'रोहिंग्याओं को वापस जाना ही होगा'

    दिनांक 30-मार्च-2021   
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रोहिंग्या मुसलमान मूल रूप से जिहादी हैं. इन्हें भारत में कभी शरण नहीं दी गई. ये मूल रूप से घुसपैठिए हैं और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी यही दलील दी है

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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि भारत को घुसपैठियों की राजधानी नहीं बनाया जा सकता. रोहिंग्याओं को वापस जाना ही होगा. कमाल की बात ये है कि दिल्ली में ही रह रहे एक रोहिंग्या घुसपैठिए मुहम्मद सलीमुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की है कि रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार को न सौंपा जाए वहां स्थिति ठीक नहीं हैं। हर राष्ट्र द्रोही की पैरवी के लिए कुख्यात प्रशांत भूषण इस रोहिंग्या के ही वकील हैं. भूषण जैसे ही कथित बुद्धिजीवी, वामपंथी खेमे के पत्रकार, जिहादी संगठन, एनजीओ भेसधारी भारत विरोधी संगठनों की पुरजोर पैरवी है कि रोहिंग्याओं को भारत में ही बसा दिया जाए. जकात फाउंडेशन तो दिल्ली में रोहिंग्याओं के लिए कालोनी बसाने जा रहा है.
देश घुसपैठियों की राजधानी नहीः केंद्र
दिल्ली में रहने वाला याचिकाकर्ता मुहम्मद सलीमुल्ला रोहिंग्या मुसलमान है. इससे पहले यह असम से रोहिंग्याओं को बाहर निकालने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा चुका है. हालांकि उस मामले में भी इसे मुंह की खानी पड़ी थी. लेकिन सवाल तो बनता है. कैसे एक रोहिंग्या मुसलमान, जो कि भारत का नागरिक नहीं है, घुसपैठिया है... कहां से इतने संसाधन और संपर्क जुटा लेता है कि सीधे बार-बार देश की सुप्रीम अदालत तक जा पहुंचता है. प्रशांत भूषण को इसके वकील के रूप में देखकर आप पूरा माजरा समझ सकते हैं. न्यायिक प्रक्रिया में भी अधिवक्ताओं का एक 'इको-सिस्टम है', जो इन जिहादियों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है. जब ये याकूब मेमन की फांसी पर आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवा सकते हैं, तो इस तरह के मामलों में इनकी पैरवी कोई आश्चर्य की बात नहीं. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि यह विदेश संबंधों का मामला है, जो कि अदालत के क्षेत्राधिकार में नहीं आता. लेकिन प्रशांत भूषण इनकी पैरवी के लिए संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट लेकर मानवाधिकारों की दलील के साथ मुस्तैद थे. जैसा कि हमेशा जिहादियों और नक्सलियों के पक्ष में बोलने वाले करते हैं, वही प्रशांत भूषण ने किया. दलील दी कि म्यांमार के हालात देखते हुए इन्हें वहां नहीं भेजना चाहिए. इनके मानवाधिकारों और जीने के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए. जिस समय भूषण इस तरह की दलील दे रहे थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बिल्कुल नहीं बताया कि इन्हीं रोहिंग्याओं ने हजारों बौद्धों और सैंकड़ों हिंदुओं के सामूहिक नरसंहार कर उनके जीवन के अधिकार को छीना था.
सरकार की ओर से पेश हुए सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता और जम्मू-कश्मीर के विशेष अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत को बताया कि भारत ने शरणार्थी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए है. इसलिए इसके तहत नई दिल्ली की कोई कानूनी जिम्मेदारी भी नहीं बनती. अदालत को बताया गया कि विदेशी कानून के तहत ही 150 रोहिंग्याओं को म्यांमार को सौंपा जाएगा. दोनों वकीलों ने यह दलील भी दी कि सरकार के किसी अन्य देश से कैसे संबंध हैं या आपसी सहयोग व विश्वास कितना है, इस पर अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती. अदालत ने भी इस दलील को स्वीकार किया. बहरहाल अभी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
सुप्रीम कोर्ट में अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे का हवाला दिया. जरा अतीत में झांककर देखते हैं. दिल्ली, जम्मू, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश और मेवात में आतंकियों से जुड़े रोहिंग्या पकड़े गए हैं. रोहिंग्यों को आतंकवादी गतिविधियों की ट्रेनिंग देने वाला अल कायदा का आतंकवादी भी दिल्ली से गिरफ्तार हुआ था. 28 वर्षीय समियुन रहमान वैसे तो मूल रूप से बंग्लादेशी है, लेकिन उसने ब्रिटिश नागरिकता ले रखी थी. अलकायदा का यह आतंकी भर्ती और प्रशिक्षण देने का काम करता था. इसकी योजना दिल्ली, मणिपुर और मिजोरम में बेस बनाकर रोहिंग्या शरणार्थियों की अलकायदा में भर्ती करना था. रहमान अलकायदा के टॉप कमांडर से सीधे संपर्क में था और उनके निर्देश पर काम कर रहा था. अलकायदा आतंकी ने बताया था कि वह दिल्ली, बिहार, उत्तरी-पूर्वी कश्मीर और झारखंड के हजारीबाग में 12 रोहिंग्या शरणार्थियों के संपर्क में था. अक्टूबर 2016 में एक ऐसे रोहिंग्या आतंकवादी संगठन की पुष्टि हुई, जो भारत में भी सक्रिय था. इसके लश्कर ए तोईबा और जैश के साथ संबंध थे. कश्मीर में पकड़े गए आतंकवादियों ने पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को बताया था कि एएमएम के कई आतंकवादी हाफिज सईद और मसूद अजहर के ट्रेनिंग कैंपों में आतंकवाद का प्रशिक्षण ले रहे थे.
कोने-कोने में है रोहिंग्याओं को बसाने वाला नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्र सरकार को इस बाबत बड़ा चौंकाने वाला इनपुट दिया है. रोहिंग्या को बसाने और आतंकवाद की ओर ले जाने की इस साजिश में राजनीतिक लोगों के साथ-साथ कई एनजीओ भी शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों की नाक के नीचे इतना सब कुछ अंजाम दिया गया. बांग्लादेश के रास्ते रोहिंग्या मुस्लिमों की खेप कोलकाता पहुंचती रही है. ये घुसपैठ अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड में नहीं होती, जबकि उसकी सीधी सीमाएं म्यांमार से लगती हैं. इन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने के लिए पश्चिम बंगाल के मालदा को 'लॉन्च पैड' के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके तार दिल्ली से जुड़े हैं. यहां संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एक संस्था रोहिंग्या मुसलमानों का पंजीकरण करती है. इन्हें एक शरणार्थी कार्ड जारी किया जाता है. हालांकि भारत में इसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है. लेकिन तमाम ऐसी संस्थाएं हैं, जो दिल्ली में इस दफ्तर से लेकर कोलकाता तक रोहिंग्याओं के बीच सक्रिय हैं. ये तथाकथित एनजीओ और मुस्लिम संगठन ही मिलकर इन्हें जम्मू और देश के अन्य हिस्सों में भेजते थे. इन संस्थाओं के लोग जम्मू और बाकी जगह पहले से मुस्तैद रहते थे. यहां पहुंचने वाले रोहिंग्याओं को पहले मदरसों और मस्जिदों में ठहराया जाता था. फिर इन्हें झुग्गियों में मुस्लिम आबादी के बीच इस तरह बसाया जाता था कि इनकी पहचान न हो सके. जमात-ए-इस्लामी कश्मीर जैसे कई संगठन इनके लिए काम कर रहे हैं और उनके नाम पर जुलूस निकालते रहे हैं, क्षेत्र में तनाव का माहौल बनाते रहे हैं. ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के एक गुट के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने रोहिंग्या के लिए कश्मीर में सांत्वना दिवस का भी आयोजन किया था. आईएसआई और मौलवी इन संस्थाओं के बीच समन्वय का काम कर रहे हैं. हाल ही में जम्मू-कश्मीर में 155 ऐसे रोहिंग्या मिले थे, जो म्यांमार में अपनी सज़ा से बच कर यहाँ रह रहे थे. उन सभी को ‘होल्डिंग सेंटर’ भेज दिया गया है. पुलिस ने फॉरेनर्स एक्ट के अनुच्छेद-3(2)e के तहत ये कार्रवाई की. साथ ही पासपोर्ट एक्ट के अनुच्छेद-3 के तहत प्रवासियों के पास पुष्ट ट्रैवल दस्तावेज होने चाहिए, जो उनके पास नहीं थे. रोहिंग्याओं के पास फर्जी राशन कार्ड और आधार कार्ड के बाद अब फर्जी पासपोर्ट भी मिले हैं. यह खुलासा रोंहिंग्याओं की वेरिफिकेशन प्रक्रिया में हुआ है. फर्जी पासपोर्ट दो लोगों के पास मिले हैं. इनके खिलाफ त्रिकुटा नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 77 दर्ज की गई है. यह पहला मामला है, जब किसी रोहिंग्या ने भारत की नागरिकता के लिए पासपोर्ट बनाया हो. इन लोगों के पास फर्जी पैन कार्ड भी हैं. जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का अहम विषय बन गया है. इनमें दो मौलवी हैं, जो मदरसे चला रहे थे.
जकात फाउंडेशन बनाएगी कॉलोनी
हाल ही में मुस्लिम युवाओं के आईएएस और आईपीएस बनने पर चर्चा में आए जकात फाउंडेशन की ओर से दिल्ली में रोहिंग्या मुसलमानों को बसाने के लिए एक कॉलोनी बनाई जा रही है. सोशल मीडिया पर यूजर्स के ट्वीट से पता चलता है कि जकात फाउंडेशन सिर्फ मुस्लिम युवाओं को यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए ट्रेनिंग ही नहीं देता बल्कि इन रोहिंग्या घुसपैठियों की मदद भी कर रहा है. इन रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए जकात फाउंडेशन ने दिल्ली में दारुल हिजरात नाम से 'मेकशिफ्ट कैंप' भी बनाया है. यूजर अजेय शर्मा के एक के बाद एक कई ट्वीट करके इस बारे में जानकारी दी है. ट्वीट में जकात फाउंडेशन द्वारा प्रस्तावित भवन का एक नक्शा भी शेयर किया गया है. जिससे पता चलता है कि रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए स्थायी कॉलोनी के साथ मस्जिद भी बनाई जाएगी. इसके साथ ही यहां जकात फाउंडेशन का स्थाई दफ्तर भी होगा. बताया जाता है कि दिल्ली के शाहीन बाग, कालिंदी कुंज, विकास पुरी और खजूरी खास में कई रोहिग्या बस्तियां हैं और इन इलाकों मे दिल्ली दंगा के समय बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी.