लव जिहाद पर नकेल कसता मध्य प्रदेश

    दिनांक 13-फ़रवरी-2021
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प्रदेश में धार्मिक स्वतंत्रता कानून 9 जनवरी 2021 को लागू हुआ। इस कानून के लागू होने के 23 दिन के अंदर 23 केस दर्ज हो चुके हैं। सर्वाधिक 7 केस भोपाल संभाग, 5 इंदौर, 4-4 जबलपुर व रीवा और 3 केस ग्वालियर संभाग में दर्ज हुए हैं

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मध्य प्रदेश में असद नाम के मुस्लिम युवक ने इंजीनियरिंग की 23 वर्षीय छात्रा को अपना नाम आशु और खुद को मैकेनिकल इंजीनियर बताकर प्रेम जाल में फंसाया। विवाह का झांसा देकर असद ने दो साल तक छात्रा का शारीरिक शोषण किया। एक दिन छात्रा को असद की सच्चाई और पता चला कि वो मैकेनिकल इंजीनियर नहीं मैकेनिक है। उसी दिन से छात्रा ने असद से दूरी बना ली, लेकिन असद ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। वो छात्रा पर डरा-धमका कर कन्वर्जन कर शादी के लिए दबाव बनाने लगा। आखिरकार छात्रा ने नए बने कानून मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 (जिसे लव जिहाद कानून भी कहा जा रहा है) के तहत केस दर्ज कराया और अब असद सलाखों के पीछे है।
9 जनवरी 2021 को मध्य प्रदेश में इस कानून के लागू होने के 23 दिन के अंदर 23 केस दर्ज हो चुके हैं। सर्वाधिक 7 केस भोपाल संभाग, 5 इंदौर, 4-4 जबलपुर व रीवा और 3 केस ग्वालियर संभाग में दर्ज हुए हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के अनुसार पिछले महीने प्रदेश सरकार ने कन्वर्जन रोकने के लिए धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 लागू किया था। इसमें धमकी, जबर्दस्ती, झूठ बोलकर और धोखाधड़ी कर शादी के लिए कन्वर्जन कराने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। कुछ केसों में 10 साल की जेल हो सकती है।
मध्य प्रदेश में लंबे समय से साजिश के तहत ऐसी गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के युवक पहचान छिपाकर पहले हिंदू लड़कियों से दोस्ती करते हैं, फिर उनका शारीरिक शोषण, इसके बाद कन्वर्जन करके शादी का दबाव बनाते हैं। एक के बाद एक कई केस सामने आने से प्रदेश सरकार पर ठोस कार्रवाई करने का दबाव बन रहा था। यही कारण था कि दिसंबर 2020 में प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार कैबिनेट में अध्यादेश लेकर आई और 9 जनवरी 2021 को इस कानून को लागू कर दिया गया। मुख्यमंत्री चौहान ने सख्त लहजे में कहा था कि महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। हम किसी भी कीमत पर कन्वर्जन का खेल नहीं चलने देंगे।
ऐसा नहीं है कि लव जिहाद को लेकर केवल मध्य प्रदेश सख्त हो रहा है। यह बीमारी पूरे देश में फैली हुई है। सबसे पहले वामदलों के गढ़ कहे जाने वाले केरल की चर्च ने ईसाई युवतियों को साजिशन फंसाकर कन्वर्जन की बात उठाई थी। चर्च ने यहां तक कहा था कि हमारी युवतियों को आतंकवादी बनाया जा रहा है। चर्च ने केरल सरकार पर लव जिहाद के मामलों को गंभीरता नहीं लेने का आरोप तक लगाया था। उस समय इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने चर्च के आरोपों से इनकार किया था, जबकि विश्व हिंदू परिषद ने केरल में चल रहीं लव जिहाद की गतिविधियों के खिलाफ संघर्ष की बात कही थी।
मध्य प्रदेश से पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार लव जिहाद को लेकर सख्त कानून बना चुकी है। उत्तराखंड में यह कानून लागू हो चुका है। भाजपा शासित हरियाणा और कर्नाटक भी जल्द इस कानून को लागू कर सकते हैं। गैर भाजपा शासित राज्यों जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल में इस कानून को बनाने को लेकर आवाजें उठ रही हैं, लेकिन वोटबैंक की राजनीति के चलते यह कानून यहां लागू हो पाएगा, इस बात पर संशय है। वर्षों से मु​स्लिम युवक लव जिहाद की गतिविधियों में संलिप्त है, लेकिन खुलकर कोई आवाज उठाने को तैयार नहीं होता था। क​थित सेकुलर राजनीतिक दल मौन धारण कर लेते हैं क्योंकि उन्हें अपने वोटबैंक की चिंता रहती है। यही कारण था कि जब उत्तर प्रदेश में जब यह कानून बना तो इन राजनीतिक दलों ने जमकर विरोध किया। हालांकि विरोध के बावजूद वहां भी यह कानून बना। मध्यप्रदेश की तरह ही पर उत्तर प्रदेश के कानपुर में लव जिहाद के कई ऐसे ही मामले सामने आए थे। लोगों में बढ़ते आक्रोश के चलते राज्य सरकारों को सख्त कानून बनाने पड़ रहे हैं। अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड का अनुसरण करते हुए दूसरे राज्य भी लव जिहाद से उत्पन्न हो रहीं परिस्थितियों को समझें और सख्त कानून बनाएं। यदि आज ऐसी गतिविधियों से सख्ती से नहीं निपटा गया तो भविष्य में स्थितियां गंभीर रूप ले सकती हैं।