वीरों का सम्मान : कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र और 5 अन्य सैनिकों को वीर चक्र

    दिनांक 27-जनवरी-2021   
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 गत वर्ष लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से बहादुरी से लड़ते हुये बलिदान हुए कर्नल संतोष बाबू को दूसरे सबसे बड़े वीरता मेडल  महावीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित करने की घोषणा हुई है। उनके साथ गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के दौरान चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में बलिदान हुए पांच अन्य सैनिकों को भी वीर चक्र से सम्मानित किया जायेगा।
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गत वर्ष लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से बहादुरी से लड़ते हुये बलिदान हुए कर्नल संतोष बाबू को दूसरे सबसे बड़े वीरता मेडल  महावीर चक्र से मरणोपरांत सम्मानित करने की घोषणा हुई है। उनके साथ गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के दौरान चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प में बलिदान हुए पांच अन्य सैनिकों को भी वीर चक्र से सम्मानित किया जायेगा। सेना के प्रशस्ति-पत्र के मुताबिक, ह्ल15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के दौरान बिहार रेजीमेंट (16 बिहार) के कर्नल बिकुमाला संतोष बाबू को कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) के तौर पर ऑबर्जेवेशन-पोस्ट स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दुश्मन सैनिकों की हिंसक और आक्रामक कार्रवाई के सामने भी वह स्व।यं से पहले देश सेवा की सच्ची भावना का उदारण देते हुये दुश्मन को  पीछे धकेलेने के प्रयास में लगे रहे. गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह झड़प में अपनी आखिरी सांस तक नेतृत्व करते रहे। दुश्मन  के खिलाफ विशिष्ट-बहादुरी, अनुकरणीय और दक्ष नेतृत्व सहित कर्तव्य-पथ पर सर्वोच्च बलिदान के लिए कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्माचनित किया गया है।
 

कर्नल संतोष बाबू के अलावा ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के लिए गलवान घाटी में पांच अन्य सैनिकों को अदम्य साहस और बहादुरी के लिए वीर चक्र दिया गया है। इनमें से चार सैनिकों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है। जिन चार सैनिकों को मरणोपरांत वीर चक्र दिया गया है उनमें नायब सूबेदार नूदूराम सोरेन (16 बिहार), हवलदार के पिलानी (81 फील्ड रेजीमेंट), नायक दीपक कुमार ( आर्मी मेडिकल कोर-16 बिहार), सिपाही गुरजेत सिंह (3 पंजाब) शामिल हैं। इसके अलावा हवलदार तेजेंद्र सिंह (3 मीडियम रेजीमेंट) को भी चीनी सैनिकों से हैंड-टू-हैंड फाइट करने और साथी-सैनिकों को दुश्मन के खिलाफ एकजुट करने और चीनी सैनिकों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए वीर चक्र से नवाजा गया है।

सेना के प्रशस्ति-पत्र के मुताबिक  नायक दीपक सिंह आर्मी मेडिकल कोर (एएमसी) से ताल्लुक रखते थे और ऑपरेशन स्नो-लैपर्ड के दौरान 16 बिहार रेजीमेंट के साथ तैनात थे। 15 जून की रात को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से हुई झड़प में दीपक सिंह भी घायल हुये थे। लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होनें करीब 30 सैनिकों का उपचार किया और फिर देश के लिए सर्वोच्च-बलिदान दिया था। उनके इस अनुकरणीय साहस और कार्य के लिए वीर चक्र से नवाजा गया है। सेना ने वीर सैनिकों के लिए प्रशस्ति-पत्र जारी किया है उसमें साफ तौर से लिखा है कि चीनी सैनिकों ने घातक और तेजधार हथियारों से हमला किया था। लेकिन आमने-सामने की लड़ाई में भारतीय सैनिक उनपर भारी पड़े थे। नायब सूबेदार नूडूराम सोरेन, हवलदार के. पिलानी और हवलदार तेजेंद्र सिंह के नेतृत्व और बहादुरी के कारण अन्य भारतीय सैनिक अपनी जमीन पर जमे हुये थे।


बता दें कि महावीर चक्र युद्ध के समय दिया जाने वाला दूसरे सबसे बड़ा वीरता मेडल है। वीर चक्र भी युद्ध के समय या फिर दुश्मन के खिलाफ अनुकरणीय साहस के लिए दिया जाता है।