पांच महीने की नन्‍ही तीरा के उपचार के लिए पीएम मोदी ने छह करोड़ माफ किए

    दिनांक 12-फ़रवरी-2021
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मां-बाप के लिए औलाद अनमोल होती है और संवेदनशील सरकार के लिए उसकी जनता। दुर्लभ बीमारी की चपेट आने के बाद मुंबई के अस्‍पताल में वेंटीलेंटर पर मौत से जूझ रही फूल सी तीरा को जीवन देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आगे आए। मोदी ऐसे ही भावुक नहीं होते वह भावुक हैं और देश के हर व्‍यक्ति के लिए सोचते हैं यह उन्‍होंने साबित भी किया है। मासूम तीरा के लिए उन्‍होंने 6 करोड़ रुपए का टैक्‍स माफ कर दिया है

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मोदी सरकार डिजिटल इंडिया, तकनीक के प्रयोग की बात भी इसलिए करती है ताकि क्‍योंकि हर क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर होने के लिए भारत को इसकी जरूरत है। मुंबई में एक अस्‍पताल में भर्ती पांच माह की तीरा कामत की जान बचाने को सोशल मीडिया पर अपील कर उसके माता पिता ने 15 करोड़ रुपए तो जुटा लिए लेकिन नन्‍ही तीरा को नया जीवन देने के लिए अमेरिका से मंगाए जाने वाले खास इंजेक्‍शन पर 6 करोड़ का टैक्‍स लगता। महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस बात की जानकारी हुई तो उन्‍होंने सरकार को पत्र लिखा। इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने तत्‍काल इंजेक्‍शन से बड़ा टैक्‍स माफ कर दिया। इंजेक्‍शन की कीमत 16 करोड़ है और इसके आयात पर छह करोड़ की अलग इम्‍पोर्ट ड्यूटी और टैक्‍स लगता है जो अब नहीं लगेगा। सरकार की सराहनीय पहल से तीरा को नया जीवन मिलने की बड़ी उम्‍मीद बंधी है।
महाराष्‍ट्र की तीरा कामत की उम्र अभी महज पांच माह है और उसे एसएमए टाइप 1 नामक खतरनाक बीमारी ने घेर रखा है। ये ऐसा दुर्लभ रोग है, जिसकी चपेट में आने के बाद कोई भी बच्‍चा अधिकतम 18 माह ही जिंदा रह सकता है। नन्‍ही तीरा की खबर जब से सामने आई है, हर कोई उसके लिए प्रार्थना कर रहा है। कई दिनों से वह मुंबई के एसआरसीसी अस्पताल में भर्ती है। हालत देखते हुए उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। तीरा के इलाज में जुटे डॉक्‍टरों की उम्‍मीद उस इंजेक्‍शन पर टिकी है, जो भारत में बनता ही नहीं है। अब यह इंजेक्‍शन अमेरिका से मंगाया जाएगा।
आजादी देश में सबसे ज्‍यादा लंबे समय तक कांग्रेस का शासन रहा। बावजूद इसके भारत ऐसी कई दुर्लभ दवाओं के मामले अब भी आत्‍मनिर्भर नहीं हो सका। मगर प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की तकनीकी पहल भविष्‍य के लिए आशा की किरण जगाती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कोरोना की सबसे पहले वैक्‍सीन बनाया माना जा सकता है। कोरोना महामारी के बीच जिस तरह सरकार के प्रोत्‍साहन से भारतीय वैज्ञानकिों ने सबसे पहले वैक्‍सीन तैयार कर क्रांतिकारी काम करके दिखाया है, उसकी तारीफ पूरी दुनिया कर रही है। देश में कोविड वैक्‍सीन को समाज के आखिरी पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार जी जान से जुटी नजर आ रही है। इसे आधुनिक भारत की एक तस्‍वीर कहा जा सकता है। सरकार जब संवेदनशील होती है तो देश के अंतिम व्‍यक्ति के लिए सोचती है और वैसे ही फैसले भी लेती है। अस्‍पताल में भर्ती तीरा कामत की जान बचाने को मोदी सरकार ने जो फैसला लिया है, वैसा अपने देश में पहले कभी नहीं होता देखा गया है।
मां का दूध पीते वक्‍त घुटने लगता है तीरा का दम
तीरा के पिता मिहिर कामत बताते हैं कि बेटी के जन्‍म के समय सब कुछ नॉर्मल था। वो आम बच्‍चों से कुछ लंबी थी, इसलिए हमने उसका नाम रखा तीरा। कुछ समय बाद बच्‍ची को अजीब सी परेशानी महसूस की जाने लगी। बेटी जब मां का दूध पीती थी तो उसका दम घुटने लगता था। धीमे-धीमे स्‍थ‍िति गंभीर होती चली गई। डॉक्‍टरों को दिखाया तो शुरू में बीमारी का पता नहीं लगा। बाद में जांचों से सामने आया कि तीरा एसएमए टाइप-1 नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि इस बीमारी का भारत में इलाज ही मौजूद नहीं है। इलाज नहीं मिला तो बच्‍ची छह महीने से अधिक जीवित नहीं रह पाएगी।
डॉक्‍टरों के अनुसार, जिन बच्चों को ये रोग होता है, उनके दिमाग के नर्व सेल्स और स्पाइनल कोर्ड काम नहीं करते हैं। ऐसी स्‍थ‍िति में दिमाग तक वो सिग्‍नल नहीं जाता, जिससे मांसपेशियां नियंत्रित होती हैं। इस तरह के बच्चे बगैर दूसरे की सहायता के चल भी नहीं पाते। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता है तो सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। आखिर में ये दुर्लभ बीमारी बच्‍चे की जान ले ले लेती है।
बच्‍ची के इलाज को चाहिए खास इंजेक्‍शन
इसके उपचार के लिए Zolgensma नामक एक खास इंजेक्‍शन की जरूरत पड़ती है। इंजेक्‍शन की कीमत 16 करोड़ रूपये है और भारत में नहीं बनाया जाता। तीरा के मां-बाप मिहिर कामत और प्र‍ियंका कामत मध्‍यमवर्गीय परिवार से हैं। बच्‍ची को बचाने के लिए उन्‍होंने डोनेट टू तीरा के नाम से सोशल मीडिया के माध्‍यम से अपील कर पैसे जुटाने की शुरुआत की। उन्‍होंने तीरा की बीमारी की कहानी और मां-बाप के रूप में अपना दर्द सबके साथ साझा किया। इसके बाद देश के कौने-कौने से लोग तीरा की मदद को आगे आए।
फडणवीस ने लिखा पत्र, सरकार ने माफ किया टैक्‍स
तीरा कामत के मां-बाप ने महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मदद मांगी थी। दरअसल, बच्‍ची के इलाज को अमेरकिा से मंगाए जाने वाले 16 करोड़ के इंजेक्‍शन पर अलग से छह करोड़ का आयात शुल्‍क भी लगता। इससे इंजेक्‍शन की कीमत भारत मे आने के बाद 22 करोड़ हो जाती है। फडणवीस ने केंद्र से इम्‍पोर्ट ड्यूटी आयात शुल्‍क और जीएसटी माफ करने को कहा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने फड़नवीस के पत्र पर तुरंत संज्ञान लेते हुए मासूम तीरा के इलाज को मंगाए जाने वाले इंजेक्‍शन पर लगने का वाला पूरा टैक्‍स माफ कर दिया है। सरकार के इस फैसले की हर तरफ तारीफ हो रहा है। देश उम्‍मीद कर रहा है कि मोदी सरकार की तकनीकी पहल और वैज्ञानिकों के प्रोत्‍साहन करना देश को कोरोना वैक्‍सीन की तरह भविष्‍य में इस तरह की दुर्लभ बीमारियों के इलाज के मामले में भी भारत को जरूर आत्‍मनिर्भर बनाएगा !