सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI रंजन गोगोई के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न केस बंद किया

    दिनांक 18-फ़रवरी-2021
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पाञ्चजन्य डेस्क
सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। यह महिला 2018 में जस्टिस गोगोई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पदस्थ थी। महिला का दावा था कि बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया था। महिला ने अपने हलफनामे की कॉपी 22 जजों को भेजी थी। अप्रैल 2019 में मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी।
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अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को बंद कर दिया। स्वत: संज्ञान पर शुरू की गई कथित यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई बंद करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले पर पूर्व जस्टिस एके पटनायक की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और उनकी रिपोर्ट के आधार पर यह केस बंद किया जा रहा है। पूर्व जस्टिस एकके पटनायक को मामले में साजिश की जांच करने का काम सौंपा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस को दो साल बीत चुके हैं, ऐसे में साजिश की जांच के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड हासिल करने की संभावना बहुत कम रह गई है। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। दरअसल, जस्टिस गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहते हुए कुछ कड़े फैसले किए जो साजिश को बल देते हैं। रिपोर्ट में एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के इनपुट का हवाला भी है। इसमें बताया गया है कि असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को आगे बढ़ाने की वजह से कई लोग जस्टिस गोगोई से नाखुश थे। सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने जस्टिस गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों के पीछे साजिश होने का दावा किया था।
गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। यह महिला 2018 में जस्टिस गोगोई के आवास पर बतौर जूनियर कोर्ट असिस्टेंट पदस्थ थी। महिला का दावा था कि बाद में उसे नौकरी से हटा दिया गया था। महिला ने अपने हलफनामे की कॉपी 22 जजों को भेजी थी। इसी आधार पर चार वेब पोर्टल्स ने चीफ जस्टिस के बारे में खबर प्रकाशित की। अप्रैल 2019 में मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी। इस मामले की अंतिम सुनवाई 25 अप्रैल 2019 को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने की थी।
स्वत: संज्ञान से शुरू की गई जांच प्रक्रिया बंद करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति गोगोई के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न मामले की अंदरूनी जांच पहले ही पूरी की जा चुकी है और न्यायमूर्ति एसए बोबड़े (सीजेआई) की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पैनल ने उन्हें दोष मुक्त करार दिया था। पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि पूर्व न्यायमूर्ति एके पटनायक पैनल षडयंत्र की जांच करने के लिए व्हाट्सऐप मैसेज जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्राप्त नहीं कर सका है इसलिए स्वत: संज्ञान से शुरू किए गए मामले से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।