एक हजार वर्ष बाद मिला महाराजा सुहेलदेव को सम्मान

    दिनांक 17-फ़रवरी-2021
Total Views |
इतिहासकारों ने महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम को नजर अंदाज किया मगर लोक गाथाओँ के माध्यम से उनका शौर्य एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुचंता रहा. उनकी जयंती पर प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल संबोधन किया. इस अवसर पर बहराइच में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहे
 
suheldev _1  H
एक हजार वर्ष बाद महाराजा सुहेलदेव को उनकी जयंती के अवसर पर सम्मानपूर्वक याद किया गया. वसंत पंचमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य स्मारक का वर्चुअल शिलान्यास किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे बहराइच में महाराजा सुहेलदेव के भव्य स्मारक के शिलान्यास का सौभाग्य मिला है. महाराजा सुहेलदेव को इतिहास में वो स्थान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे. देश का इतिहास वो नहीं है जो भारत को गुलाम बनाने वाले और गुलामी की मानसिकता रखने वाले लोगों ने लिखा है. इतिहास वो है जो लोककथाओं के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होता है. सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस और डॉ. भीमराव आंबेडकर को भी ऐसे लोगों ने ही उचित सम्मान नहीं दिया. हमारी कोशिश है कि हम देश के इन महापुरुषों का सम्मान करें. हमारे राष्‍ट्र नायकों के साथ इतिहास लिखने वालों ने जो अन्याय किया उसे आज का भारत सुधार रहा है. भव्य स्मारक और ऐतिहासिक चित्तौरा झील का विकास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा. बीते कुछ वर्षों में देश भर में इतिहास, आस्था, अध्यात्म, संस्कृति से जुड़े जितने भी स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनका बहुत बड़ा लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देने का भी है. उत्तर प्रदेश पर्यटन व तीर्थाटन दोनों के मामले में समृद्ध है. यहां इसके विस्‍तार की क्षमताएं भी अपार हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व ने कोरोना को फैलने से रोक लिया. कृषि कानूनों को लेकर कुछ लोग किसानों में केवल भ्रम फैला रहे हैं जिन्‍होंने किसानों की जमीन छीन ली वो नहीं चाहते कि किसानों की आय बढ़ जाए और वो पूरी तरह आत्‍म निर्भर बन जाएं.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल मंत्र के साथ प्रदेश वासियों को सुविधायें दी जा रही हैं. सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने महाराजा सुहेलदेव को लेकर कई कदम उठाए हैं. फरवरी 2016 में तत्कालीन भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने भारत-नेपाल सीमा के पास बहराइच जिले में महाराज सुहेलदेव की एक प्रतिमा का अनावरण किया. उन पर एक पुस्तक का लोकार्पण किया था. इससे पहले केंद्र सरकार ने महाराजा सुहेलदेव की याद में एक विशेष टिकट जारी करने के साथ एक सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन सुहेलदेव एक्सप्रेस भी चलाई. यह ट्रेन पूर्वांचल के गाजीपुर से लेकर दिल्ली के आनंद विहार तक चलाई गई. आज से करीब 4 वर्ष पहले बहराइच में इस क्षेत्र की आरोग्‍यता के लिए पीएम मोदी द्वारा एक मेडिकल कॉलेज दिया गया था. अब वह बनकर तैयार हो गया है. मेडिकल कालेज का नाम महाराज सुहेल देव के नाम पर ही रखा गया है.
ऐसे थे महाराजा सुहेलदेव
यूपी की धरती आदिकाल से ही अध्यात्म, संकृति और शौर्य से संपन्न रही है. यहां अवतारों के साथ साथ ऋषियों, योगियों और तपस्वियों ने देश-दुनिया को भारत के गौरव से परिचित कराया. इन्ही वीरों में एक नाम महाराजा सुहेलदेव का है. महान संत बालार्क ऋषि के शिष्य और श्रावस्ती के राजा महाराज सुहेलदेव ने अपने शौर्य और पराक्रम के साथ थारु बंजारा सहित अनेक जाति समूहों और राजाओं का समूह बनाकर कौडियाला नदी के तट पर चित्तौरा के युद्ध में 15 जून 1033 को विदेशी आक्रान्ता महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी एवं उसकी सेना का संहार किया. इतिहासकारों ने सुहेलदेव के पराक्रम और उनकी अन्य शौर्य को अनदेखा कर दिया मगर स्थानीय लोकगीतों की परंपरा में महाराजा सुहेलदेव की वीरगाथा लोगों को रोमांचित करती रही है. यूपी की पावन भूमि पर लिखे जाने वाले गौरवशाली इतिहास में महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम और शौर्य की गाथा भारतीय जनमानस को प्रेरित करती रही है. एक पराक्रमी राजा होने के साथ सुहेलदेव संतों को बेहद सम्मान देते थे. वह गोरक्षक और हिंदुत्व के भी रक्षक थे.