बिहार के सीमावर्ती इलाके बनते आतंकियों के ठिकाने, कश्मीर तक कर रहे हथियारों की आपूर्ति

    दिनांक 23-फ़रवरी-2021
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संजीव कुमार

बिहार को आतंकवादी पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। कई आतंकी भागकर यहीं छिप चुके हैं। लेकिन बिहार से आतंकियों को हथियार आपूर्ति किये जाने का मामला पहली बार प्रकाश में आया है। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने खुलासा किया था कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी बिहार से हथियार खरीद रहे हैं। इसके लिए वे पंजाब में पढ़ने वाले कुछ कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि अवैध हथियारों को घाटी तक लाया जा सके
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बिहार आतंकी घटनाओं को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार बिहार से आतंकवादियों को हथियार की आपूर्ति की गई है। कुछ दिनों पहले बिहार और जम्मू-कश्मीर एटीएस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई के बाद जावेद को छपरा से गिरफ्तार किया। सेवानिवृत्त शिक्षक महफूज अंसारी के 25 वर्षीय पुत्र जावेद ने कश्मीर के मुश्ताक नामक युवक को सात पिस्टल उपलब्ध कराई थीं। यह हथियार पाकिस्तान के आतंकवादियों तक पहुंचे थे। जावेद का घर छपरा के मढ़ौरा थाना क्षेत्र के देव बहुआरा गांव में है।

जावेद आलम के पिता महफूज आलम सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उनका 25 साल का यह बेटा फौज में जाना चाहता था। मढ़ौरा थाने में जावेद के ऊपर कोई विशेष मुकदमा नहीं है। पास के नगड़ा थाने में उसके खिलाफ 2018 में मारपीट का एक मामला दर्ज है। इसमें गोलीबारी की घटना भी हुई थी। जावेद के अलावा उसके छोटे भाई मुश्ताक आलम को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुश्ताक पिछले साल 28 नवंबर को मोहाली में नर्सिंग की पढ़ाई करने गया था। यह घटना अपने आप में एक विशेष प्रकार की घटना है। बिहार से पहले भी कई बार इंडियन मुजाहिद्दीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सरीखे कुख्यात आतंकी संगठनों के तार बिहार से जुड़ने के समाचार आते रहे हैं।

गौरतलब है कि बिहार को आतंकवादी पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। कई आतंकी भागकर यहीं छिप चुके हैं। लेकिन, बिहार से आतंकियों को हथियार आपूर्ति किये जाने का मामला पहली बार प्रकाश में आया है। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने 14 फरवरी को यह खुलासा किया था कि कश्मीर में सक्रिय आतंकी बिहार से हथियार खरीद रहे हैं। इसके लिए वे पंजाब में पढ़ने वाले कुछ कश्मीरी छात्रों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि अवैध हथियारों को घाटी तक लाया जा सके। उन्होंने यह बात आतंकी हिदायतुल्ला और जहूर अहमद राथर की गिरफ्तारी के बाद कही। इस खुलासे के बाद पुलिस ने अपनी गतिविधि तेज कर दी थी। आतंकियों को हथियार उपलब्ध कराने के मामले में गिरफ्तार जावेद को जम्मू-कश्मीर पुलिस अपने साथ लेकर चली गयी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस को छह दिनों बाद ट्रांजिट रिमांड मिली।

पत्रकारों से बातचीत में पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया कि लश्कर-ए-मुस्तफा, रेजिस्टेंस फ्रंट पाकिस्तान, जैश-ए-मोहम्मद, यह सब लश्कर-ए-तैयबा के ही मुखौटा हैं। इन आतंकी संगठनों का उद्देश्य आतंकवादी गतिविधियों को कश्मीरी नाम देकर उन्माद पैदा करना है। पिछले साल अगस्त में गठित इस संगठन का नेतृत्व हिदायतुल्ला मलिक करता है। यह लंबे समय से सक्रिय आतंकवादी है। जैश के कहने पर ही इसने यह संगठन बनाया था। हिदायतुल्ला को जम्मू जिले के कुंजवानी से 6 फरवरी को तो वहीं अनंतनाग पुलिस ने रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकवादी जहूर अहमद राथर को सांबा जिले के ब्रह्माना से 13 फरवरी को पकड़ा था।


आतंकी गतिविधियों के लिए सुरक्षित स्थान बनता बिहार
देखा जाए तो बिहार आतंकियों के लिए अभी तक सबसे सुरक्षित स्थान बना हुआ है। विशेषकर राज्य के सीमावर्ती और मिथिलांचल क्षेत्र को आतंकवादी पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। आतंकवादी घटनाओं में दरभंगा माॅड्यूल हमेशा चर्चा में रहता है। कई खुफिया रिपोर्ट में यह बताया जा चुका है कि बिहार का सीमावर्ती और मिथिलांचल क्षेत्र आतंकवादियों के लिए पनाहगार बन चुका है। उत्तरी बिहार की सीमा के नेपाल से सटा होने के कारण आतंकियों का भारत में प्रवेश करना और भारत से निकलकर नेपाल की सीमा में दाखिल करना काफी मददगार होता है। दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मोतिहारी जैसे जिले नेपाल के सीमा से काफी करीब हैं। वर्ष, 2000 में सीतामढ़ी से हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकवादी मकबूल और जाहिर को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई की लोकल ट्रेन में बम विस्फोट करने वाले आतंकी मोहम्मद कमाल को गिरफ्तार किया गया था। मोहम्मद कमाल सिमी का सदस्य था और वह मधुबनी जिले का निवासी था।


दरभंगा माॅड्यूल


बिहार का दरभंगा जिला आतंकवादियों के लिए सबसे बड़ा पनाहगाह है। इंडियन मुजाहिद्दीन के शातिर यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद दरभंगा माॅड्यूल सामने में आया था। दरअसल यासीन भटकल ने बेरोजगार युवाओं को गुमराह कर आतंकवाद का प्रशिक्षण देने के लिए दरभंगा जिले को ही चुना था। हैदराबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद तहसीन का नाम इंडियन मुजाहिद्दीन के सक्रिय सदस्य के रूप में आया था। तहसीन समस्तीपुर का रहने वाला था। पढ़ने के लिए उसके पिता ने उसे दरभंगा भेजा था, जहां से वह गायब हो गया था। बाद में उसका नाम कई आतंकी घटनाओं में सामने आया।

दरभंगा माॅड्यूल का नामकरण इसी जिले के कारण हुआ है। इस माॅड्यूल में आतंकवादी सबसे पहले बिहार के युवकों की पहचान करते हैं और फिर उन्हें आतंकवाद की घुट्टी पिलाई जाती है। उनके दिमाग में जहर भरा जाता है कि मजहब खतरे में है। उसे बचाने के लिए आतंकवाद ही एक मात्र रास्ता है। ऐसे गुमराह युवकों को फिर आतंकी ट्रेनिंग के लिए कश्मीर की घाटियों में भेजा जाता है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें वापस घर पहुंचा दिया जाता है। भारत में कहीं भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के कुछ महीने पूर्व इन्हें सूचना दी जाती है और फिर से ट्रेनिंग के बाद इन्हें आपरेशन पर भेजा जाता है। इस दौरान उन्हें काफी मोटी पगार भी मिलती रहती है। सन्, 2000 से पहले देश में कई स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए। उनमें से अधिकांश के सूत्र दरभंगा जिले से जुड़े हुए पाए गए। जितने आतंकी पकड़े गये उनमें से एक दर्जन दरभंगा के ही रहने वाले थे। कफील अहमद, वशी अहमद, शेख मोहम्मद, आफताब आलम, आदिल गयूर, अहमद जमाली जैसे कई नाम इसी जिले के हैं। मोतिहारी जिले से इंडियन मुजाहिद्दीन के यासीन भटकल और अब्दुल असगर उर्फ हड्डी की गिरफ्तारी भी हुई थी। 2009 में दिल्ली ब्लास्ट के लिए पकड़े गये आतंकवादी मदनी भी दरभंगा के पड़ोस मधुबनी जिला का निवासी था। आतंकवादी मदनी को बम ब्लास्ट के मामले में पकड़ कर जब पूछताछ हुई तो उसने यह खुलासा किया कि वह बिहार जाता रहता है। बिहार के नक्सली भी उसके संपर्क थे। वह नक्सलियों को विस्फोटक के साथ हथियार भी उपलब्ध कराता था। उसकी निशानदेही पर बिहार में कई स्थानों पर छापेमारी भी हुई थी। देश में विभिन्न जगहों पर हुए बम विस्फोट के आरोप में गिरफ्तार हुए इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े 13 लोगों में 12 दरभंगा के ही थे। सिर्फ एक मोहम्मद आदिल करांची (पाकिस्तान) का था।

एक मदनी ही इस इलाके का आतंकी नहीं है। 2006 में मधुबनी का ही रहने वाला मोहम्मद कमाल मुंबई लोकल ट्रेन धमाके के लिए गिरफ्तार किया गया था। 2008 में मधुबनी के सलाउद्दीन की गिरफ्तारी हुई थी। 2011 में मधुबनी के अफजल जमाली और अहमद जमाली तथा दरभंगा के कतिल सिद्दकी को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था। 2012 में बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में बम ब्लास्ट हुआ था। इस मामले में बिहार के मोहम्मद कफिल अख्तर को गिरफ्तार किया गया था। सबसे हैरतअंगेज बात तो तब हुई जब 2013 में मोहम्मद दानिश अंसारी की गिरफ्तारी हुई। उसने कबूला कि वह यासीन भटकल के लिए काम करता था।

पटना का गांधी मैदान सीरियल ब्लास्ट विश्व के इतिहास में एक काला धब्बा है। 27 अक्टूबर, 2013 को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री तौर पर घोषित गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा होनी थी। यह सभा बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित की गई थी। वही गांधी मैदान जहां महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण ने अपनी सभाएं की थीं। इसी स्थान से कांग्रेस मुक्त भारत की कल्पना जयप्रकाश नारायण ने की थी। इसी गांधी मैदान में 27 अक्टूबर को नरेन्द्र मोदी की सभा में सीरियल बम ब्लास्ट हुए। लेकिन, इन बम धमाकों के बीच भी जनता अपने स्थान से हिली नहीं। लोग लहुलुहान होकर गिरते थे, लेकिन उसके बगल में खड़ा व्यक्ति अपने स्थान से हिलता तक नहीं था। एनआईए ने जांच में पाया था कि इस घटना को अंजाम देने के लिए बिहार और झारखंड के स्लीपर सेल का इस्तेमाल किया गया। इसी जांच में यह भी बात सामने आयी थी कि बिहार के कई जिले आतंकियों के लिए पनाहगाह बन चुके हैं। यहां आतंकियों के कई स्लीपर सेल मौजूद हैं, जिन्हें पहचानना बेहद मुश्किल है।