चीनी कंपनियां चुरा रहीं भारतीयों का डेटा

    दिनांक 13-फ़रवरी-2021
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केंद्र सरकार ने उनके टिकटॉक जैसे 117 ऐप को बैन कर दिया था। लेकिन अब चीन की कंपनियां डेटा चोरी के लिए नए नए हथकंडे अपना रही हैं। इन्हीं हथकंडों में 'इंस्टेंट लोन ऐप' नया हथकंडा है

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चीन की कंपनियां हर भारतीय का डेटा चोरी करने के मुहिम में लग गई हैं। डेटा चोरी की वजह से केंद्र सरकार ने उनके टिकटॉक जैसे 117 ऐप को बैन कर दिया था। लेकिन अब चीन की कंपनियां डेटा चोरी के लिए नए नए हथकंडे अपना रही हैं। इन्हीं हथकंडो में 'इंस्टेंट लोन ऐप' नया हथकंडा है। बेशक ये फ्रॉड हैदराबाद के पी सुनील, किरणी मोनिका और बी संतोष की आत्महत्या के बाद सामने आया है। लेकिन ये चीनी कंपनियां करीब दो सालों से कुछ भारतीयों के साथ मिलकर इंस्टेंट लोन देने और डेटा चोरी करने का कारोबार में लगी हुई थी।
मामले की गंभरीता को देखते हुए अब इस मामले में हैदराबाद पुलिस, बेंगलुरू पुलिस, ईडी, इनकम टैक्स और अन्य एजेंसियां शामिल हो गई हैं। तुरंत कार्रवाई कर इसमें तीन चाइनीज़ के साथ साथ कई गिरफ्तारी भी हो चुकी हैं। लेकिन जिन करोड़ों लोगों का डेटा इन 11 ऐप ने मिलकर चोरी कर लिया है। उसको लेकर भारतीय एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। अब जाकर पुलिस ने ऐसे 200 एप की पहचान कर गुगल से इन्हें बैन करने के लिए लिखा है।
हैदराबाद पुलिस ने इन ऐप के ऑपरेशन हेड जू वाई को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। वाई भारत से भागने की कोशिश में था, लेकिन ठीक समय पर पुलिस ने उसे एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले एक चीनी महिला लियांग पुणे से और एक चीनी पुरूष वाई बाई उर्फ डेनिस हैदराबाद से गिरफ्तार हो चुके हैं।
हैदराबाद पुलिस के इस मामले में अभी तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर अंजिनी कुमार के मुताबिक "उन्होंने ऐप के बैंक अकाउंट्स के करीब 90 करोड़ रुपए भी रोक दिए गए हैं"।
इस बारे में ट्राई के पूर्व चेयरमैन आर एस शर्मा ने पांचजन्य को बताया कि "डेटा चोरी के जरिए ये कंपनियां भारतीयों की प्रोफाइलिंग कर लेती हैं। इनके जरिए से ये हर भारतीय की पसंद नापसंद, उनकी इंकम, उनके दोस्त और वो कहां जाते हैं। परिवार में कितने लोग हैं आदि आदि पता कर लेते हैं। यानि उन्हें आपके बारे में इतना ज्य़ादा पता हो जाता है जितना की आपको भी नहीं है। अब सवाल उठता है कि ये इस डेटा का करते क्या हैं। ये इस डेटा को बेचते हैं। यानि इससे पैसा कमाते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप गोवा जाने की फ्लाइट्स ही सर्च करते हैं तो आपके सोशल मीडिया से लेकर आपके नंबर पर गोवा के होटल, कैफे, सस्ती टिकट सारे मैसेज आना शुरू हो जाते हैं। बस यहीं पर ये डेटा चोरी करने वाले पैसा कमाते हैं। इसके साथ ही इसी डेटा से ये कंपनियां देश की राजनीति भी बदल सकती हैं। डेटा के जरिए से इन्हें पता होता है कि कौन व्यक्ति क्या पसंद कर रहा है और क्या नहीं। बस इन्हें ए​क जैसी पसंद वाले लोगों को एक साथ करके समूह बनाना है और यहां की राजनीतिक पार्टियों से उसको जोड़ना है। इसलिए चीन की कंपनियां कभी 'गेमिंग ऐप' और कभी 'लोन ऐप' जैसे तरीकों से भारतीयों का डेटा चोरी कर रही हैं।