दुनिया में बजा भारतीय धाक का डंका, 24 देशों को भारत ने मुफ्त में दिया कोरोना का टीका

    दिनांक 17-फ़रवरी-2021
Total Views |
पाञ्चजन्य डेस्क
भारत अब तक कोरोना वैक्सीन का 87 लाख डोज दुनिया के विभिन्न देशों को मुफ्त में उपलब्ध करवा चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अब तक दुनिया के 24 देशों से घरेलू कोविड-19 वैक्सीन की मांग आ चुकी है।
modiji_1  H x W 
वैश्विक त्रासदी कोरोना महामारी से दुनिया का दूसरा सर्वाधिक प्रभावित राष्ट्र भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और उनके दूरदर्शी फैसले से न केवल आपात संकट से जल्द उबरने में सफल हो गया, बल्कि अब घरेलू वैक्सीन की मदद से वह पूरी दुनिया को कोरोना से सुरक्षित करने में अह्म योगदान निभा रहा है। यही कारण है कि कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों और विश्व के कल्याण के लिए किए जा रहे उसके योगदानों की प्रसंशा विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र भी कर चुका है।
भारत अब तक कोरोना वैक्सीन का 87 लाख डोज दुनिया के विभिन्न देशों को मुफ्त में उपलब्ध करवा चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अब तक दुनिया के 24 देशों से घरेलू कोविड-19 वैक्सीन की मांग आ चुकी है। लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्द्धन ने बताया कि भारत द्वारा अब तक दुनिया के 24 देशों को कोविड-19 के टीके भेजे गए हैं।
भारत से मुफ्त वैक्सीन पाने वाले देशों में अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, बहरीन, मिस्र, म्यांमार, मंगोलिया, मालदीव, नेपाल, भूटान, निकारागुआ, ओमान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। हालांकि सबसे पहले वैक्सीन पाने वाले देशों में भूटान, मालदीव, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश और सेशेल्स शामिल हैं।
फिलहाल, भारत में अभी दो घरेलू वैक्सीन को मंजूरी मिली है। इनमें एक है कोविशील्ड (ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका) और दूसरी है कोवैक्सीन। (भारत बायोटेक) घरेलू वैक्सीन कोविशील्ड को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया बना रही है, जो देश की ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक कंपनी हैं। सीरम अकेले पूरी दुनिया की जरूरत की 60 फीसदी वैक्सीन का उत्पादन करती है। सीरम अभी हर महीने 6 करोड़ से 7 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन कर रही है।
वहीं, कोवैक्सीन बनाने वाली भारत बायोटेक साल में 20 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन कर सकती हैं। अभी भारत बायोटेक के पास कोवैक्सीन के कुल 2 करोड़ डोज़ मौजूद हैं। माना जा रहा है कि दिसंबर 2021 तक भारत के पास खुद की बनाई हुई करीब 8 और नई कोरोना वैक्‍सीन आने वाली हैं, जिससे भारत कोरोना वैक्सीन के मामले में आत्मनिर्भर ही नहीं, पूरे विश्व को वैक्सीन आपूर्ति करने वाला शीर्ष राष्ट्र बनकर उभरेगा।
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबबिक भारत की दोनों कोविड वैक्‍सीन की पूरे विश्‍व में मांग हैं, जिसकी वजह भारत का नियामक वैक्‍सीन की गुणवत्ता के मामले में बहुत ऊंचा है। कोविशील्ड वैक्सीन दुनिया की अन्य वैक्सीन की तुलना में सर्वाधिक प्रभावशाली हैं। यही कारण है कि सीरम द्वारा बनाए ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनका कोरोना वैक्सीन को डब्ल्यूएचओ ने भी आपातकाल इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है।
उल्लेखनीय है गत 15 फरवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के दोनों वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की अनुमति दी है। आपात इस्तेमाल के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा मंजूर की गई दोनों वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने बनाए हैं। डब्लयूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडहानॉम द्वारा दोनों वैक्सीन के इस्तेमाल को हरी झंडी देने के साथ अब कोवैक्स प्रोग्राम के तहत दुनिया के कई देशों में कोविशील्ड वैक्सीन भेजने का रास्ता खुल गया है। इसका लाभ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को भी मिलेगा। दरअसल द्वारा सीरम कंपनी उत्पादित आधे वैक्सीन की खुराक भारत को देती है और शेष आधा कोवैक्स को देती है।
दरअसल, कोवैक्स प्रोग्राम के तहत दुनिया के गरीब देशों को डब्ल्यूएचओ के द्वारा वैक्सीन पहुंचाई जाती है। पाकिस्तान की हालत दुनिया को पता है, जो पैसों की कमी चलते की चलते अब तक वैक्सीन खरीदने में नाकाम रहा है। अपनी नापाक हरकतों से पाकिस्तान ने भारत के साथ रिश्ते पहले ही खराब कर रखे हैं, लेकिन अब डब्ल्यूएचओ द्वारा कोविशील्ड के आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने के बाद कोवैक्स प्रोग्राम के तहत अब उसे 1.70 करोड़ भारतीय वैक्सीन खैरात में मिलने का रास्ता साफ हो गया है।