इंडोनेशिया: भारतीय संस्कृति का पूर्वी छोर

    दिनांक 30-अप्रैल-2021
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प्रो. भगवती प्रकाश


इंडोनेशिया का मजहब भले ही इस्लाआम है, लेकिन इसकी संस्कृति सनातनी है। यहां हिन्दू मंदिरों व भारतीय संस्कृति के ऐतिहासिक संदर्भों की भरमार है। यहां आज भी थोड़ी सी खुदाई करने पर प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिलते हैं

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रामायण में वर्णित यव द्वीप ही आज का जावा द्वीप है
ब्रह्मा, विष्णु  व शिव का 240 मंदिरों से युक्त परिसर
ब्रह्मा, विष्णु  व शिव का 240 मंदिरों से युक्त परिसर

भारत से बाहर भारतीय संस्कृंति के विस्तार, ऐतिहासिक संदर्भों एवं पुरावशेषों की दृष्टि से इंडोनेशिया का विशेष स्थान है। रामायण में संदर्भ सहित प्राचीन कलात्मक हिन्दू मंदिरों में इस देश में आज भी खेतों से लेकर आधुनिक भवनों की खुदाई में बड़ी संख्या में प्राचीन मंदिरों के अवशेष निकल रहे हैं। पुरातन मंदिरों में 8वीं शताब्दी के प्रम्बानन जैसे 240 मंदिरों के संकुल भारत में भी नहीं हैं।

रामायणकालीन इतिहास
17,000 द्वीपों के इस देश की 56 प्रतिशत जनसंख्या जावा एवं 20 प्रतिशत सुमात्रा द्वीपों में रहती है, जिसका उल्लेख वाल्मिकी रामायण के किष्किंधा कांड में क्रमश: यव द्वीप एवं सुवर्ण द्वीप के नाम से है। किष्किंधा से 8,500 किलोमीटर दूर जावा द्वीप को सुग्रीव का ‘यव’ द्वीप तथा सुमात्रा का ‘सुवर्ण’ द्वीप नाम से संबोधन आश्यर्चजनक है। यव द्वीप कहे गए जावा द्वीप का आकार बिल्कुल जौ के दाने जैसा और सुवर्ण द्वीप अर्थात सुमात्रा विश्व के गिने चुने स्वर्ण भंडार वाला शीर्ष 7वां स्वर्ण उत्पादक स्थान है। सुमात्रा में चौथी सदी से स्वर्ण उत्पादन हो रहा है। आज उपग्रह चित्रों से खनिज संसाधनों और जावा की यव आकृति का चित्रण संभव है, लेकिन इसका वर्णन रामायण में है। इंडोनेशिया के बाली द्वीप का नाम रामायणकालीन वनरराज बाली का सूर्योपासना स्थल होने से है। आज भी सूर्य षष्ठी (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) से कार्तिक पूर्णिमा के बीच ओडिशा आदि कई स्थानों पर बाली यात्रा पर्व मनाया जाता है।

सांस्कृतिक एकता
इंडोनेशिया में आज हिन्दुओं की जनसंख्या 2 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन वहां की लोक कथाओं, लोक गीतों, नृत्य नाटिकाओं में रामायण एवं महाभारत का मंचन, कथानकों एवं पात्रों की प्रचुरता है। वहां की रामलीलाएं विश्व प्रसिद्ध हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री की इस टिप्पणी पर कि इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल देश में रामलीला क्यों, इंडोनेशिया के प्रथम राष्ट्रपति सुकर्णो ने कहा था कि इस्लाम हमारा मजहब और रामायण हमारी संस्कृति है। आजकल कुछ कट्टरपंथियों ने जनजीवन में हिन्दुत्व के प्रभाव को कम करना प्रारंभ कर दिया है (न्यूयार्क टाइम्स 18 फरवरी, 2020)। प्राचीन जावा भाषा के 25,500 शब्दों  में संस्कृत के 12,500 शब्द  हैं। उनकी मुद्र्रा रुपिया के 20,000 के नोट पर भगवान गणेश का चित्र और रामायण-महाभारत का मंचन, चित्रण व मूर्तियां इसके हिन्दू इतिहास के प्रमाण हैं। वहां लोगों के भारतीय नामों में हिन्दू नामों की प्रचुरता है। जैसे-कर्ण से सुकर्णों व मेघावती आदि सर्वाधिक संस्कृत नामों की प्रधानता रही है।

हिन्दू मंदिर की प्रचुरता
इंडोनेशिया के बाली द्वीप में छोटे-बड़े हजारों प्राचीन मंदिरों में स्थानीय ग्राम देवताओं सहित गणेश, विष्णु, शिव, पार्वती, कृष्ण, अर्जुन आदि के मंदिर हैं। इनमें कुछ निम्नलिखित हैं-

प्रम्बानन मंदिर: 8वीं सदी के त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु व शिव) के मंदिरों जैसा संकुल या समूह भारत में भी नहीं है। वहां 240 मंदिरों का समूह था, जिनमें कई मंदिर के अब ध्वंनसावशेष ही हैं। वहां 12 नवंबर, 1856 ई. को उद्घाटित शिवालय का शिलालेख भी मिला है। इस स्थल के भूकम्प व दूसरे विश्व युद्ध में क्षतिग्रस्त होने के बाद 1949 में पुनर्निर्माण आरंभ कर 1953 में शिव मंदिर का उद्घाटन वहां के राष्ट्रपति सुकर्णों ने किया। ब्रह्मा, विष्णु व शिव मंदिरों तथा तीनों के वाहनों हंस, गरुड़ व नंदी के मंदिरों का नवनिर्माण कराया गया, जिसका उद्घाटन 1993 में तत्कालीन राष्ट्रापति सुहार्तो ने किया था।

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ईसा पूर्व काल की शिव प्रतिमा
दुर्गा मंदिर की प्रतिमा

तनहा लॉट : सागर रक्षक भगवान विष्णु का यह मंदिर समुद्र के अधिपति देवताओं की पूजा के लिए है, जहां विदेशी केवल तभी जा सकते हैं, जब उन्हें प्रार्थना करनी हो। इन मंदिरों की रक्षा नाग करते हैं।
गोआ गजाह : बाली के पास उबुद में स्थित 11वीं सदी के मंदिर के खंडहर और प्राचीन गुफा हैं। यहां ईसा पूर्व काल के शिवलिंग, ब्रह्मा एवं विष्णु के चिन्ह और गणेश का विग्रह है।

पांडव मंदिर: योद्धा तट स्थित पांडव मंदिर में पाचों पांडवों युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव की मूर्तियां हैं।
उलुवातू मंदिर: रुद्र के रूप में बाली के देवता सांग हयांग विधि वासा को समर्पित है। इस शिव मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में बंदर पाए जाते हैं। इन्हें  मंदिर परिसर में शांत और सफाई तक करते देखा जा सकता है।
पुरा उलुन दानू बार्तन : शिव के इस मंदिर में देवी दानू नामक बाली के हिन्दुओं की पानी की देवी का भी स्थान है।
मरिअम्मन मंदिर: पुराने मंदिर में 1884 में पुनर्निर्मित देवी मरिअम्मन (पार्वती) के मंदिर में गणेश और मुरुगन (कार्तिकेय) भी हैं।

पुरा तमन सरस्वती: यह मंदिर वाणी एवं विद्या की देवी सरस्वती का है।
पुरा पेंतरन अगंग लेमपुयांग: लेमपुयांग पहाड़ पर स्थित यह मंदिर बाली के 6 पवित्र स्थानों में शामिल है।
पूरा बैसाकी: इंडोनेशिया का लोकप्रिय और 23 भव्य मंदिरों के परिसर में ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव प्रमुख हैं।

भूमिगत मंदिरों का सतत् अनावरण
इंडोनेशिया में कृषि कार्य या भवन निर्माण हेतु खुदाई पर हिन्दू मंदिरों व मूर्तियों का निकलना आम बात है। इसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-

इस्लामिक विश्विविद्यालय में शिव एवं गणेश मंदिरों के पुरावशेष: जावा के योग्यकर्ता नगर, जहां मात्र 0.2 प्रतिशत हिन्दू जनसंख्या है, वहां इस्लामिक विश्वविद्यालय में खुदाई के दौरान 1100 वर्ष पुराने गणेश व शिव-पार्वती के मंदिर मिले हैं। योग्यकर्ता के गांवों के नाम केंडी अर्थात् मंदिर शब्द  से ही प्रारंभ होते हैं। खेतों व नालों की खुदाई के उदाहरण: जावा के मध्य डींग वेतन गांव में एंडेसाइट भूरे पत्थर की 140 सेमी ऊंची व 120 सेमी चौड़ी प्रतिमा किसान के खेत में निकली है। एक नाले की खुदाई में बाली के सम्भवत: सबसे बड़े प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेष मिले हैं (हिन्दुस्तान टाइम्स 25 अक्तूबर, 2012)।

इस प्रकार 15वीं सदी में भारत से आरंभ हुए जिहादी आक्रमणों से पहले इंडोनेशिया में भारत से अधिक न सही भारत जितनी ही आस्तिक व आस्थावान हिन्दू-बौद्ध संस्कृति रही है।
(लेखक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के कुलपति हैं)