हर्ष मंदर के बाल संरक्षण गृहों के बच्चों को सीएए के प्रदर्शन में ले जाया जाता था,प्रतिबंधित इस्लामिक संगठनों से होती है फंडिंग

    दिनांक 04-जनवरी-2021   
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हर्ष मंदर के बाल संरक्षण गृहों से बच्चों को सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) के विरोध में हुए प्रदर्शनों में जबरन ले जाया जाता था। यही नहीं प्रतिबंधित इस्लामिक संगठनों से संरक्षण गृहों को पैसा भी मुहैया कराया जाता है। इसके अलावा इनमें बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी हो चुकी हैं

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पूर्व आईएएस अधिकारी और क​थित सेकुलर एक्टिविस्ट हर्ष मं​दर के बाल संरक्षण गृहों में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठनों के माध्यम से पैसा आता है। यही नहीं यहां के बच्चों के मन में मोदी सरकार के प्रति जहर भरा जाता है। यहां के बच्चों ने यह बात स्वीकार की ​कि उन्हें 2019 में हुए सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) के विरोध में हुए प्रदर्शनों में ले जाया जाता था। इसके अलावा यहां पर बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी हो चुकी हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बाल संरक्षण गृहों की जांच करने के बाद अन्य कई खुलासे किए हैं। आयोग ने दिल्ली सरकार को कार्रवाई के लिए इस संबंध में रिपोर्ट के साथ एक महीने पहले कार्रवाई के लिए लिखा था लेकिन दिल्ली सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में हर्ष मंदर द्वारा संचालित दो बाल संरक्षण गृह हैं। उम्मीद अमन का नाम का संरक्षण गृह कुतुबमीनार के पास है। जिसमें 129 लड़के रहते हैं। इसके अलावा 'खुशी रेनबो' नाम से एक संरक्षण गृह ओखला में है। जिसमें 100 लड़कियां हैं। हर्ष मंदर दोनों बाल संरक्षण गृहों के निदेशक हैं।
2012 में यहां एक छोटे बच्चे का यौन उत्पीड़न किया गया था। इस घटना के बाद बच्चे के मां—बाप ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद उन्हें बच्चा वापस मिला था। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की दो अन्य घटनाएं 2013 और 2016 में भी यहां पर हुई। बावजूद इसके बाल संरक्षण गृह के मैनेजर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इन बालगृहों की जांच की थी। इस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
बाल आयोग के चेयरमैन प्रियंक कानूनगो ने बताया '' हमारी टीम वहां अक्टूबर में जांच के लिए पहुंची थी। वहां टीम को कई खामियां मिली। बच्चों को वहां दयनीय स्थिति में रखा गया था। बच्चों को 'पोटा केबिन' में और 'टीन शेड' में रखा गया था, जो कानूनन सही नहीं है। इसके अलावा छोटे और बड़े बच्चों के शौचालय और बाथरूम भी अलग होने चाहिएं जो वहां नहीं थे। और भी कई सारी खामियां इन बाल संरक्षण गृहों में हमे मिली।'' उन्होंने बताया '' जब हमारी टीम ने इन संरक्षण गृहों को मिलने वाली फंडिंग के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला ​कि इन संरक्षण गृहों को दिल्ली सरकार से पैसा दिया जाता है। दिल्ली सरकार से मिलने वाले पैसे के अलावा कनाडा के एक एनजीओ और नीदरलैंड से यहां फंडिंग होती है। एक एनजीओ है 'एसोसिएशन फॉर रूरल एंड अर्बन नीडी'। इस एनजीओ को ''इस्लामिक रिलीफ वर्ल्ड वाइड' संगठन से पैसा मिलता है जिसे यह पैसा इस्लामिक संगठन 'मुस्लिम ब्रदरहुड' से मिलता है, इस संगठन को बांग्लादेश, यूएई, रशिया और इजराइल समेत कई देशों में प्रतिबंधित किया हुआ है।''
कानूनगो ने बताया '' एक पूरी
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के माध्यम से हर्ष मंदर के एनजीओ पैसा दिया जाता था। हर साल इन दोनों बाल संरक्षण गृहों को लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपए की फंडिंग की जाती है। संरक्षण गृहों की स्थिति देखकर नजर आया कि यहां पर फंडिंग का सही इस्तेमाल नहीं किया जाता था। इसकी जांच होनी चाहिए''
बच्ची ने बोला मोदी सरकार मुस्लिम विरोधी
जब आयोग की टीम वहां पहुंची तो एक बच्चे ने कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम विरोधी है। बच्चों को यह बात किसने सिखाई। एक अन्य बच्ची ने कहा कि यहां से बच्चों को सीएए के विरोध प्रदर्शन में ले जाया जाता था। प्रियंक कानूनगो कहते हैं'' बच्चों को किसी भी तरह के प्रदर्शन में ले जाया जाना कानून का उल्लंघन है। इस पर कार्रवाई के लिए हमने सरकार को लिखकर दिया है।''
हर्ष मंदर पर एफआईआर के लिए दिल्ली पुलिस को लिखा
बाल आयोग की टीम ने जब हर्षमंदर से इस बारे में बात की उन्होंने कहा कि उनका इस संरक्षण गृहों से कोई संबंध नहीं हैं। जबकि वह अभी भी इनके निदेशक हैं। आयोग के चेयरमैन 'प्रियंक कानूनगो ने बताया कि इस तरह की जानकारी देना जांच को प्रभावित करने का प्रयास है। हमने दिल्ली पुलिस को इस संबंध में एफआईआर के लिए लिखा है।