केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनाम देकर कहा, झूठ फैलाया जा रहा है कि पहली लहर के बाद हमने कुछ नहीं किया

    दिनांक 28-अप्रैल-2021   
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कोरोना महामारी के चलते जहां दूसरी लहर में लगातार मामले बढ़ रहे हैं। लोग आक्सीजन के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। वहां लाजमी है कि केंद्र सरकार पर सवाल उठेंगे ही। ऐसे में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि यह झूठ फैलाया जा रहा है कि केंद्र ने पहली लहर के बाद कुछ नहीं किया

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देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ गई है। जिसके कारण बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन व कोरोना की दवाओं की जरूरत पड़ रही है। लगातार लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं वहां उन्हें अस्पतालों में बेड पाने के लिए जुझना पड़ रहा है। इस बीच केंद्र सरकार पर कोरोना की पहली लहर के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपना पक्ष रखा है। गृह मंत्रालय की तरफ से सरकार ने किया 200 पेज का हलफनामा दायर किया है। इसमें कहा गया है कि  यह झूठ है कोरोना महामारी की पहली लहर के बाद कोई कदम नहीं उठाया गया और सरकार कोरोना की दूसरी लहर से अनजान थी। मंत्रालय ने कहा, 'किसी भी देश में मेडिकल ऑक्सीजन असीमित नहीं हो सकती।' सभी राज्यों को ऑक्सीजन संतुलित तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है।

गृह मंत्रालय ने कहा है कि वायरस के मामलों में वृद्धि के कारण उपलब्ध संसाधन के हिसाब के कुछ कठिनाइयां जरूर हुई हैं।' जिससे पेशेवर तरीके से लड़ना होगा।  हलफनामें में कहा गया है कि ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 162 संयंत्र लगाने की प्रक्रिया में है। सरकार ने ऑक्सीजन को जुटाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।


हलफनामे में कुछ प्रदेशों में ऑक्सीजन की मांग और उत्पादन की स्थिति का भी जिक्र किया है। कोविड महामारी के दौरान जनता को हुई परेशानियां को हल्के में लेने के आरोप को केंद्र ने नकार दिया है। सरकार ने कहा कि मुश्किलें दूर करने और जान के नुकसान को कम करने के लिए त्वरित, ठोस और समग्र कदम उठाए जा रहे हैं। संक्रमण के अप्रत्याशित केस के बावजूद युद्ध स्तर पर इससे निपटने के लिए तमाम प्रयत्न किए जा रहे हैं।

सरकार का कहना है कि महामारी की दूसरी लहर के नागरिकों की दिक्कतों और कष्टों को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। केंद्र ने कहा, रेमडेसिविर की मांग बढ़ने पर सेंट्रल औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने सात मैन्यूफैक्चर्स की 22 मैन्यूफैक्चरिंग साइट को अनुमति दी। साथ ही 12 अप्रैल को तत्काल अतिरिक्त मैन्यूफैक्चरिंग साइट को मंजूरी दी है।