रुपहले परदे पर 'प्रताप'

    दिनांक 19-जनवरी-2021
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विष्णु शर्मा
अगर आप आज के किसी युवा से अकबर के बारे में पूछेंगे तो वह फौरन आपको 'मुगल-ए-आजम' से लेकर 'जोधा- अकबर' तक फिल्में और कई सीरियल बता देगा। लेकिन जब महाराणा प्रताप के बारे में पूछेंगे तो सोनी टीवी के एक सीरियल के अलावा शायद ही वह कुछ बता पाए। ऐसे में इस लेख के जरिए हमने यह कोशिश की है कि आप जान सकें कि महाराणा प्रताप की वीरगाथा बड़े परदे और छोटे परदे पर अब तक कितनी कही गई है, उसकी जानकारी आपको पहुंचाई जाए। महाराणा प्रताप पर सबसे पहली फिल्म वाराणसी में पैदा हुए फिल्मकार भगवती प्रसाद मिश्र ने बनाई थी। 1925 में उन्होंने फिल्म 'राणा प्रताप' बनाई। फिल्म के निर्माण में पटेल ब्रदर्स और रॉयल आर्ट स्टुडियो का सहयोग लिया गया। इस फिल्म के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती, लेकिन इतना तय है कि यह मूक (साइलेंट) फिल्म थी। आईएमडीबी (फिल्मों की मशहूर वेबसाइट) और बॉलीवुड इतिहास सहेजने वाली कई किताबों, मसलन 'एनसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन सिनेमा' (लेखक : आशीष राज्याध्यक्ष और पॉल विलरमेन) में इसका जिक्र मिलता है। डायरेक्टरी ऑफ इंडियन फिल्म मेकर्स ऐंड फिल्म्स (लेखक—संजीत नार्वेकर) में भी पृष्ठ 188 पर भगवती प्रसाद मिश्र और उनकी फिल्मों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
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महाराणा प्रताप पर दूसरी फिल्म 1946 में जयंत देसाई ने बनाई थी। इस फिल्म में ईश्वर लाल, मुबारक, खुर्शीद, सीता देवी, रेवाशंकर, नूरजहां, भगवान दास जैसे कलाकारों ने काम किया था। फिल्म के गीत लिखे थे स्वामी रामानंद ने और संगीत राम गांगुली ने दिया था। फिल्म इतिहास से जुड़ी सभी किताबों में इस फिल्म का जिक्र है, लेकिन इस बात का नहीं कि इस फिल्म में महाराणा प्रताप की मुख्य भूमिका किसने निभाई थी। हालांकि अशोक राज की किताब 'हीरो' के खंड-1 में इस बात का इशारा मिलता है कि ईश्वर लाल महाराणा की भूमिका में रहे होंगे, क्योंकि जयंत देसाई उन्हें आगे बढ़ाने वाले थे।
1961 में 'जय चित्तौड़' फिल्म आई थी। इसके निदेशक थे जसवंत झावेरी। फिल्म में हीरो यानी महाराणा प्रताप की भूमिका में थे पी. जयराज। इसमें निरूपा ऱॉय भी थीं। फिल्म के गीत लिखे थे भरत व्यास ने और संगीत दिया था एस.एन. त्रिपाठी ने। इसके गाने आप आसानी से यूट्यूब पर ढूंढ सकते हैं। लता मंगेशकर की आवाज वाला मशहूर गीत 'ऐ पवनवेग से उड़ने वाले घोड़े..' हल्दी घाटी युद्ध से ठीक पहले के दृश्य में है, जिसमें निरूपा ऱॉय पहले चेतक को तिलक लगाती हैं और फिर महाराणा राणा प्रताप यानी पी. जयराज को। इसी तरह फिल्म में आशा भोंसले की आवाज में महाराणा की शान में भी एक गीत है जिसके बोल हैं, 'हो जियो जियो महाराज, धन्य धन्य मेवाड़पति'। एक गीत मन्ना डे की आवाज में भी है, जिसके बोल हैं—'चिंगारी आज बनी ज्वाला, ज्वाला अम्बर तक'। ये सभी गीत आप यूट्यूब पर देख सुन सकते हैं।
राणा प्रताप का किरदार तो थोड़ी-बहुत देर के लिए अकबर से जुड़ी कुछ फिल्मों में हो सकता है। यह अलग बात है कि हिृतिक रोशन और ऐश्वर्या राय की फिल्म 'जोधा अकबर' में महाराणा का किरदार नहीं था। लोग कह सकते हैं कि अकबर का महाराणा से टकराव बाद के दिनों में हुआ था। ऐसे में दिलीप कुमार और मधुबाला की 'मुगल—ए—आजम' में उन्हें उनका रोल होना चाहिए था, लेकिन उस फिल्म में भी निदेशक ने महाराणा प्रताप का किरदार लेने का जोखिम मोल नहीं लिया। जोखिम यह था कि अगर आप अकबर को महानायक के तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं, तो महाराणा को कमतर दिखाना पड़ेगा, जिसे देश की जनता बर्दाश्त नहीं करती। ऐसे में उनके किरदार को ना छूना ही बेहतर था। लेकिन बाद के फिल्मकारों ने तो महाराणा प्रताप के किरदार को महानायक बनाने में भी जोखिम समझा, और उनको लेकर कोई भी फिल्म नहीं बनाई गई। 1961 की 'जय चित्तौड़' के 51 साल बाद यानी 2012 में एक फिल्म की जानकारी मिलती है, इसका नाम है 'महाराणा प्रताप, द फर्स्ट फ्रीडम फाइटर'। लेकिन फिल्मी दुनिया के किसी बड़े फिल्मकार ने इसे नहीं बनाया, बल्कि महाराणा के चाहने वालों ने बनाया। डॉ. प्रदीप कुमावत ने ही कहानी लिखी, निदेशक भी वही थे, कुलदीप चतुर्वेदी मुख्य भूमिका में थे। फिल्म का संगीत एलबम टी-सीरीज से आया, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने रिलीज किया। फिल्म के लिए रूप कुमार राठौड़, साधना सरगम, भूपिंदर सिंह आदि ने गीत गाए, जगजीत सिंह का एक गीत 'याद आएगा' भी इस फिल्म में है। लेकिन कोई बड़ा चेहरा न होने के चलते यह फिल्म राजपूताना के कुछ इलाकों में ही प्रदर्शित हो सकी।
ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्यों महाराणा प्रताप जैसे किरदार पर हर कोई फिल्म बनाने से डरता है, जबकि उनकी जिंदगी में सौतेली मां, सौतेले भाई, पत्नियां, बेटे, चेतक, जीवन का संघर्ष, घास की रोटी, मेवाड़ की आन-बान-शान, उनके कवच, भाले और गोरिल्ला पद्धति की रोमांचक युद्ध कला और उदयपुर जैसा खूबसूरत शहर और खतरनाक ढंग के दर्रे और किले भी हैं, जो एक बॉलीवुड फिल्म के लिए अच्छा मसाला साबित होंगे। उससे भी ज्यादा है एक ऐसा नायक, जो तब भी नहीं झुका, जबकि पूरा देश झुक गया। यहां अच्छे संवाद की संभावना बनती है। चेतक की मौत के बाद गद्दार भाई का उन्हें अपना घोड़ा देना भावना के पारावार पर ले जा सकता है। लेकिन बॉलीवुड के निर्देशकों को यह डर है कि अगर महाराणा प्रताप हीरो होंगे, महानायक होंगे तो खलनायक कौन होगा? वह होगा, जिसे देश के नेताओं ने सबसे बड़ा 'नायक' बना दिया है। लेकिन 'रक्तरंजित' जैसे एबीपी न्यूज के शो, और 'पद्मावत' जैसी फिल्म के बाद उन्हें समझना होगा कि अब यह जोखिम नहीं रह गया है, जनता सच जानने के लिए पर्याप्त वयस्क हो चुकी है।
टीवी पर शायद महाराणा प्रताप का किरदार सबसे पहले पुनीत इस्सर ने निभाया होगा। जब श्याम बेनेगल ने 1988 में 'भारत एक खोज' धारावाहिक का निर्देशन किया था, तो 53 कडि़यों की योजना बनाई गई थी। जिसकी 32वीं कड़ी में राणा प्रताप का किरदार रखा गया था। अकबर शृंखला का यह पहला एपिसोड था। अकबर का किरदार कुलभूषण खरबंदा ने निभाया था तो महाराणा प्रताप का किरदार पुनीत इस्सर को दिया गया था। आप यूट्यूब पर आसानी से इस एपिसोड को ढूंढ सकते हैं। वैसे महाराणा प्रताप को लेकर जो टीवी सीरियल बने उनमें प्रमुख हैं 'जोधा अकबर' सीरियल, जिसे एकता कपूर की बालाजी फिल्म्स ने बनाया। यह जीटीवी पर 18 जून, 2013 से प्रसारित होना शुरू हुआ। 2015 तक इसके 500 से भी अधिक एपिसोड प्रसारित होते रहे। इस सीरियल में महाराणा प्रताप का किरदार अनुराग शर्मा नाम के टीवी कलाकार ने अदा किया था।
27 मई, 2013 से सोनी टीवी पर मशहूर टीवी प्रोडक्शन हाउस कोंटिलो को अभिमन्यु राज सिंह ने महाराणा प्रताप की जिंदगी पर 'भारत का वीर पुत्र, महाराणा प्रताप' नाम से एक सीरियल शुरू किया। पहले एपिसोड में महाराणा प्रताप के किरदार के बारे में बताने के लिए बतौर सूत्रधार अमिताभ बच्चन की आवाज का इस्तेमाल किया गया। 10 दिसंबर, 2015 तक यह सीरियल चलता रहा, करीब 539 एपिसोड दिखाए गए। हाल ही में 'आरंभ' नाम से एक सीरियल स्टार प्लस पर शुरू हुआ था, जिसमें तनूजा, रजनीश दुग्गल, तेज सप्रू, शाहबाज खान जैसे बॉलीवुड कलाकार भी काम कर रहे थे, लेकिन इसे 24 एपिसोड्स के बाद बंद करना पड़ा, क्योंकि लोगों को यह पसंद नहीं आया, टीआरपी नहीं आई। ऐसे में 'भारत का वीर पुत्र, महाराणा प्रताप' अगर 539 एपिसोड तक चलाया जाता है, तो इसका मतलब है कि वह लोगों को पसंद आ रहा था, चैनल को फायदा हो रहा था और यह भी कि लोगों के दिलों में महाराणा प्रताप का गहरा सम्मान है। इस सीरियल के प्रति प्रताप के बचपन और जवानी के किरदार को अलग-अलग अभिनेताओं शरद मल्होत्रा और फैजल खान ने निभाया।
न्यूज चैनल एबीपी न्यूज ने भी दो सीरीज में महाराणा प्रताप की जिंदगी को दिखाया। भारतवर्ष सीरीज में एबीपी ने उन गिनती के नायकों की बात की थी, जिन्होंने देश की धारा ही बदल दी। भारतवर्ष के एपिसोड आठ में आप महाराणा प्रताप की जीवनगाथा अब भी यूट्यूब पर देख सकते हैं। ऐसे ही भारत के मशहूर युद्धों पर आधारित एबीपी न्यूज की टीवी सीरीज 'रक्तरंजित' की दो कडि़यों में हल्दी घाटी का युद्ध दिखाया गया, जहां मशहूर इतिहासकारों के हवाले से पूरे युद्ध के बारे में बताया गया।
यह भी बताया गया कि कैसे हल्दी घाटी के युद्ध के बाद मान सिंह के मुगल दरबार में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इससे साफ होता है कि मान सिंह अकबर की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। यानी खुद अकबर ने हल्दी घाटी के युद्ध में अपनी जीत नहीं, बल्कि हार मानी थी। एक सीरियल महाराणा प्रताप पर और बना, जिसकी चर्चा नहीं होती। जो बीआर चोपड़ा के 'महाभारत' में शकुनि की भूमिका निभाने वाले गूफी पेंटल ने बनाया था। 'शूरवीर महाराणा प्रताप' के नाम से शुरू हुए इस सीरियल का नाम बाद में 'महाराणा प्रताप, प्राइड ऑफ इंडिया', कर दिया गया था।
इस सीरियल की योजना गूफी पेंटल ने मशहूर अभिनेता विनोद खन्ना के साथ बनाई थी। विनोद खन्ना ने कई एपिसोड्स तैयार किए। डीडी के लिए बन रहे इस सीरियल को लेकर विनोद खन्ना काफी उत्साहित थे। उनके साथ पूनम ढिल्लन को इस सीरियल के लिए लिया गया था। फिर किसी वजह से यह सीरियल अटक गया। अखबारों में कई बार विनोद खन्ना का साक्षात्कार भी आया कि जल्द ही सीरियल पूरा होकर प्रसारित होगा। लेकिन पता नहीं चल पाया कि वह सीरियल प्रसारित हुआ भी कि नहीं। ऐसे में चूंकि बाजीराव मस्तानी, पद्मावत जैसी फिल्में बनी हैं, जिनमें हिंदू नायकों की कहानियों को तमाम जोखिम लेते हुए भी बनाया गया और उनके जरिए कमाई भी गई। 'मोहनजोदाड़ो' को बिना आर्य आक्रमण सिद्धांत के दिखाया गया। दक्षिण में भी गोतमी पुत्र शातकर्णि पर हाल ही में फिल्में बनी हैं। उम्मीद है कि बॉलीवुड का शुरुआती दौर वापस आएगा और बिना किसी डर या झिझक के वे हिंदू नायकों की महागाथाओं को भी बड़े परदे पर लाएंगे। हालांकि सोशल मीडिया खासकर यूट्यूब इसका ब़ड़ा जरिया बना है। महाराणा प्रताप और मेवाड़ की वीर गाथाओं पर कई एलबम और शॉर्ट फिल्में यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। ऐसे ही अगर आप गूगल प्ले स्टोर में जाएंगे तो वहां महाराणा प्रताप के नाम से एक एप्प भी उपलब्ध है, जिसके जरिए आप उनके जीवन से जुड़ी सारी दिलचस्प जानकारियां हासिल कर सकते हैं।
(लेखक टीवी पत्रकार हैं)