भारत-इज्राएल संबंध : दोस्ती पर दुश्मन की नजर

    दिनांक 09-फ़रवरी-2021
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आर.के सिन्हा

इज्राएल भारत का ऐसा मित्र है जो संकट की घड़ी में हमेशा साथ देता रहा है। भारत-इज्राएल के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों से पाकिस्तान खुद को असहज महसूस करता है। इसलिए वह दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास डालना चाहता है। दिल्ली में इज्राएल दूतावास के पास हुए बम विस्फोट में कही उसी का हाथ तो नहीं
29_1  H x W: 0 दिल्ली में इज्राएली दूतावास के पास हुए आईईडी विस्फोट की जांच करते एनएसजी के अधिकारी    (फाइल चित्र)


जिस दिन केंद्रीय बजट लोकसभा में पेश किया जाना था, उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर हुई बातचीत को सामान्य शिष्टाचार वार्ता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 29 जनवरी, 2021 को इज्राएली दूतावास के पास बम विस्फोटक की कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नेतन्याहू को आश्वासन दिया कि भारत सरकार के लिए इज्राएली राजनयिकों और उनके आवासीय परिसरों की सुरक्षा सबसे अधिक महत्व रखती है अपराधियों को खोजने तथा उन्हें दंडित करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। दोनों नेताओं ने इस संदर्भ में भारत और इज्राएल की सुरक्षा एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय के बारे में संतोष व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि 2012 में भी दिल्ली में इज्राएली दूतावास के बाहर कार में बम धमाका किया गया था। इस बार भी इज्राएली दूतावास के पास उसी जगह आईईडी धमाका हुआ। गनीमत रही कि इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ। इस धमाके के बाद तमाम सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। इस बम विस्फोट के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र से इनकार नहीं किया जा सकता। यह न भूलें कि लंबे समय से इज्राएली दूतावास तथा यहूदियों के उपासना स्थल इस्लामिक कठमुल्लों के निशाने पर रहे हैं। इन्हीं कठमुल्लों ने 5 सितंबर, 1972 को जर्मनी के म्यूनिख ओलंपिक में खून-खराबा किया था। तब किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि ओलंपिक खेल गांव भीषण आतंकी हमले का साक्षी बनेगा। इस हमले में फिलिस्तीन लिबरेशन आॅर्गनाइजेशन के आतंकियों ने इज्राएल के कई खिलाड़ियों को मौत के घाट उतार दिया था। दुनिया के विभिन्न देशों के खिलाड़ियों की उपस्थिति में यह खून-खराबा हुआ था। उसके बाद से ही इज्राएल के यहूदी कट्टर इस्लामवादियों के निशाने पर हैं।

भरोसेमंद दोस्त
इजराइल, भारत का परम मित्र है और संकट में हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। इसलिए इज्राएली दूतावास, उसके राजनयिकों, यहूदी नागरिकों और यहूदी उपासना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की जिम्मेदारी है। दरअसल राष्ट्रीय राजधानी में इज्राएली दूतावास के आसपास अब तक जो दो बम धमाके हुए हैं, वे यहूदियों के उपासना स्थल के बिल्कुल करीब हैं। यहूदियों का उपासना स्थल सिनगॉग लुटियन दिल्ली में हुमायूं रोड पर स्थित है। एक मोटे अनुमान के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1,000 यहूदी रहते हैं। इनमें भारतीयों के अलावा इज्राएल, कनाडा, अमेरिका, ब्रिटिश दूतावासों में काम करने वाले यहूदी राजनयिक भी हैं। कुछ यहूदी संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों में भी काम करते हैं।

इज्राएल के साथ भारत के संबंध बहुत मजबूत हैं। कठिन समय में   इज्राएल ने हमेशा भारत का साथ दिया है। चाहे पाकिस्तान के साथ 1965, 1971 के युद्ध हो ं या 1999 का कारगिल युद्ध।  इसलिए   इज्राएल दूतावास, उसके राजनयिकों, यहूदी नागरिकों और यहूदी उपासना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की जिम्मेदारी है।

कोरोना के कारण हुमायूं रोड स्थित सिनगॉग पिछले मार्च से बंद है। इधर के हिन्दी, मराठी, अंग्रेजी, हिब्रू भाषाएं बोलने वाले रेब्बी (मंदिर के पुजारी के समकक्ष) मलेकर कहते हैं कि यहां कई विदेशी यहूदी आते हैं। वैसे तो यहां की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है, पर इसे और चाक-चौबंद किया जा सकता है। यह सिनगॉग अपने आप में खास है। इसके एक हिस्से में यहूदियों का कब्रिस्तान है। इसमें पाकिस्तान के विरुद्ध 1971 के युद्ध में बलिदान होने वाले एक यहूदी सैनिक की कब्र भी है। भारतीय सेना के महानायक लेफ्टिनेंट जनरल जे.एफ.आर. जैकब यहूदी थे। उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में घुसकर पाकिस्तानी फौज पर हमला किया था। यह उनके युद्ध कौशल का ही परिणाम था कि 90,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को हथियारों के साथ भारतीय सेना के समक्ष ऐतिहासिक आत्मसमर्पण करना पड़ा। यह दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसर्पण है। कहते हैं कि अगर 1971 के युद्ध में जनरल जैकब की योजना और रणनीति पर अमल नहीं किया गया होता तो बांग्लादेश को आसानी से आजादी नहीं मिलती। जनरल जैकब का युद्ध कौशल और उनकी वीरता की गाथा प्रेरणादायी है।

धमाके में पाकिस्तान का हाथ!
इन दिनों राष्ट्रीय राजधानी में किसानों का आंदोलन चल रहा है और इस दौरान इज्राएली दूतावास के पास बम विस्फोट की घटना होना वाकई चिंताजनक है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान किसानों के आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। इमरान सरकार के दूसरे मंत्री भी कह रहे हैं कि वे प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ हैं। ऐसी परिस्थिति में इस विस्फोट में पाकिस्तान का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भारत और इजराइल के बीच घनिष्ठता से पाकिस्तान ईर्ष्या करता है। उसे लगता है कि दोनों देशों का गठजोड़ उसके लिए घातक साबित हो सकता है। इसलिए वह भारत में रह रहे कुछ आस्तीन के सांपों के जरिए इज्राएली दूतावास पर विस्फोट करवा रहा है। वह लगातार इस प्रयास में रहता है कि किसी भी तरह भारत और इज्राएल के बीच संबंधों में कटुता आ जाए।

जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि इज्राएल, भारत का कठिन समय का मित्र है। उसने भारत का उस समय साथ दिया था, जब वह गहरे संकट में था। इज्राएल  ने 1965 और 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ाइयों में भारत की हर संभव सहायता की थी। इसके अलावा, इज्राएल ने इन युद्धों में भारत को गुप्त जानकारियां देकर भी अच्छी-खासी मदद की थी। माना जाता है कि तब भारतीय खुफिया अधिकारी साइप्रस या तुर्की के रास्ते इज्राएल  जाते थे। वहां उनके पासपोर्ट पर मुहर तक नहीं लगती थी। उन्हें मात्र एक कागज दिया जाता था, जो उनके इज्राएल आने का सुबूत होता था। 1999 के कारगिल युद्ध में इजराइल ने भारत को एरियल ड्रोन, लेजर गाइडेड बम, गोला-बारूद सहित अन्य हथियार उपलब्ध कराए थे। लेजर गाइडेड बम तो खासतौर से इस युद्ध में भारत के लिए काफी कारगर साबित हुए थे। इसी के बाद भारत और इज्राएल के बीच संबंध और प्रगाढ़ हुए। इसके अलावा, पाकिस्तान का परमाणु बम, जिसे इस्लामी बम भी कहा जाता है, भी भारत-इज्राएल को नजदीक लाया। पर इस बात से आशंकित है कि कहीं पाकिस्तान का परमाणु बम किसी इस्लामी आतंकी संगठन के हाथ न लग जाए। 
(लेखक  पूर्व सांसद हैं)