पाकिस्तान पर कर्ज का बढ़ता बोझ ?

    दिनांक 02-फ़रवरी-2021
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पाञ्चजन्य ब्यूरो

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है और वह किसी भी समय दिवालिया घोषित हो सकता है। इमरान खान सत्ता में आए तो थे ‘नया पाकिस्तान’ बनाने का सपना दिखाकर, लेकिन देश को कर्ज के दलदल में धकेल रहे हैं। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी इमरान सरकार को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक सहित तमाम वैश्विक निकायों से आर्थिक मदद की गुहार लगा रही है।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है और वह किसी भी समय दिवालिया घोषित हो सकता है। इमरान खान सत्ता में आए तो थे ‘नया पाकिस्तान’ बनाने का सपना दिखाकर, लेकिन देश को कर्ज के दलदल में धकेल रहे हैं। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी इमरान सरकार को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक सहित तमाम वैश्विक निकायों से आर्थिक मदद की गुहार लगा रही है। कोविड-19 के कारण भी अर्थव्यवस्था को तगड़ा आर्थिक झटका लगा है। इस कारण इमरान खान ने कुछ समय पहले ही जी-20 देशों से कर्ज में रियायत की मांग की थी। वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुजारिश कर चुके हैं कि कोविड-19 के खत्म होने तक कम आय वाले व महामारी से सबसे अधिक प्रभावित देशों के लिए कर्ज अदायगी निलंबित की जाए तथा अल्प विकसित देशों की देनदारी को निरस्त किया जाए।

उधर, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में फौज की मिलीभगत से चीनी कंपनियों के भ्रष्टाचार के कारण इसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है। पहले यह परियोजना करीब 46 अरब डॉलर की थी, जो बढ़कर 87 अरब डॉलर की हो गई है। सऊदी अरब और यूएई ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज दिया था, जिसे अब वे वापस मांग रहे हैं। पुराने कर्ज चुकाने के लिए इमरान चीन से ताबड़तोड़ कर्ज ले रहे हैं। आलम यह है कि इमरान को अपने पूर्वजों की निशानी भी गिरवी रखनी पड़ रही है। इमरान सरकार राजधानी इस्लामाबाद के सबसे बड़े पार्क ‘फातिमा जिन्ना पार्क’ को गिरवी रखने पर विचार कर रही है। इससे उसे 500 अरब डॉलर का कर्ज मिलेगा। 759 एकड़ में फैला यह पार्क पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की बहन के नाम पर है। इसके अलावा, अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए पाकिस्तान ने विदेशों से 1.2 अरब डॉलर का कर्ज लिया है, जिसमें वाणिज्यिक बैंकों से महंगे ब्याज पर ली गई 434 मिलियन डॉलर की राशि भी शामिल है। पाकिस्तान चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 5.7 अरब डॉलर का कर्ज ले चुका है।

चीन का उपनिवेश!

सीपीईसी परियोजना के दूसरे चरण के तहत पाकिस्तान ने पेशावर से कराची तक 1,872 किमी लंबे रेल मार्ग के दोहरीकरण और पटरियों की मरम्मत के लिए चीन से 6 अरब डॉलर का कर्ज मांगा था। लेकिन जी-20 के समक्ष इमरान के गिड़गिड़ाने के कारण चीन उसे कर्ज देने में संकोच कर रहा है। इसके लिए उसने पाकिस्तान से अतिरिक्त गारंटी मांगी है। साथ ही, यह राशि वाणिज्यिक और रियायती, दो हिस्सों में देने की पेशकश की है। इस कर्ज की एवज में चीन उससे भारी-भरकम ब्याज लेगा। इससे पहले चीन ने सऊदी अरब का कर्ज चुकाने के लिए इमरान सरकार को एक अरब डॉलर का कर्ज दिया था। पाकिस्तान पर सऊदी अरब का तीन अरब डॉलर का कर्ज था। सऊदी ने शेष दो अरब डॉलर 2020 के अंत में चुकाने को कहा था। इसके बाद इमरान ने फिर से चीन से आगे हाथ फैलाया तो चीन ने 1.5 अरब डॉलर देने के लिए हामी भर दी, लेकिन शेष राशि की व्यवस्था पाकिस्तान को ही करनी थी। कश्मीर में पाकिस्तान की हरकतों से नाराज सऊदी अरब ने अक्तूबर 2018 में पाकिस्तान को जो आर्थिक पैकेज दिया था, उसे जुलाई 2020 में वापस मांग लिया। सऊदी ने पाकिस्तान को तीन साल के लिए 6.2 अरब डॉलर का कर्ज दिया था, जिसमें 3.3 प्रतिशत ब्याज पर 3 अरब डॉलर की नकद सहायता शामिल थी। शेष राशि तेल और गैस के रूप में दी जानी थी। राहत पैकेज की मियाद 2021 में पूरी होनी थी, लेकिन पाकिस्तान की हरकतों के कारण उसने 2020 में इसे रोक दिया। इसी वजह से पाकिस्तान के लोग और विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि कहीं उनका देश चीन का उपनिवेश न बन जाए। 2020 के आखिर तक पाकिस्तान पर सालाना 11.5 प्रतिशत की दर से कुल कर्ज बढ़कर 35.8 खरब रुपये तक पहुंच गया है। लेकिन इमरान सरकार इसके लिए पूर्ववर्ती सरकारों की आर्थिक नीतियों को दोषी ठहरा रही है।

कर्ज वसूली रोकने के लिए गिड़गिड़ा रहे इमरान
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का सार्वजनिक कर्ज बढ़कर जीडीपी का 90 प्रतिशत (37,500 अरब रुपये) होने का अनुमान है। पाकिस्तान केवल 2020 में ही कर्ज चुकाने पर 2,800 अरब रुपये खर्च करेगा जो संघीय राजस्व बोर्ड के अनुमानित कर संग्रह का 72 प्रतिशत है। दो साल पहले इमरान खान के सत्ता में आने पर सार्वजनिक कर्ज 24,800 लाख करोड़ रुपये था, जो तेजी से बढ़ रहा है। कर्ज लेने की रफ्तार का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इमरान सरकार ने 2020-21 में ही एक साल में 15 अरब डॉलर कर्ज लिया। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास 12 अरब डॉलर का जो विदेशी मुद्रा भंडार है, उसमें अधिकांशत: कर्ज में मिली राशि है। 15 जनवरी, 2021 को मलेशिया ने पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस का एक विमान जब्त कर लिया था। इसके कारण दुनियाभर में पाकिस्तान की बेइज्जती हुई थी।

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस (पीआईए) ने डबलिन स्थित एयरकैप से 2015 में दो विमान पट्टे पर लिये थे। करार के मुताबिक उसे एयरलाइंस को हर महीने पांच लाख 80 हजार अमेरिकी डॉलर की रकम देनी थी लेकिन वह जुलाई से ही पैसे नहीं दे रहा था। विमान जब्त किए जाने के बाद पाकिस्तान ने आयरिश जेट कंपनी को 70 लाख अमेरिकी डॉलर चुकाए।