जम्मू-कश्मीर में घुसपैठिये रोहिंग्याओं की राह हुई कठिन, गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद प्रशासन जुटा रहा ब्यौरा

    दिनांक 04-मार्च-2021   
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गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं का ब्यौरा जुटाने की कवायद तेज कर दी है। राज्य के 20 जिलों में इन सभी का सत्यापन हो रहा है। खबरों की मानें तो इनकी पहचान होने के बाद सभी रोहिंग्याओं को विभिन्न स्थानों से हटाकर वापस भेजा जायेगा

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गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं का ब्यौरा जुटाने की कवायद तेज कर दी है। राज्य के 20 जिलों में इन सभी का सत्यापन हो रहा है। खबरों की मानें तो इनकी पहचान होने के बाद सभी रोहिंग्याओं को विभिन्न स्थानों से हटाकर वापस भेजा जायेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 6523 रोहिंग्या रहते हैं। इनमें 6461 जम्मू संभाग और 62 कश्मीर में हैं। हालांकि कुछ आंकड़ों के मुताबिक 13,600 विदेशी नागरिक जम्मू-कश्मीर में हैं, जिसमें रोहिंग्या और बांग्लादेशी समेत पाकिस्तान के नागरिक भी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के पांच जिले जम्मू, सांबा, डोडा, पुंछ और अनंतनाग में सबसे ज्यादा रोहिंग्या अस्थायी ठिकाना बनाकर रह रहे हैं।
 


2008 से 2016 के बीच बढ़ी रोहिंग्याओं की संख्या आंकड़ों के मुताबिक 2008 से 2016 के बीच राज्य में रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जम्मू-कश्मीर में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों के पास स्टेट सब्जेक्ट, वोटर आईकार्ड, राशन कार्ड व आधार कार्ड भी हैं। कई रोहिंग्या तो बिजली बिल भी चुकाते हैं। 2017 में एक रोहिंग्या के पास से स्टेट सब्जेक्ट, आधार कार्ड मिलने के बाद प्रशासन सतर्क हो गया था। इस परिवार के सात सदस्यों के नाम भी राशन कार्ड पर दर्ज थे। परिवार के एक सदस्य के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी था। वहीं पुलिस के मुताबिक रोहिंग्याओं पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज किये गये हैं। वहीं इनके पाकिस्तान की आईएसआई, आतंकी संगठनों और अलगाववादी संगठनों से संबंध की भी आशंका जताई जाती रही है। क्योंकि, साल 2015 में कश्मीर में हुए एक एनकाउंटर में छोटा बर्मी नामक रोहिंग्या मारा गया था। इसके अलावा भी कई मामले ऐसे सामने आ चुके हैं। इस बार पुलिस विभाग भी सतर्क है। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने सभी अधिकारियों को सत्यापन की प्रकिया पूरी करने का निर्देश दिया है। प्रशासन अब डोर टू डोर जाकर भी मकानमालिक और किरायदारों का सत्यापन कर रह है। वहीं सत्यापन नहीं कराने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी करेगी।


महत्वपूर्ण स्थानों पर बनाए हैं ठिकाने
जानकारी के मुताबिक सैन्य प्रतिष्ठानों के आस—पास के इलाकों में भी रोहिंग्याओं की बस्तियां हैं। सुंजवां में सैन्य प्रतिष्ठान से कुछ दूरी पर ही 48 रोहिंग्या परिवारों के 206 लोग, जबकि नगरोटा में 16 कोर मुख्यालय के इलाके में करीब 250 रोहिंग्या रहते हैं। छन्नी हिम्मत इलाके में रोहिंग्याओं के 150 परिवारों ने अस्थायी ठिकाने बना रखे हैं।