स्वदेशी पुर्जे से बनी प्राणरक्षक मशीन

    दिनांक 25-अप्रैल-2021
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इंदौर के रजनीश शर्मा और उनके साथियों ने ऑक्सीजन बनाने वाली एक मशीन तैयार की है, जो उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जिन्हें इन दिनों ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है|
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भारत में ऑक्सीजन के बढ़ते संकट को देखते हुए अनेक लोग इसके समाधान के लिए काम कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि इसमें कुछ लोगों को सफलता भी मिल रही है। एक ऐसे ही युवा हैं इंदौर के रजनीश शर्मा। रजनीश और उनकी टीम ने एक ऑक्सीजन मशीन बनाई है। पूरी तरह भारतीय कल-पुर्जों से बनी यह मशीन हर मिनट पर पांच लीटर ऑक्सीजन तैयार करती है। इस मशीन को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। यह मशीन प्राकृतिक हवा से जीवन रक्षक वायु ऑक्सीजन को छानकर शुद्ध ऑक्सीजन मरीज को प्रदान करती है। यह पूर्णत: बिजली पर आधारित मशीन है और यह ‘प्रेशर स्विंग एब्सोरप्शन टेक्नोलॉजी’ पर कार्य करती है। इसे ऑक्सीजन गैस जेनरेटर भी कहा जाता है। रजनीश एवं उनके साथियों को इसे विकसित करने में केवल सात दिन का समय लगा है। रजनीश बताते हैं कि यह मशीन कई चरणों में काम करती है। सबसे पहले यह बाहर की हवा को खींचकर पीपी फिल्टर से निकालती है। इस हवा में 20.91 प्रतिशत आॅक्सीजन, 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और शेष अन्य गैस होती है। यह मशीन उच्च दबाव से हवा में मौजूद ऑक्सीजन को खींच लेती है और इसी को किसी भी मरीज तक पहुंचा देती है। इस मशीन को किसी वाहन से भी जोड़ा जा सकता है। यानी मरीज को कहीं ले भी जाना पड़े तो उसे ऑक्सीजन की आपूर्ति होती रहेगी। रजनीश कहते हैं, ‘‘हम लोगों ने कमाई के उद्देश्य से यह मशीन नहीं बनाई है। वर्तमान महामारी में किसी की मौत ऑक्सीजन की कमी से न हो, इसे देखते हुए इसे तैयार किया गया है। यह मशीन सभी की पहुंच में हो इसलिए इसकी कीमत 8,000 रु. से 10,000 रु. तक रखी गई है।’’
 
रजनीश यह भी चाहते हैं कि इस मशीन को तैयार करने में सरकार उनकी मदद करे। वे कहते हैं, ‘‘मशीन तैयार करने के लिए आवश्यक वस्तुएं दिल्ली और अमदाबाद से मंगानी पड़ती हैं। यदि सरकार इसमें मदद करे, तो एक सप्ताह में ही लाखों मशीनें तैयार हो सकती हैं।’’
 
 
 
उम्मीद है कि सरकार रजनीश की बातों को गंभीरता से लेगी और उन्हें आवश्यक मदद करेगी। ऐसा होने पर अन्य युवा भी इस तरह के कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे आने वाले दिनों में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं होगी और किसी को ऑक्सीजन के बिना तड़पना नहीं होगा।