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    दिनांक 29-जनवरी-2021
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एनडीटीवी झूठी खबरें गढ़ता है और कांग्रेस झूठ की उसी बैसाखी के सहारे चलने का प्रयास करती है
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जब भी चीन को भारत में कोई दुष्प्रचार करना होता है, सबसे पहले एनडीटीवी उसका माध्यम बनता है। इस चैनल ने ‘एक्सक्लूसिव रिपोर्ट’ दिखाई कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय क्षेत्र में अपना गांव बसा दिया है। इसे साबित करने के लिए उसने उपग्रह से लिए गए चित्र भी दिखाए। रिपोर्ट देखकर लगेगा कि सीमा पर चीन अभी भी हावी है और लगातार भारत की जमीन हड़प रहा है। तुरंत राहुल गांधी ने भी इस फर्जी रिपोर्ट को आधार बनाकर केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया। सच यह था कि चैनल जिस गांव की बात कर रहा था, वह वर्ष 1959 से ही चीन के अधिकार में है। तब राहुल गांधी के पिता के नाना नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। तब वे चीन के साथ शांति के कबूतर उड़ाया करते थे। इसमें आश्चर्य नहीं कि एनडीटीवी ने रिपोर्ट में पूरे संदर्भ को गायब कर दिया। अगले दिन यह झूठ कई स्थानीय अखबारों में जस का तस छपा, ताकि इसे पूरे देश में फैलाया जा सके। चीन के मामले में एनडीटीवी की रिपोर्टिंग शुरू से ही संदिग्ध रही है। इसी ने चीन द्वारा भारतीय सैनिकों को बंदी बनाने की झूठी खबर फैलाई थी।

एनडीटीवी ही चाइनीज वायरस की भारतीय वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाने में अग्रणी है। देश में लोगों को वैक्सीन लगाया जा रहा है। दुनियाभर से भारतीय वैक्सीन के लिए राष्ट्राध्यक्षों के निवेदन आ रहे हैं। लेकिन भारत में इसे लेकर लोगों के बीच आशंकाएं फैलाई जा रही हैं। इसका श्रेय एनडीटीवी और उसकी जमात के मीडिया संस्थानों को ही जाता है। चाइनीज वायरस ही नहीं, किसी भी रोग के टीकाकरण में कुछ प्रतिशत लोगों में समस्याएं आती हैं। बुखार आने और हृदयाघात जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं। इन इक्का-दुक्का मामलों को किसके इशारे पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है, आप अनुमान लगा सकते हैं। एनडीटीवी ने ही धान की सरकारी खरीद को लेकर फर्जी खबर फैलाई। जब रंगे हाथ पकड़ा गया तो इसके एंकर ने सोशल मीडिया पर खेद जताकर पल्ला झाड़ लिया। इसी तरह किसानों की आड़ में चल रहे कमीशन एजेंडों के आंदोलन का महिमामंडन जारी है।

हिंदू आस्था का मजाक उड़ाने वाली वेब सीरीज से लेकर देशभर में मंदिरों पर हो रहे हमलों पर मुख्यधारा मीडिया की सहजता बनी हुई है। इस्लामी व ईसाई कट्टरता पर चुप रहने वाले टाइम्स आॅफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स व इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों को ‘तांडव’ के विरोध में फासीवाद दिखाई दे रहा है। आंध्र प्रदेश व ओडिशा के बाद तमिलनाडु में मंदिर पर हमला हुआ। वेल्लोर के मंदिर को रातों-रात चर्च में बदलने का प्रयास हुआ, पर धार्मिक सहिष्णुता का रोना रोने वाली मुख्यधारा मीडिया ने इन खबरों को महत्व नहीं दिया। सोशल मीडिया न होता तो शायद इन घटनाओं की कभी जानकारी भी नहीं मिलती। 

बहुत दिन नहीं हुए, जब कोरोना वायरस से निपटने में केरल की वामपंथी सरकार की हर तरफ जय-जयकार हो रही थी। अखबारों ने बड़े-बड़े लेख छापे थे। अब पूरे देश में संक्रमण कम हो रहे हैं तो अकेले केरल में बीमारी बढ़ रही है। आश्चर्य है कि अब केरल मॉडल की चर्चा नहीं हो रही! यह स्थिति यदि किसी भाजपा शासित राज्य में होती तो कैसी रिपोर्टिंग होती, इसकी कल्पना आप कर सकते हैं। इस बीच, मीडिया में कांग्रेसी तंत्र राहुल गांधी को फिर से ‘लांच’ करने की तैयारी में जुट गया है। इटली से नया साल मनाकर लौटे राहुल से उनकी विदेश यात्रा पर कोई प्रश्न नहीं पूछा गया। तमिलनाडु में उन्होंने उत्तर-दक्षिण भारत के बीच विभाजनकारी सोच वाली बयानबाजी की, पर मीडिया ने उसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ की तरह दिखाया। यही स्थिति किसानों को लेकर उनके अनाप-शनाप बयानों की रिपोर्टिंग में झलकती है। मुख्यधारा मीडिया राहुल को चाहे जितनी गंभीरता से लेता हो, आम भारतीय जनता के लिए वे अब भी मनोरंजन का माध्यम हैं।

टीआरपी में धांधली को लेकर निजी चैनलों के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है। सबके निशाने पर अर्णब गोस्वामी और उनका चैनल रिपब्लिक है। व्हाट्सएप की कुछ चैट के सहारे उन्हें घेरने का प्रयास हो रहा है, जबकि चैट में ऐसा कुछ नहीं है। यह समझना कठिन नहीं है कि महाराष्ट्र सरकार ने रिपब्लिक टीवी को नुकसान पहुंचाने की मंशा से चैट लीक कराई हैं। धांधली की मुख्य शिकायत इंडिया टुडे-आजतक समूह के खिलाफ है, पर कांग्रेस की कृपा से चल रही महाराष्ट्र सरकार उसकी जांच नहीं करना चाहती। इस पक्षपात के समर्थन में देश के तमाम कथित निष्पक्ष मीडिया संस्थान भी मजबूती के साथ खड़े हैं।