वैश्विक सुख का आधार भारतीय विचार

    दिनांक 26-फ़रवरी-2021   
Total Views |
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री स्वांत रंजन ने कहा कि पूंजीवाद और साम्यवाद के अलावा एक विचार और था, जिसे दीनदयाल जी भारतीय विचार, सनातन विचार कहते थे।
gg_1  H x W: 0
गोष्ठी के मंच पर श्री ओम बिरला और श्री स्वांत रंजन के साथ अन्य वक्ता

गत दिनों धान्क्या (राजस्थान) में ‘आत्मनिर्भर भारत, सक्षम भारत’ विषय पर एक गोष्ठी आयोजित हुई। इसका आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति ने किया था। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्री स्वांत रंजन ने कहा कि पूंजीवाद और साम्यवाद के अलावा एक विचार और था, जिसे दीनदयाल जी भारतीय विचार, सनातन विचार कहते थे। यह ऋषियों का विचार था और दीनदयाल जी ने इसी विचार को आगे बढ़ाने का काम किया। भारतीय विचार से हम देश ही नहीं, पूरी दुनिया को सुखी बना सकते हैं। यही विचार आज शाश्वत विचार है। उन्होंने एक सूत्र दिया कि संपूर्ण विश्व और ब्रह्मांड में समन्वय है, सहकार है। इसलिए उन्होंने चार शब्द बताए --व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि। इसमें सबसे छोटी इकाई व्यष्टि है। उन्होंने कहा कि अपने राष्ट्र को सशक्त करना आवश्यक है। हम दुर्बल और कमजोर हैं तो कोई सुनने वाला नहीं है। देश को मजबूत बनाना पड़ेगा। इसके लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। आज देश इस दिशा में चल पड़ा है। वहीं लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि हमारे अंदर किसी भी चुनौती का सामूहिक रूप से मुकाबला करने का सामर्थ्य है। कोरोना चुनौती के कारण अच्छे- अच्छे विकसित देशों की चिकित्सा और आर्थिक व्यवस्थाएं डगमगा गई थीं, लेकिन भारत ने सामूहिक सेवा के संकल्प से चुनौती का मुकाबला किया। समर्थ भारत बनाने के लिए आत्मनिर्भर भारत बनाना होगा। पहले ऐसा लगता था कि हम कच्चा माल और उत्पाद बनाकर लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाएंगे, लेकिन हमारे दृढ़ संकल्प ने इतने कम समय में उन सभी चीजों को परिवर्तित करने का काम किया है। यह काम दीनदयाल जी  के विचार और संकल्प से हुआ है।

गोष्ठी में जयपुर के सांसद रामचरण बोहरा और पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति के अध्यक्ष डॉ. एमएल छीपा ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर शोध करने वाले शोधार्थियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।