कहां तक गिरेगा एनडीटीवी, कोरोना पीड़ित बच्चों के नाम पर अवैध रूप से वसूली की

    दिनांक 11-फ़रवरी-2021   
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एनडीटीवी ने तो इस बार हद ही पार कर डाली. टैक्स फ्रॉड, इनसाइडर ट्रेडिंग, संदिग्ध फंडिंग, राष्ट्र विरोधी एजेंडा के लिए कुख्यात इस चैनल ने जो किया है, वह मानवता को शर्मसार करने वाला है

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अब एनडीटीवी कोरोना महामारी से पीड़ित गरीब बच्चों की सहायता के लिए यूनिसेफ के नाम पर फर्जी तरीक से फंड जुटाने के मामले में रंगे हाथ पकड़ा गया है. लीगल राइट्स आबजर्वेटरी (एलआरओ) ने एनडीटीवी की ये जालसाजी पकड़ ली. एनडीटीवी का दावा था कि वह यूनिसेफ के साथ मिलकर महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाले एक एनजीओ 'चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन' के लिए ये चंदा जुटा रहा था. लेकिन जब एलआरओ ने परतें खंगाली, तो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जवाब मिला कि उन्हें इस तरह के किसी भी चंदा जुटाने के कार्यक्रम की न तो जानकारी है, न ही एनडीटीवी को इसके लिए कोई इजाजत दी गई है. यूनिसेफ को इसकी भनक शायद पहले ही लग गई थी. इसलिए इस मामले के खुलासे से पहले ही यूनिसेफ ने पल्ला झाड़ते हुए बयान जारी किया था कि उसकी जानकारी में आया है कि कुछ संस्थाएं उसके नाम से अवैध रूप से चंदा जुटाने का काम कर रही हैं.
पहले चलते हैं यूनिसेफ के बयान की तरफ. असल में यूनिसेफ इंडिया ने ये बयान 27 दिसंबर 2020 को जारी किया था. यूनिसेफ अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो बाल कल्याण के लिए कार्य करती है. बयान में कहा गया था कि उसके नाम पर कुछ संस्थाएं अवैध रूप से चंदा जुटा रही हैं. इसकी निंदा करते हुए यूनिसेफ ने कहा था कि यह अनैतिक कृत्य है और वह ऐसे तमाम संस्थानों और व्यक्तियों से खुद को अलग करता है. यूनिसेफ की जानकारी में भी ये मामला तब आया, जब एलआरओ ने चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के नाम पर अवैध रूप से वसूली की शिकायत की. तब तक एनडीटीवी अवैध रूप से यूनिसेफ और चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के नाम पर एक करोड़ छह लाख 65 हजार 862 (10666862) रुपए की वसूली कर चुका था. यह रकम तो खुद एनडीटीवी ने कैंपेन के दौरान स्वीकार की है. असल में ये इसकी कई गुना हो सकती है.
नवंबर 2020 में एनडीटीवी ने 'एनडीटीवी-यूनिसेफ रिइमेजिन टेलेथॉन' के नाम पर कोरोना काल में बच्चों की सहायता करने का झांसा देते हुए ये फर्जीवाड़ा शुरू किया था. जिस समय ये कैंपेन शुरू किया गया था, तो एनडीटीवी ने बड़ा ही मानवीय चेहरा बनाते हुए कई डरावने दावे किए थे. मसलन उसका कहना था कि कोरोना के कारण देश में प्रतिदिन 1600 से ज्यादा बच्चे मर सकते हैं. इसलिए उनके भोजन, उनके इलाज और भविष्य में टीकाकरण के लिए तुरंत पैसा जुटाना जरूरी है. एनडीटीवी ने दानदाताओं को ये भी भरोसा दिलाया था कि उनके द्वारा दी गई रकम से सबसे कमजोर तबके के बच्चों की सहायता की जाएगी.
एलआरओ ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) से की थी. साथ ही इसकी शिकायत कई अन्य जगह भी की गई. इसी क्रम में एनसीपीसार ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू ) को चिट्ठी लिखकर एनडीटीवी के खिलाफ कार्रवाई करने की हिदायत दी थी. पत्र में कहा गया है कि एनडीटीवी ने यूनिसेफ के साथ मिलकर कोरोना महामारी से पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए कथित रूप से ये चंदा इकट्ठा करने का कार्यक्रम शुरू किया था. पत्र के मुताबिक एलआरओ का आरोप है कि एनडीटीवी का दावा था कि ये राशि 'चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन' के लिए इकट्ठा की जा रही है. 'चाइल्ड लाइन इंडिया' महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के लिए बच्चों के लिए चाइल्ड लाइन 1098 नाम से टेलीफोन हेल्पलाइन चलाता है. मंत्रालय या चाइल्ड लाइन को इसकी भनक तक नहीं थी. पत्र में कहा गया है कि एलआरओ का दावा है कि एनडीटीवी ने अवैध रूप से वसूली के लिए कोरोना पीड़ित बच्चों के नाम का सहारा लिया है. एनसीपीसीआर ने हिदायत दी है कि एलआरओ की शिकायत पर जांच की जाए. पत्र में कहा गया है कि एनडीटीवी के इस फर्जीवाड़े पर आयोग सेक्शन 13(1)(जे) सीपीसीआर एक्ट, 2005 के तहत संज्ञान ले रहा है.
इससे पूर्व के एनडीटीवी के कारनामों से आप पहले ​ही परिचित हैं. कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस मीडिया हाउस ने जमकर कानूनों की धज्जी उड़ाई. एनडीटीवी के खिलाफ शेयरों की धांधली, इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे तमाम संगीन आरोप हैं. इन आरोपों के चलते सेबी प्रणब राय और उनकी पत्नी को दंडित तक कर चुका है. लेकिन कमजोर, बीमार और गरीब बच्चों के नाम पर इस तरह की अवैध वसूली क्यों ? शायद इसलिए कि यूपीए के शासनकाल से चले आ रहे अवैध आय के स्रोत सूखते जा रहे हैं. इससे पहले भी एनडीटीवी कभी टाइगरों को बचाने और कभी किसी अन्य सामाजिक कार्य के नाम पर चंदा उगाहता रहा है. अब मांग उठ रही है कि एनडीटीवी ने समाज कल्याण के नाम पर अभी तक जितने भी चंदा कार्यक्रम चलाए हैं, उनकी जांच हो.