कश्मीर की खोई संस्कृति को स्थापित करने की कवायद, श्रीनगर के 30 मंदिरों का होगा जीर्णोद्धार

    दिनांक 17-फ़रवरी-2021
Total Views |
एक तरफ भारतीय सेना कश्मीर घाटी में अलगाववाद—आतंक की कमर तोड़ने में लगी हुई है तो दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन कश्मीर की खोई संस्कृति को फिर से स्थापित करने की कवायद में जुट चुका है। खबरों की मानें तो जल्द ही प्रशासन द्वारा श्रीनगर में 30 मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने और उन्हें धार्मिक पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की योजना है।
kaashmir_1  H x 
एक तरफ भारतीय सेना कश्मीर घाटी में अलगाववाद—आतंक की कमर तोड़ने में लगी हुई है तो दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन कश्मीर की खोई संस्कृति को फिर से स्थापित करने की कवायद में जुट चुका है। खबरों की मानें तो जल्द ही प्रशासन द्वारा श्रीनगर में 30 मंदिरों का जीर्णोद्धार कराने और उन्हें धार्मिक पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की योजना है।
इसी क्रम में बीते मंगलवार को वसंत पंचमी के दिन श्रीनगर के हब्बाकदल इलाके में स्थित प्राचीन शीतलनाथ मंदिर को 31 सालों के बाद खोला गया। 1990 के बाद इस वसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर की घंटियां फिर गूंज उठीं। बता दें कि बीते मंगलवार को मंदिर परिसर में हवन करने के साथ ही मंदिर को दोबारा खोला गया है। जानकारी के मुताबिक इस मंदिर में वसंत पंचमी के दिन एक भव्य हवन का आयोजन किया जाता था, इसीलिए मंदिर को खोलने के लिए वसंत पंचमी का ही दिन चुना गया। भक्तों ने पुरानी परंपरा के साथ मंदिर परिसर में पूजा अर्चना और हवन किया। यह मंदिर कश्मीरी हिन्दुओं के लिए पौराणिक, धार्मिक व सांस्कृतिक रूप से बड़ी महत्ता रखता है। इसके साथ ही 1990 से पूर्व कश्मीर में कई राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों की रणनीति इसी मंदिर प्रांगण में बनी। लेकिन 1990 में घाटी में हुए कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार और पलायन के बाद यह मंदिर भी पूरी तरह वीरान हो गया।
उल्लेखनीय है कि 1990 के समय घाटी से कश्मीरी हिंदुओं के पलायन के बाद हजारों ऐसे मंदिर थे, जिन पर ताले लग गये थे। लेकिन केंद्र सरकार के प्रयासों से पिछले कुछ समय से धीरे-धीरे इन मंदिरों को फिर से खोला जा रहा है। बता दें कि शीतलनाथ मंदिर का वर्णन नीलमत पुराण में भी मिलता है। शीतलनाथ मंदिर को कश्मीरी हिन्दुओं की आस्था, अस्मिता और गौरवशाली अतीत का प्रतीक माना जाता है। 31 साल बाद दोबारा मंदिर खुलने पर कश्मीरी हिंदुओं में खुशी की लहर है।