राष्ट्रीय रेल योजना -अब सरपट दौड़ेगी गाड़ी

    दिनांक 15-फ़रवरी-2021
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बी. सचिन
 
इस बार रेल बजट में राष्ट्रीय रेल योजना की घोषणा की गई है। इसके तहत महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तय समय में पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। इस योजना का उद्देश्य 2030 तक आर्थिक और व्यापारिक दृष्टि से रेलवे को मजबूती प्रदान कर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है
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वित्त वर्ष 2021-22 के आम बजट में भारतीय रेलवे को सर्वाधिक 2.15 लाख करोड़ रुपये का कुल पूंजीगत व्यय आवंटित किया गया है। यह पिछले साल की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। इसमें 1,07,300 करोड़ रुपये की सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) शामिल है। इसके अलावा सरकार ने 2030 के लिए राष्ट्रीय रेल योजना की घोषणा की है, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करेगी। इसमें समर्पित मालवहन गलियारों (डीएफसी) के विकास एवं पटरियों के विद्युतीकरण पर जोर दिया गया है।
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘‘आम बजट-2021 भारतीय रेलवे के लिए ऐतिहासिक है। बजट में रेलवे की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सबसे बड़ा पूंजीगत व्यय न केवल अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि रेलवे को आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जाने में उत्प्रेरक का काम करेगा। 2023 तक भारतीय रेलवे 100 प्रतिशत विद्युतीकृत और 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला नेटवर्क हो जाएगा। साथ ही, रेलवे आधुनिकीकरण, आसान टिकट बुकिंग, आॅनलाइन माल ढुलाई सेवाओं जैसी बड़ी योजनाओं की ओर बढ़ रहा है। इस प्रकार, भारतीय रेलवे ‘फ्यूचर रेडी’ नेटवर्क बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है।’’
काया पलटने वाला बजट
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनीत शर्मा के अनुसार, यह बजट बिल्कुल अलग, लीक से हटकर और भविष्योन्मुखी है। रेलवे को पहली बार इतना बड़ा आवंटन किया गया है। यह रेलवे का कायापलट करने वाला बजट है। इसमें रेल सुविधाओं के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है। 2020-21 में रेलवे को कुल पूंजीगत व्यय 1,61,42 करोड़ रुपये आवंटित किया गया था, जिसमें 70,250 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता, 7,500 करोड़ रुपये आंतरिक स्रोतों तथा 83,292 करोड़ रु. बजटेत्तर स्रोतों से आय शामिल थी। इस बार कुल पूंजीगत व्यय 2,15,058 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। बीते वर्ष के मुकाबले इस बार बजटीय सहायता 37,050 करोड़ रुपये अधिक है। कोरोना महामारी के बावजूद भारतीय रेलवे की आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए की जा रही प्रगति का उल्लेखनीय संकेत है।
शर्मा ने कहा कि नए बजट में क्षमता वृद्धि की मद में नए रेल मार्गों के लिए अब तक की सर्वाधिक राशि 40,932 करोड़ रुपये आवंटित की गई है। समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में यह राशि 26,779 करोड़ रुपये व वित्त वर्ष 2019-20 में 26,971 करोड़ रुपये थी। इसी प्रकार, रेल मार्गों के दोहरीकरण/ तिहरीकरण के लिए 26,116 करोड़ रुपये का प्रावधान है। 2020-21 में यह आंकड़ा 22,231 करोड़ रुपये तथा 2019-20 में 21,545 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, यातायात सुविधाएं विकसित करने के लिए 5,263 करोड़ रुपये, उपरिगामी सेतु या अंडरपास के लिए 7,122 करोड़ रुपये तथा रेल उपक्रमों में निवेश के लिए 37,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यानी इन मदों में क्रमश: 108 प्रतिशत, 13 प्रतिशत एवं 138 प्रतिशत वृद्धि की गई है। रेल उपक्रमों में 14,000 करोड़ रुपये हाईस्पीड रेल निगम तथा 16,086 करोड़ रुपये भारतीय समर्पित मालवहन गलियारा निगम लिमिटेड को दिए जाएंगे। वहीं, 12,985 करोड़ रुपये जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर-पूर्व की परियोजनाओं के लिए दिए गए हैं। शर्मा के अनुसार समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में परिचालन अनुपात 96.96 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में परिचालन अनुपात 96.15 प्रतिशत तक रखने का लक्ष्य है। बजट के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में यात्री एवं अन्य माध्यमों से 67,500 करोड़ रुपये आय का अनुमान था, जिसे पुनरीक्षित अनुमान में 16,500 करोड़ तय किया गया था। नए बजट में यह लक्ष्य 67,200 करोड़ रुपये रखा गया है। इसी प्रकार मालवहन से 1,37,810 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।
किसान रेल सेवा
कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण यात्री सेवाएं बंद होने के बाद रेलवे ने पार्सल एवं मालवहन सेवाओं पर ध्यान दिया। बीते एक साल में रेलवे ने पटरी एवं अन्य आवश्यक अनुरक्षण तथा उन्नयन कार्यों को तेजी से पूरा किया और स्वर्णिम चतुर्भुज व स्वर्णिम कोणीय (जीक्यू-जीडी) मार्ग में 1,612 किलोमीटर में से 1,280 किमी. लंबे मार्ग पर अधिकतम गति बढ़ाकर 130 किमी. प्रति घंटा कर ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की। अगले चरण में जीक्यू-जीडी मार्ग पर गति सीमा 160 किमी प्रति घंटा तक करने का लक्ष्य है, जिसे 2025-26 तक पूरा किया जाएगा।
भारतीय रेलवे ने कृषि मंत्रालय, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ अब तक 18 मार्गों पर किसान रेल का संचालन शुरू किया है। पहली किसान रेल सेवा को 7 अगस्त, 2020 को देवलाली (महाराष्ट्र) और दानापुर (बिहार) के बीच हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। 22 जनवरी, 2021 तक 157 किसान रेल सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं, जो 49,000 टन से अधिक माल ढुलाई कर रही हैं। किसान रेल को तय समय-सारिणी के अनुसार संचालित किया जाता है। इनके मार्ग में बाधा न आए या देरी न हो, इसके लिए इस पर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
मालवहन गलियारे पर जोर
इस बार बजट में रेलवे की दुधारू गाय मानी जाने वाली मालगाड़ियों के लिए निर्माणाधीन समर्पित मालवहन गलियारा (डीएफसी) पर विशेष ध्यान दिया गया है। पहले चरण में भारतीय समर्पित मालवहन गलियारा निगम लि. (डीएफसीसीआईएल) 1,504 किमी. लंबे पश्चिमी डीएफसी और पूर्वी डीएफसी (सोननगर-दनकुनी खंड के पीपीपी खंड सहित 1,856 किमी. मार्ग) का निर्माण कर रहा है। ईडीएफसी लुधियाना के पास साहनेवाल से शुरू हो रहा है, जो पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से होकर गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के दनकुनी में समाप्त होगा। पश्चिमी कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (जेएनपीटी) मुंबई को जोड़ेगा। यह 2,800 किमी लंबा गलियारा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरेगा। इसे भारत के आर्थिक विकास में ‘गेम चेंजर’ के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल, करीब 650 किमी के दो खंडों पर परिचालन शुरू हो गया है, जिस पर मालगाड़ियों की औसत गति 90 किमी प्रति घंटा है, जो राजधानी एक्सप्रेस की औसत गति से अधिक है। पूर्वी एवं पश्चिमी डीएफसी को जून 2022 तक परिचालन के लिए खोलने का लक्ष्य है। डीएफसी का काम शीघ्र पूरा करने व अन्य तीन डीएफसी के निर्माण के लिए बजट में डीएफसीसीआईएल को 16,086 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
नए वित्त वर्ष में पूर्वी डीएफसी के 263.7 किमी लंबे सोननगर-गोमोह खंड को सार्वजनिक निजी साझीदारी से शुरू किया जाएगा, जबकि गोमोह-दानकुनी के 274.3 किमी खंड पर भी जल्दी काम शुरू किया जाएगा। रेलवे की योजना भविष्य के लिए कई अन्य डीएफसी बनाने की है। इनमें से पूर्वी तटीय डीएफसी खड़गपुर से विजयवाड़ा तक, पूर्वी-पश्चिमी डीएफसी भुसावल से खड़गपुर होते हुए दानकुनी तक जाएगा तथा उत्तरी-दक्षिणी डीएफसी इटारसी से विजयवाड़ा तक होगा।
रेल नेटवर्क और सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान
रेल मंत्री के अनुसार, जब डीएफसी पर परिचालन शुरू जाएगा और डीएफसीसीआईएल को शुद्ध लाभ होने लगेगा तब सार्वजनिक सूचीकरण व क्रमिक विनिवेश द्वारा परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। सरकार की योजना डीएफसी का मुद्रीकरण तथा इसके माध्यम से बाजार से पैसा जुटा कर जनता को अधिक से अधिक रेल सुविधाएं देने की है। उन्होंने कहा कि रेलवे से इतर डीएफसी का निर्माण जापान एवं विश्व बैंक के वित्तपोषण से किया जा रहा है। रेल मंत्रालय का एक अलग उपक्रम इसे बना रहा है। यदि यह रेलवे का हिस्सा होता तो ऋण का बोझ रेलवे पर आता। डीएफसी के पूर्ण होने एवं लाभार्जन की स्थिति में आने के बाद भविष्य में इसका मुद्रीकरण किया जा सकता है। इससे रेलवे पर वित्तीय भार नहीं पड़ेगा और ऋण का बोझ कोई और ले लेगा। इससे प्राप्त होने वाले राजस्व से रेलवे के यात्री नेटवर्क एवं जनता की सुविधाएं बढ़ाने के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। पूरी योजना इस प्रकार से बनाई जा रही है, जिससे जनता की सेवा अधिक से अधिक हो सके। रेलवे राष्ट्र की धरोहर है और जनता की संपत्ति है। यह सदैव भारत का गौरव और जनता की शान रहेगा।
रेलवे के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, इस बारे में एक योजना नीति आयोग के साथ मिल कर तैयार की जा रही है। डीएफसी के मुद्रीकरण की रूपरेखा को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हालांकि अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि डीएफसी के मुद्रीकरण से भारी-भरकम राशि मिलने की उम्मीद है, जिसे अन्य डीएफसी बनाने एवं अन्य परियोजनाओं में खर्च किया जाएगा।
2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन
रेल मंत्री के अनुसार, 2023 तक ब्रॉड गेज लाइनों का पूरी तरह विद्युतीकरण करने का लक्ष्य है। इस साल के अंत तक 46,000 किमी मार्ग का विद्युतीकरण पूरा हो जाएगा यानी रेल मार्गों के विद्युतीकरण का 72 प्रतिशत काम हो जाएगा। बकौल रेल मंत्री राष्ट्रीय रेल योजना के अनुसार, 2030 तक भारतीय रेलवे शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला रेल नेटवर्क हो जाएगा। इस लक्ष्य को पाने वाला यह दुनिया का पहली रेलवे होगी। इस बार बजट में यात्री सुविधाओं एवं संरक्षा पर जोर देते हुए नए 3 टियर वातानुकूलित डिब्बों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इन डिब्बों को अधिक आरामदेह बनाया गया है, जिसमें सीटें भी अधिक होंगी। इसी तरह, पर्यटन वाले मार्गों पर नए एलएचबी विस्टाडोम कोच उतारने की योजना पर जोर दिया गया है। साथ ही, उच्च सघनता वाले मार्गों पर स्वचालित संरक्षा प्रणाली ‘टी-कैस’ लगाने का निर्णय लिया गया है।
बुनियादी ढांचा और नेटवर्क
रेल के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने और नेटवर्क तैयार करने के लिए रेलवे ने देश के विभिन्न जोन में 56 परियोजनाओं की पहचान की है, जिन्हें फरवरी-मार्च 2021 और वित्त वर्ष 2021-22 तक पूरा किया जाएगा। कुल मिलाकर बीते वर्ष के मुकाबले इस बार यातायात सुविधाओं के लिए 156 प्रतिशत अधिक राशि आवंटित की गई है, जबकि नए मार्गों के लिए निर्धारित राशि में 52 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इन प्रमुख परियोजनाओं के अलावा जनता की सुविधा के लिए रेलवे इस वर्ष 1200 से अधिक आरओबी, आरयूबी और सब-वे निर्माण पूरा करेगा। ये आरओबी/आरयूबी शहरों और अन्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान में देश में आरओबी/आरयूबी की कुल संख्या 14,000 है। वार्षिक योजना 2021-22 का जोर बुनियादी ढांचे के विकास, निर्माण वृद्धि, टर्मिनल सुविधाओं के विकास, ट्रेनों की गति बढ़ाने, सिग्नल प्रणाली, यात्रियों/ उपयोगकर्ताओं की सुविधाओं में सुधार, सड़क के ऊपर/नीचे बनने वाले पुलों के सुरक्षित कार्यों आदि पर है। रेल मंत्री ने कहा कि अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद ही सामान्य रेल सेवाओं पर निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए कोविड-19 की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल विभिन्न माध्यमों से यात्री एवं अन्य ग्राहकों के लिए सुविधाएं जुटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिल्ली व मुंबई के रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए सरकार के पास 5000-6000 करोड़ रुपये नहीं हैं। लेकिन ‘क्रॉस सब्सिडी मॉडल’ पर वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन परिसर को संपूर्ण एवं एकीकृत परिवहन हब के रूप में विकसित करेगी, जहां हर प्रकार के परिवहन की सुविधा होगी। इस मॉडल के तहत रेलवे अपनी जमीन या संपत्ति किसी को नहीं देगा, बल्कि लाइसेंस के जरिए उन्हें संपत्ति के उपयोग की अनुमति दी जाएगी। संपत्ति रेलवे की ही रहेगी। इससे उस क्षेत्र का कायाकल्प हो जाएगा। इस क्षेत्र में बड़े टॉवर बनाए जाएंगे और उससे होने वाली आय से स्टेशन का विकास किया जाएगा।
रेलवे प्रबंधन का मंत्र
रेल मंत्री का कहना है कि भारतीय रेलवे का प्रबंधन मंत्र प्राथमिकता तय करना, संसाधनों का आवंटन और उन्हें शीघ्र पूर्णता प्रदान करना है। बजट में नई परियोजनाओं की घोषणा करने की बजाए परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। रेलवे ने वर्तमान में चल रही 513 परियोजनाओं में से एचडीएन/एचयूएन मार्गों पर क्षमता वृद्धि परियोजनाओं में अति जोखिम एवं जोखिम परियोजनाओं, मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं, कनेक्टिविटी परियोजनाओं एवं राष्ट्रीय परियोजनाओं की पहचान की है। अगले 4 वर्षों के लिए धन आवंटन और लक्ष्य की योजना बनाई गई है। सभी अति जोखिम परियोजनाएं मार्च 2022 तक, जबकि अन्य मार्च 2024 तक पूरी हो जाएंगी।
अर्थव्यवस्था का इंजन बनेगा रेलवे
सरकार और विशेषज्ञों को आशा है कि पूंजीगत व्यय में इस वृद्धि के साथ भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति का इंजन बनेगा। वार्षिक योजना 2021-22 का जोर बुनियादी ढांचे के विकास पर है, जिसमें वृद्धि, टर्मिनल सुविधाओं का विकास, रेलगाड़ियों की गति बढ़ाने, सिग्नल प्रणाली, यात्रियों/ उपयोगकर्ताओं की सुविधाओं में सुधार, पुलों के ऊपर या नीचे सड़क सुरक्षा कार्य आदि शामिल हैं। यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के क्रम में भारतीय रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों के लिए स्वदेशी कंपनी मेधा सर्वो ड्राइव्स लिमिटेड को 22,11,64,59,644 रुपये की निविदा दी है। इसके तहत ट्रेन के डिजाइन, विकास, निर्माण, आपूर्ति, एकीकरण, परीक्षण और आईजीबीटी आधारित 3-चरण प्रणोदन, नियंत्रण तथा 16 कारों के लिए प्रत्येक में 44 रैक का निर्माण किया जाएगा। इनका निर्माण रेलवे की तीन उत्पादन इकाइयों में किया जाएगा। इसके तहत आईसीएफ में 24 रैक, आरसीएफ में 10 रैक और एमसीएफ में 10 रैक बनाए जाएंगे। इनकी आपूर्ति तय समय में होगी। पहले 2 प्रोटोटाइप रैक 20 महीने में मिल जाएंगे, उसके बाद इनकी सफलता को देखते हुए रेलवे को हर तिमाही में औसतन 6 रैक देने होंगे। साथ ही, इनके रख-रखाव के लिए कंपनी के साथ 5 साल का अनुबंध भी होगा। पहली बार, निविदा में कुल मूल्य के 75 प्रतिशत के बराबर जरूरत स्थानीय स्तर से पूरी की जाएंगी। इस पहल से ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ल्ल
क्या है राष्ट्रीय रेल योजना?
भारतीय रेल ने 2030 तक अपनी क्षमता संबंधी कमियों को दूर करने तथा माल ढुलाई परितंत्र में औसत भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘राष्ट्रीय रेल योजना’ बनाई है। इस दीर्घकालिक योजना का उद्देश्य रेलवे की नेटवर्क क्षमता, सुविधाएं तथा व्यापार में औसत हिस्सेदारी बढ़ाना है। इस योजना के तहत महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे की योजना 2030 तक मांग से अधिक क्षमता विकसित करने की है, जो 2050 तक की जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगी। साथ ही, योजना का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन घटाने और 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की औसत हिस्सेदारी को मौजूदा 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 करना है। इसके अलावा, मालगाड़ियों की औसत गति को मौजूदा 22 किमी प्रति घंटा से बढ़ाकर 50 किमी प्रति घंटा कर माल ढुलाई में लगने वाले समय को कम करना है। यानी रेल परिवहन की कुल लागत को लगभग 30 प्रतिशत कम कर उससे होने वाले लाभ को ग्राहकों को हस्तांतरित करना है।