स्वदेशी कू ऐप तोड़ेगा ट्विटर का घमंड

    दिनांक 12-फ़रवरी-2021
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कू ऐप से महज 24 घंटे में 30 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके है और यह सिलसिला लगातार जारी है
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जब कुछ महीनों पहले पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा था तब आपदा को अवसर के रूप में देखने का मंत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान की नींव पड़ी
 
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए आत्मनिर्भर भारत के मंत्र का उद्देश्य दूसरों देशों पर भारत की निर्भरता और उनकी मनमानी को खत्म करना था। सरकार के इस कदम से चीन से आयातित सामानों से पटे भारतीय बाजार पर प्रभाव पड़ना तय था, लेकिन भारत-चीन सीमा— पूर्वी लद्दाख से सटे क्षेत्र को लेकर चीन और भारतीय सैनिकों के बीच हुई झड़प ने आत्मनिर्भर अभियान की संकल्पना को मजबूती प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाई।

यही वह दौर था जब आत्मनिर्भर भारत अभियान के मंत्र को स्वालंबन और स्वाभिमान का नारा देकर प्रधानमंत्री मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए की बड़ी धनराशि भारतीय उद्योगों को मजबूत करने के लिए आवंटित की थी। इसका उद्देश्य चीन के आयातित मालों पर अंकुश लगाकर भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मदद पहुंचाना था, ताकि भारतीय जरूरतों के लिए घरेलू उत्पाद देश में तैयार करने में घरेलू उद्योग खुद सक्षम हो सके। भारत सरकार के लिए यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि महामारी से जूझ रहे देश के उद्योग-धंधों पर राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद ताला लग गया था।

यही वह समय था जब चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच एलएसी पर 22 भारतीय सैनिकों की शहादत पर चीन के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाते हुए भारत सरकार ने'चीनी ऐप्स' पर प्रतिबंध लगाया था। इनमें चर्चित चीनी ऐप 'टिक-टाक' भी शामिल है। बाइटडांस के स्वामित्व वाली टिक-टॉक ऐप का प्रयोग करने वाले सबसे ज्यादा लोग भारत के ही थे। भारत में  टिक-टॉक पर प्रतिबंध के बाद विकल्प के तौर पर भारत में ऐसे कई स्वदेशी ऐप विकसित हो गए, जिन्होंने टिक-टॉक ऐप की कमी को जल्द ही पाट दिया।

अभी कुछ ऐसा ही माहौल भारत में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के खिलाफ भी बना हुआ है। कृषि कानून 2020 के खिलाफ भारत में 70 से अधिक दिनों से जारी कथित किसान आंदोलन को लेकर ट्विटर के जरिए
किसान आंदोलन के बारे में भ्रम फैलाकर भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई।

भारत सरकार ने ट्विटर पर कथित किसान आंदोलन की आड़ में चल रही देशविरोधी गतिविधियों वाले ट्वीट्स को हटाने के लिए ट्वीटर को लिखा, तो बेलाग ट्विटर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ ट्वीट हटाने से मना कर दिया। ट्विटर पहले भी कई मौकों पर ऐसा करता आया है। ट्विटर के इस रवैये के चलते ही भारत में संभवतः कू नामक स्वदेशी ऐप की संकल्पना को आकार दिया गया। मार्च, 2020 में विकसित कू ऐप को बेंगलुरू के अप्रम्या राधाकृष्ण और मंयक बिल्दावत्क ने बनाया था। ट्विटर के स्वदेशी विकल्प के रूप में उभरे कू ऐप की सबसे खास बात यह है कि यह डिजिटल इंडिया आत्मनिर्भर भारत इनोवेटिव चैलेंज का विजेता रहा है।

गौरतलब है प्रधानमंत्री मोदी खुद अपने चर्चित रेडियो कार्यक्रम मन की बात में कू ऐप की चर्चा कर चुके हैं और समझा जाता है कि जल्द खुद प्रधानमंत्री खुद कू ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा सकते हैं। हालांकि स्वदेशी कू ऐप से रेल मंत्री पीयूष गोयल, कानून मंत्री और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद जैसे कई मंत्री जुड़ चुके हैं। मंत्रियों के कू ऐप से जुड़ने के बाद स्वदेशी कू ऐप की चर्चा तेजी से बढ़ी तो स्वदेशी सोशल नेटवर्किंग साइट से लोग तेजी से जुड़ने शुरू हो गए। आंकड़े बताते हैं कि महज 24 घंटे में 30 लाख से अधिक लोग इससे जुड़ चुके है और यह सिलसिला लगातार जारी है।

स्वदेशी कू ऐप ट्विटर से दो मामलों में बिल्कुल अलग है। पहला, कू ऐप लोगों को 350 शब्दों में अपने संदेश लिखने की इजाजत देता है। दूसरा, कू ऐप लोगों को संदेश को संपादित करने की भी सुविधा प्रदान करता है। यह सुविधा ट्विटर में नहीं है। ट्विवटर अभी भी मात्र 280 शब्दों का संदेश लिखने की अनुमति देता है और संदेश लिखने में गलती होने पर उपयोग करने वाले को संपादन का भी अधिकार नहीं है। वहीं, ट्विटर की तरह कू ऐप पर भी ऑडियो, वीडियो, लिंक और तस्वीरों को साझा किया जा सकता है। यही वजह है कि भारी संख्या में लोग कू ऐप से जुड़ रहे हैं।

कू ऐप गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर दोनों प्लेटफॉर्म पर एंड्राएड और आईओएस वर्जन में डाउनलोड करके स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जा सकता है। स्मार्टफोन पर कू ऐप पर मोबाइल नंबर की सहायता से जुड़ा जा सकता है। वहीं ट्विटर की तरह कू का डेस्कटॉप वर्जन भी उपलब्ध है और ट्विटर की ही तरह कू ऐप पर निजी संदेशों के साथ ही दूसरे लोगों को फॉलो किया जा सकता है। फिलहाल, गूगल प्ले स्टोर में कू ऐप की रेटिंग 4.7 हैं, जबकि एप्पल ऐप स्टोर पर इसकी रेटिंग 4.2 है। सबसे खास बात कू ऐप की यह है कि इस पर अंग्रेजी और हिंदी के अलावा बंगाली, गुजराती, तेलगु, कन्नड, तमिल, मलयाली, मराठी, पंजाबी, असमिया और उड़िया भाषा में संदेश लिखा जा सकता है।

उल्लेखनीय है स्वदेशी कू ऐप को आत्मनिर्भर भारत अभियान का सहयोग मिल रहा है। केंद्र सरकार में कई बड़े नेता और लोकप्रिय हस्तियां अब तक कू ऐप पर पर्दापण कर चुकी है और लोगों को कू ऐप से जुड़ने का आह्वान किया जा रहा है। यही नहीं, भारतीय डाक विभाग, माईगॉव और इलेक्ट्रानिक्स एंड सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी कू पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। ट्विटर के एकाधिकार और कंपनी के निरंकुश रवैये को स्वदेशी कू ऐप की खोज की प्रमुख वजह है। ठीक इसी तरह चर्चित मैसेंजिंग ऐप व्हाट्सएप का विकल्प भी भारत सरकार जल्द लेकर आने वाली है, क्योंकि व्हाट्सएप पर लोगों का डेटा चोरी किए जाने के आरोप लग रहे हैं।