’20 से निकलेंगी ’21 की तकनीकें

    दिनांक 28-जनवरी-2021
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

2021 में स्वचालित वाहनों की तकनीकों का और भी अधिक विकास होगा और ऐसे मॉडल सामने आएंगे जिन पर मनुष्यों की ही तरह भरोसा किया जा सके। इसी तरह डेस्कटॉप एवं लैपटॉप और खर कर आएंगे
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साल 2021 में प्रौद्योगिकी की दुनिया में जो उत्पाद आएंगे उन पर पिछले साल यानी 2020 का भी असर रहेगा। पिछले साल जिस तरह से हमारे दैनिक जीवन में बदलाव आए हैं, उनमें कई ऐसे हैं जो आगे भी हमारे साथ रहने वाले हैं और इसका असर नए साल में भी दिखाई देगा। कुछ तकनीकें जो हमारे जीवन से ओझल होने जा रही थीं, फिर से जम गई हैं और नए साल में वे अपने आपको दोबारा स्थापित करेंगी। कुछ तकनीकें, जिन्हें लेकर हम सशंकित रहते थे, वे पिछले साल अनायास ही हमारी जिंदगी में शामिल हो गर्इं और नए साल में उनकी तरक्की का सिलसिला जारी रहेगा। कुछ तकनीकें, जिन्हें पिछले साल ने लॉकडाउन और आर्थिक सुस्ती के चलते रोक दिया था, नए साल के बदले माहौल में आगे बढ़कर अपना दमखम दिखाएंगी।

इन तीनों श्रेणियों के उदाहरण आपके सामने हैं। पहला है कंप्यूटर, जिसके बारे में लोग कहने लगे थे कि अब मोबाइल फोन का प्रयोग इतना बढ़ चला है कि धीरे-धीरे कंप्यूटर की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी। दूसरा उदाहरण है-क्लाउड कंप्यूटिंग, जिसने रिमोट कामकाज के जमाने में खुद को स्थापित कर लिया। और तीसरी श्रेणी का उदाहरण है 5जी तकनीक, जो पिछले साल कुछ अटक गई थी, लेकिन इस साल अनेक देशों में अपनी धाक जमाने जा रही है। आइए, नए साल की तकनीकों के परिदृश्य पर एक नजर डाली जाए।

रिमोट कामकाज: हालांकि कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को लॉकडाउन से पहले भी इक्का-दुक्का मौकों पर घर से काम करने की इजाजत देती थीं लेकिन कोरोना वायरस के आने और फिर लॉकडाउन के बाद तो हालात एकदम से बदल गए। सहकर्म (कोलेबरेशन) और रिमोट कामकाज के सॉफ्टवेयरों और सेवाओं ने न सिर्फ खुद को स्थापित कर लिया बल्कि हम सबके लिए वे संकटमोचन बनकर उभरीं।

कंपनियों के कामकाज चलते रहे। अब तो हालत यह है कि बहुत-सी कंपनियों को यही तरीका रास आने लगा है। मिसाल के तौर पर माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने अपने कर्मचारियों को जून, 2021 तक घर से काम करने की छूट दे दी है और उसके बाद के बारे में भी नीति बना ली है कि वे इस मामले में आगे भी उदार रुख अपनाएंगीं। ड्रॉप बॉक्स और ट्विटर जैसी कंपनियों ने घोषणा की है कि अब ‘रिमोट वर्क’ उनके कामकाज का स्थायी हिस्सा होगा। इसी के लिहाज से अब नए उपकरण भी बाजार में आ रहे हैं। जूम, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, गूगल मीट और सिस्को वेब एक्स जैसे उत्पाद नए साल में और भी ज्यादा शक्तिशाली हो जाएंगे और उनमें नए फीचर जुड़ेंगे। ऐसे फीचर जो आभासी और वास्तविक का अंतर काफी हद तक पाट देंगे। उसी के लिहाज से नए उपकरण भी आने वाले हैं, मसलन ऐसी बड़ी स्क्रीन, जिन्हें रिमोट कामकाज और रिमोट बैठकों के लिहाज से ही डिजाइन किया गया है।

क्लाउड और एज कंप्यूटिंग: नए साल में क्लाउड की तकनीकें मुख्यधारा का हिस्सा बन जाएंगी। अब तक उनको अपनाने के बारे में अगर कोई हिचक थी तो वह अब नहीं रही, क्योंकि पिछले आठ महीनों के दौरान इन तकनीकों ने साबित किया है कि वे न सिर्फ सुरक्षित हैं बल्कि भरोसेमंद और शक्तिशाली भी हैं। आज हमारा कुछ काम अपने कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर तो कुछ क्लाउड पर संपन्न हो रहा है और दोनों के बीच गजब का तालमेल पैदा हो चुका है। नए साल में एज कंप्यूटिंग भी खुद को जमाएगी जो क्लाउड कंप्यूटिंग की ही तरह से चलती है, लेकिन उसका ढांचा हमारे ज्यादा करीब है, जैसे कि हमारे शहर में। अगर क्लाउड को लेकर कोई संदेह अब भी बाकी है तो एज कंप्यूटिंग उनका पूरा समाधान कर देने वाली है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: आज हममें से बहुत से लोग बोलकर टाइप करने लगे हैं और अनेक लोग मशीनी अनुवाद का सहारा लेने लगे हैं। ऐसी बहुत सी गतिविधियों के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम मेधा की भूमिका है। नए साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की हमारी गतिविधियों में बड़ी भूमिका होगी और वह भी इस तरह कि हमें एहसास भी नहीं होगा कि यह काम कृत्रिम मेधा के जरिए संपन्न हुआ है। लॉकडाउन के दौरान इस तकनीक ने लोगों को काफी सशक्त बनाया है जब संसाधन सामान्य हालात की तरह से उपलब्ध नहीं थे। ध्वनि, पाठ और भाषाओं के बीच बड़ी आसानी से सामग्री का आदान-प्रदान होने लगेगा।

5जी: भारत में 5जी का परीक्षण तो हो चुका है लेकिन अभी इसे लॉन्च किए जाने में कुछ समय है और इस साल यकीनन 5जी तकनीक भारत में आ जाएगी। अगर यह अब तक हमारे बीच नहीं है तो इसके पीछे 2020 की अजीब परिस्थितियों की भी भूमिका है। लेकिन अब स्थितियां सामान्य हो चली हैं, बाजार उठ चुके हैं, मांग पैदा होने लगी है, संसाधन उपलब्ध हो गए हैं और रिलायंस जियो तथा टेक महिंद्रा जैसी भारत की कंपनियां इस मामले में आगे बढ़ चुकी हैं। नए साल में रिलायंस जियो की 5जी सेवा शुरू होने जा रही है।

क्वांटम कंप्यूटिंग: कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवाओं और टीके की खोज ने जिस एक तकनीक की आवश्यकता की तरफ ध्यान खींचा वह थी क्वांटम कंप्यूटिंग। चीन सहित कुछ देशों में क्वांटम कंप्यूटिंग का प्रयोग करके दवाएं खोजने की कोशिश की गई है। क्वांटम कंप्यूटिंग सामान्य कंप्यूटर की तुलना में हजारों गुना तेजी और ज्यादा क्षमता से गणनाएं करने में सक्षम है। हालांकि अब तक आम प्रयोग में लेने योग्य क्वांटम कंप्यूटर नहीं बने हैं लेकिन उनके नमूने बनाए जा चुके हैं जिनमें गूगल, आईबीएम और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अग्रणी आईटी कंपनियों की भूमिका तो है ही, कुछ देशों में भी अपने स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मौजूदा हालात की आकस्मिकता और अनिवार्यता को देखते हुए इस साल क्वांटम कंप्यूटिंग को रफ्तार मिलना पक्का मानिए।

स्वचालित वाहन: इन्हें हम स्वायत्त वाहन या चालक रहित वाहन भी कह सकते हैं। अमेरिका सहित कुछ पश्चिमी देशों में कुछ ऐसी टैक्सी कंपनियां आ गई हैं जो पूरी तरह से चालक रहित कारों की सेवा प्रदान करती हैं। रिमोट वर्क और लॉकडॉउन के समय इन्होंने अपनी उपयोगिता सिद्ध की जब लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कर्मचारियों की उपलब्धता न होने के कारण कारों को चलाने के वैकल्पिक तरीकों की जरूरत पड़ी। नए साल में इन वाहनों की तकनीकों का और भी अधिक विकास होगा और ऐसे मॉडल सामने आ जाएंगे जिन पर इनसानों की ही तरह भरोसा किया जा सके।

कंप्यूटर: आपका डेस्कटॉप और लैपटॉप अगले कुछ वर्षों में कहीं नहीं जाने वाला है, यह बात रिमोट वर्क ने साबित कर दी है। मोबाइल फोन छोटे-मोटे काम करने में तो कंप्यूटर का विकल्प हो सकता है लेकिन दफ्तर के ठोस कामकाज को मोबाइल फोन पर नहीं निबटाया जा सकता। ज्यादा से ज्यादा वह कामचलाऊ ही सिद्ध हो सकता है। ऐसे में कंप्यूटरों की दुनिया में नई जान पड़ गई है। नए साल में आपको कई डिजाइन वाले ताकतवर डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटर देखने को मिलेंगे जो क्लाउड तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ ज्यादा स्वाभाविकता से जुड़े होंगे।

साइबर सुरक्षा: मौजूदा हालात में हम सबकी साइबर सुरक्षा का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि ज्यादातर कामकाज में इंटरनेट की भूमिका है। इसके जवाब में दुनिया में साइबर सुरक्षा का ढांचा बड़े रूपांतरण से गुजर रहा है। नए साल में हम बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा के नए ढांचे को रूप लेते हुए देखेंगे जिसमें न सिर्फ यूजर के स्तर पर बल्कि इंटरनेट के स्तर पर भी सुरक्षा की एक सतह मौजूद होगी। क्लाउड में आधारित सुरक्षा तकनीकें साइबर चुनौतियों पर नजर रख रही होंगी और उनका समाधान भी कर रही होंगी। हालांकि इस साल में साइबर चुनौतियों के नए रूप भी सामने आएंगे लेकिन आपकी ज्यादा हिफाजत करने में सक्षम तंत्र भी बनेंगे।  
  (लेखक सुप्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ हैं)