त परिदृश्य उसकी एक हल्की सी झलक मात्र देता है।     (लेखक सुप्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ हैं)