अमेरिकी हितों की एजेन्ट बनी, भीमा कोरेगांव दंगों के आरोपी वाली वेबसाइट

    दिनांक 13-फ़रवरी-2021   
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प्रवर्तन निदेशालय न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ के रिश्ते एक दूसरी कंपनी सागरिक प्रोसेस एनालिस्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी खंगाल रहा है। इस खुलासे के बाद न्यूज क्लिक की तरफ से न अब तक कोई बयान आया है और न पुरकायस्थ इस संबंध में मीडिया से बात कर रहे हैं

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ऑनलाइन न्यूज पोर्ट्ल ‘न्यूज क्लिक’ पर प्रवर्तन निदेशालय की रेड के बाद लेफ्ट लिबरल मीडिया में बवाल मचना स्वाभाविक था। धोखाधड़ी के जिस मामले की परतें अब धीरे-धीरे उतर रही हैं, उसे अभिव्यक्ति की आजादी के परदे में ढकने की खूब कोशिश हुई, लेकिन पोर्टल को लेकर जिस तरह के खुलासे छापे के बाद हो रहे हैं, उससे तो इस संस्थान के इरादे ही संदिग्ध जान पड़ते हैं।
अब विदेशी पैसों का बड़ा निवेश इस छोटी सी मीडिया कंपनी में दिखाई दे रहा है, इस पर न्यूज क्लिक की तरफ से अब तक कोई सफाई नहीं आई है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया भी जल्दबाजी में 'मीडिया की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ वाला बयान देकर फिलहाल खामोश है। प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े सूत्रों से आने वाली खबर हैरानी भरी है।
दरअसल, ‘न्यूज क्लिक’ पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी खुलाया हुआ कि इस वेबसाइट में अप्रैल 2018 से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से 9.59 करोड़ आए हैं। पैसा अभी भी खाते में है लेकिन न्यूज क्लिक के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ यह नहीं बता पा रहे हैं कि अमेरिका की कंपनी ने उन्हें यह 9.59 करोड़ रुपया क्यों दिया है? न्यूज क्लिक के ट्विटर हैंडल पर और इस संस्थान के जुड़े पत्रकारों के ट्विटर हैंडल पर इसकी सफाई नजर नहीं आ रही है। इस संस्थान से जुड़े एक पत्रकार जो कल तक यह कह रहे थे कि संस्थान के अंदर इतनी सादगी है कि उन्हें चाय पीने के बाद अपना कप खुद धोना पड़ता है। अब 30.51 करोड़ के हेर-फेर में फंसे संस्थान की खबर बाहर आने के बाद उनकी सादगी वाली थ्योरी पर तो पानी फिर गया है।
9.59 करोड़ रुपए की विदेशी निवेश के बाद एक दूसरी अमेरिकी कंपनी से 20.92 करोड़ संस्थान को हासिल हुआ। सूत्रों ने बताया कि न्यूज क्लिक को अमेरिका की एक दूसरी कंपनी ने एक्सपोर्ट आफ सर्विसेज के रूप में 20 करोड़ रुपए दिए। वह भी सिर्फ इस काम के लिए कि न्यूजक्लिक ने पीपुल्स डिस्पैच नाम के एक पोर्टल पर सामग्री को अपलोड किया था। वेबसाइट पर सामग्री अपलोड करने के लिए 20 करोड़ रुपए देश की गरीबी और भुखमरी को बेचने वाले आंदोलनजीवियों को ही हासिल हो सकते हैं।
न्यूज क्लिक की कहानी में यह जानकारी भी दिलचस्प है कि वेबसाइट के मालिक प्रवीर पुरकायस्थ ने 1.5 करोड़ रुपए कार्यालय के खर्चे के नाम पर रख लिए, लेकिन अब पता चला है कि पुरकायस्थ ने यह काम एक नवीं पास इटेक्ट्रीशियन से कराया। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, इस काम का भी कोई भी कागज या बिल पुरकायस्थ ने रखना जरूरी नहीं समझा, लिहाजा इसका कोई साक्ष्य वे प्रवर्तन निदेशालय को नहीं दे पाए।
वेबसाइट के तीन अमेरिकी दानदाताओं जस्टिस एंड एजुकेशन फंड, जी स्पैन और वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग- के कार्यालय का अमेरिका में एक ही पता है। यह पता अमेरिका के राज्य इलिनोइस स्थित लिबर्टी रोड़ 190/ क्रिस्टललेक/ इस्काली एसोसिएटस है। इस्काली एसोसिएटस से इन तीनों दानदाताओं का क्या रिश्ता है यह अभी तक पता नहीं लग पाया है।
कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया का आईटी सेल का काम देखने वाले एक व्यक्ति न्यूज क्लिक में काम करता है। साथ ही साथ वह सीपीआई के नेताओं का ट्विटर अकाउंट भी चलाता है। उसे 52 लाख रुपए एक अमेरिकी कंपनी ने दिए हैं। कमाल की बात यह है कि वह तो न्यूज क्लिक और कम्युनिस्ट पार्टी के लिए कर रहा है लेकिन भुगतान उसे अमेरिका की कंपनी से हो रहा है। अब यह किस तरह की पत्रकारिता है इसे कोई समझ सकता है।
प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार न्यूज क्लिक को जिन अमेरिकी कंपनियों से बड़े पैमाने पर पैसा मिल रहा है उसमें एक सेनाओं के लिए सामान मुहैया कराने वाली कंपनी भी है। जानकारी के अनुसार न्यूज क्लिक की शुरुआत गौतम नवलखा के दिए हुए 20 लाख रुपए से हुई थी। बता दें कि अर्बन नक्सली गौतम नवलखा वर्तमान में जेल में है। वह भीमा कोरेगांव दंगों के मामले में जेल में बंद है।
संदिग्ध खबरों से इस वेबसाइट की पहचान बनी। अब वेबसाइट के झूठ से पर्दा उठ रहा है। विदेशी हितों के लिए काम करने वाली इस वेबसाइट पर चल रही जांच ने देश की जनता को सावधान किया है कि वे ऐसी वेबसाइट की खबरों को पहले परखे फिर विश्वास करें।