चीनी मिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, बसपा के पूर्व एमएलसी मो. इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्ति सम्बद्ध

    दिनांक 10-मार्च-2021   
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प्रवर्तन निदेशालय ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1,097 करोड़ रुपए मूल्य की कुल सात संपत्तियों को सम्बद्ध कर लिया है.अवैध खनन,बेनामी संपत्ति एवं चीनी मिल घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई की है
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प्रवर्तन निदेशालय ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1,097 करोड़ रुपए मूल्य की कुल सात संपत्तियों को सम्बद्ध कर लिया है.अवैध खनन,बेनामी संपत्ति एवं चीनी मिल घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई की है. बताया जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय मोहम्मद इकबाल की अन्य संपत्तियों को सम्बद्ध कर सकता है.बसपा शासनकाल में चीनी मिलों को औने–पौने दाम पर बेचा गया था.कई चीनी मिलें तो ऐसी थीं, जो लाभ में चल रही थीं फिर भी उन्हें बेच दिया गया था. उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष, 2018 में चीनी मिल घोटाले की सीबीआई जांच कराने की संस्तुति की थी. बता दें कि मायावती के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2010-11 में उत्तर प्रदेश की 21 चीनी मिलों में घोटाला किया गया था.

पहली बार यह घोटाला आडिट रिपोर्ट में पकड़ में आया था. आडिट रिपोर्ट में यह  तथ्य सामने आया था कि बुलंदशहर की चीनी मिल को खरीदने के लिए वेब इंडस्ट्रीज एवं सहारनपुर की चीनी मिल को खरीदने के लिए पी.बी.एस.फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने ही बोली लगाई थी. मतलब यह कि एक चीनी मिल को खरीदने के लिए एक ही खरीददार बुलाया गया था. यह सब कुछ पहले से तय किया गया था ताकि जब चीनी मिल की बोली लगे तो कोई अन्य वहां पर बोली लगाने के लिए मौजूद ना हो. वर्ष 2012 में सीएजी की रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई थी, जिसमें यह साफ़ कहा गया था कि सभी मिलें वर्ष 2009-10 तक चालू हालत में थीं. जरवल रोड, सिसवा बाजार और महराजगंज आदि मिलें तो लाभ में थी, फिर भी इन मिलों को बेचा गया. चीनी मीलों के प्लांट को कबाड़ बताकर उसकी बाजार की कीमत 114.96 करोड़ बताई गई थी जिसे बाद में घटाकर 32.88 करोड़ कर दिया गया था.

 गौरतलब है कि वर्ष, 2018 में लखनऊ के गोमती नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.  उसी समय उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह, केंद सरकार से किया था. सीबीआई ने प्राथमिक जानकारी जुटाने के बाद वर्ष, 2019 में एफआईआर दर्ज की थी.अखिलेश और माया के कार्यकाल में हुए आधा दर्जन से अधिक मामलों की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही है.