शिक्षा का कांग्रेसीकरण, राष्ट्रीय विचार से जुड़े शिक्षकों का प्रदेश के एक से दूसरे छोर पर स्थानान्तरण

    दिनांक 08-जनवरी-2021
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सरकार द्वारा विचारधारा के आधार पर शिक्षकों के स्थानान्तरण प्रदेश के एक छोर से दूसरे छोर पर करके शिक्षकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। कांग्रेस के जुड़े शिक्षक संगठन के दबाव में सरकार द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) ने राज्य की महाविद्यालय शिक्षा में एक गुट को ट्रांसफर की ठेकेदारी देने तथा रुक्टा (राष्ट्रीय) से जुड़े शिक्षकों की आवाज को कुचलने के शासकीय प्रयासों का मुखर विरोध किया है

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राजस्थान के स्कूल-कॉलेजों में शैक्षिक व्यवस्थाएं बदतर बनी हुई हैं। प्रदेश के 90 फीसदी महाविद्यालयों में प्राचार्य नहीं हैं। 95 फीसदी महाविद्यालयों में शारीरिक शिक्षक और पुस्तकालय अध्यक्ष नहीं हैं। शिक्षकों की पदोन्नतियां लम्बे समय से लंबित चल रही हैं। सरकार द्वारा 97 नये महाविद्यालय खोलने का श्रेय तो लिया गया, लेकिन पहली बार इतिहास में ऐसा हुआ है कि इन महाविद्यालयों के लिए किसी पोस्ट की वित्तीय स्वीकृति नहीं दी गई है। महाविद्यालय दरी पट्टी पर व दो कमरों में बिना शिक्षकों के चल रहे हैं। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग की इन मूल समस्याओं पर सरकार का ध्यान नहीं है। इसके विपरित सरकार द्वारा विचारधारा के आधार पर शिक्षकों के स्थानान्तरण प्रदेश के एक छोर से दूसरे छोर पर करके शिक्षकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। कांग्रेस के जुड़े शिक्षक संगठन के दबाव में सरकार द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) ने राज्य की महाविद्यालय शिक्षा में एक गुट को ट्रांसफर की ठेकेदारी देने तथा रुक्टा (राष्ट्रीय) से जुड़े शिक्षकों की आवाज को कुचलने के शासकीय प्रयासों का मुखर विरोध किया है।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय सिंह ने बताया कि 31 दिसंबर, 2020 को कॉलेज शिक्षा में जारी सूची में कांग्रेस विधायकों की अनुशंसा पर हुए स्थानांतरणों को लेकर अन्य विभाग के राज्य मंत्री के नेतृत्व में एक शिक्षक गुट ने जिस तरह बवाल मचाया, ऐसा राज्य की उच्च शिक्षा में पहली बार हुआ है। कांग्रेस समर्थित शिक्षक गुट के महामंत्री द्वारा ट्रांसफर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार से जुड़े शिक्षकों के नाम होने का आरोप लगाकर पूरी स्थानांतरण सूची को रुकवाया गया। 4 जनवरी, 2021 को देर रात्रि पुन: संशोधित सूची जारी की गई। जिसमें ऐसे शिक्षक जिन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था, उनके पूर्व में स्थानांतरित स्थानों को बदलते हुए वर्तमान पदस्थापन स्थान (जो उनके गृह निवास से सामान्यत: 400 से 700 किलोमीटर दूर है) से भी 200-300 किलोमीटर आगे तक स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए गए हैं। ऐसा तब है जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बार-बार बदले की भावना से कार्य नहीं करने की बात सार्वजनिक रूप से कहते हैं, इससे उनकी कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट हुआ है।
बेहतर शिक्षा देने का दंभ भरते हुए बडेÞ-बड़े दावे करने वाली कांग्रेस पार्टी की नीतियों की वास्तविकता किसी से छिपी हुई नहीं है। धरातल की बात करें तो प्रदेश के महाविद्यालय शिक्षा में ढाई हजार से ज्यादा पोस्ट वेकेंट हैं। कई महाविद्यालय खाली पड़े हैं। ऐसे में विधायक अपने क्षेत्र में महाविद्यालयों को सुचारू चलाने के लिए शिक्षकों के स्थानांतरण की अनुशंसा की थी। लेकिन एक शिक्षक गुट और अन्य विभाग के राज्यमंत्री के दबाव के चलते विधायकों के अनुशंसाओं को भी दरकिनार किया गया। हालांकि राष्ट्रीय विचार से जुड़े शिक्षकों के स्थानान्तरण कर प्रताड़ित करना कांग्रेस की परम्परागत नीति है। इस सम्बंध में रुक्टा (राष्ट्रीय) के महामंत्री डॉ. नारायणलाल गुप्ता ने बताया कि राज्य की उच्च शिक्षा में यह ऐतिहासिक गिरावट का उदाहरण है। तबादला सूची के माध्यम से शासन द्वारा प्रायोजित भय और आतंक का निर्माण किया गया है। राज्य की उच्च शिक्षा का पूरी तरह कांग्रेसी करण कर दिया गया है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने विचारधारा के आधार पर कॉलेज शिक्षकों के स्थानांतरण पर सरकार को घेरा है। कटारिया ने आरोप लगाया कि एक तथाकथित कांग्रेस समर्थित संगठन के महामंत्री के पत्र के आधार पर रा.स्व. संघ विचार से जुड़े शिक्षकों का पूर्व में पदस्थापित स्थान से भी दूर तबादला कर दिया गया है। इसमें विधायकों की भी अनुशंसा थी, जिसकी वजह से 31 दिसंबर की स्थानांतरण सूची में इस तरह का बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उच्च शिक्षामंत्री ने संशोधित सूची जारी की, यह शिक्षा विभाग जैसे पवित्र संस्थान में एक अत्यंत घिनौना कृत्य है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की इस मामले में जो भूमिका रही है, यह भी लज्जाजनक घटना है। नेता प्रतिपक्ष ने अफसोस जताया कि योग्यता और अच्छे कार्य के आधार पर पुस्कृत करना तो दूर, चयनित रूप से एक लोकतांत्रिक शिक्षण संगठन को कुलचने का काम गहलोत कर रहे हैं। कटारिया ने कहा कि राज्य की कॉलेज शिक्षा में 2500 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। ऐसी स्थिति में कॉलेज शिक्षा में नियुक्तियों के स्थान पर मुख्यमंत्री द्वारा स्थानांतरण की राजनीति करना अच्छे शासन का उदाहरण कतई नहीं कहा जा सकता है। कटारिया ने अपेक्षा जताई है कि सीएम इस पूरे मामले पर पुनर्विचार करके प्रताड़ित शिक्षकों को न्याय प्रदान करेंगे।