सोरेन को विहिप की चेतावनी

    दिनांक 01-मार्च-2021   
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v2_1  H x W: 0 श्री मिलिंद परांडे

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने 23 फरवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोेरेन वनवासी समाज की श्रद्धा पर हमला करने से बाज आएं। उन्होंने यह भी कहा कि सोरेन वनवासी समाज को दिग्भ्रमित कर उनकी श्रद्धा को तोड़ने का महापाप कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले हेमंत सोरेन ने एक गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा था,‘‘जनजाति कभी भी हिंदू नहीं थे, न ही अब वे हिंदू हैं।’’

श्री परांडे ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद देशभक्त और धर्मनिष्ठ वनवासी समाज की आस्था व विश्वास को चोट पहुंचाने वाले मुख्यमंत्री के इस गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य की तीव्र निंदा करती है। श्री परांडे ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि देश, धर्म व संस्कृति के लिए वनवासी समाज तथा उससे जुड़े महापुरुषों के अतुलनीय योगदान को नकारते हुए सोरेन ईसाई मिशनरियों, कम्युनिस्टों और नक्सली गतिविधियों के षड्यंत्रों के साथ सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हम इसे कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि वे सुनियोजित तरीके से वनवासी समाज को दिग्भ्रमित करने का जो कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, उसमें सफल नहीं होंगे। उन्हें यह स्मरण रखना चाहिए कि वनवासी समाज, अनंतकाल से देश, धर्म व भारतीय संस्कृति की रक्षा हेतु अग्रणी भूमिका में रहा है। रामायण काल में माता शबरी का उदाहरण हो या राजस्थान में राणा पूंजा भील का, जिन्होंने मुगलों से लड़ने के लिए महाराणा प्रताप का समर्थन किया।

झारखंड में भगवान बिरसा मुंडा तो न सिर्फ रामायण-महाभारत का अभ्यास किया, अपितु अंग्रेजों व ईसाई मिशनरियों के कन्वर्जन के षड्यंत्रों का भी डटकर विरोध किया। रानी दुर्गावती ने मुगलों से वीरतापूर्वक संघर्ष किया। बात चाहे अंग्रेजी शासकों से संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी टांट्या भील की हो या, नागालैंड की महारानी गाइदिन्ल्यू की, या फिर झारखंड के सिद्धू-कान्हू तथा बुधू भगत जैसे वीरों की, देश-धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए वनवासी समाज के ऐसे अनगिनत गौरवपूर्ण संघर्ष इतिहास में भरे पड़े हैं।

श्रीराम मंदिर निधि समर्पण अभियान के प्रति झारखंड सहित समस्त वनवासी क्षेत्र में दिखा स्वयंस्फूर्त समर्पण व उत्साह इसी भक्तिभाव का परिचायक है। भगवान श्रीराम ने भी तो इस प्रकृति-पूजक वनवासी समाज में ही 14 वर्ष तक भ्रमण व निवास किया था। इसलिए मुख्यमंत्री सोरेन अपने क्षुद्र राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे वीर-धीर वनवासी समाज को बांटने या उनकी श्रद्धा पर आघात करने से बाज आएं।