गेहूं खरीद तैयारी में पंजाब की कांग्रेस सरकार सुस्त, किसानों को होगा इसका सीधा नुकसान

    दिनांक 07-अप्रैल-2021   
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पंजाब में गेहूं की फसल पक कर पूरी तरह तैयार है। राज्य में आगामी रबी विपणन सीजन 2021-22 में गेहूं की सरकारी खरीद 10 अप्रैल, 2021 से शुरू होने जा रही है, लेकिन फसल के दाम का किसानों के खाते में सीधा भुगतान करने में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर पेंच फंसा हुआ है और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मैं ना मानूं की रट लगा रहे हैं।
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पंजाब में गेहूं की फसल पक कर पूरी तरह तैयार है। राज्य में आगामी रबी विपणन सीजन 2021-22 में गेहूं की सरकारी खरीद 10 अप्रैल, 2021 से शुरू होने जा रही है, लेकिन फसल के दाम का किसानों के खाते में सीधा भुगतान करने में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर पेंच फंसा हुआ है और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मैं ना मानूं की रट लगा रहे हैं।

अंदेशा जताया जा रहा है कि अगर पेंच को जल्द न सुलझाया गया तो इससे राज्य में गेहूं की खरीद प्रभावित होगी और इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। देश के अन्य राज्यों ने फसलों की सरकारी खरीद में जमीन के रिकॉर्ड को दाखिल करने की व्यवस्था लागू करके फसल के दाम का सीधा भुगतान किसानों के खाते में करना शुरू कर दिया है, लेकिन पंजाब में अब तक किसानों को आढ़तियों के मार्फत ही भुगतान होता है और राज्य सरकार इसी व्यवस्था को जारी रखने की जिद कर रही है।

केंद्र सरकार का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद में किसानों की जमीन का रिकॉर्ड दाखिल करने और ऑनलाइन भुगतान होने से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और असली किसानों को इसका फायदा मिलेगा। लेकिन पंजाब सरकार आगामी फसल की खरीद के लिए जमीन के रिकॉर्ड दाखिल करने की अनिवार्यता लागू करने को तैयार नहीं है।

प्रदेश सरकार का कहना है कि इसके लिए उसे और समय की आवश्यकता है। दूसरी ओर पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2021-22 के दौरान गेहूं के खरीद की अवधि फिर से निर्धारित करने का अनुरोध किया था। ऐसा राज्य में फसल के तैयार होने में देरी और कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के चलते किया गया। राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा विचार करने के बाद इसकी अनुमति दे दी गई। इसके तहत पंजाब में अब 1 अप्रैल, 2021 से 25 मई, 2021 की जगह 10 अप्रैल, 2021 से 31 मई, 2021 तक गेहूं खरीद की अवधि को पुन: निर्धारित किया गया है।

किसानों को सीधा भुगतान करने के मामले में लीपापोती की कोशिश कर रहे पंजाब के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु ने कहा कि जमीन रिकॉर्ड दाखिल करना एक अच्छा रिफॉर्म है, लेकिन उसके लिए समय चाहिए। आज किसान जब बॉर्डर (दिल्ली की सीमाओं)पर आंदोलन पर बैठे हैं, तब हम उनसे जमीन का रिकॉर्ड लेने कहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि कई किसानों ने अपनी जमीन बटाई पर दे रखी है और किसी ने ठेके पर दे रखी है, इस तरह जमीन का मालिक कोई और है जबकि खेती कोई और कर रहा है। इसलिए उनको कैसे भुगतान किया जाएगा, इस पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसके लिए संबंधित हितधारकों से बातचीत करके उनको विश्वास दिलाना होगा। भारत भूषण आशु ने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अनाज की सरकारी खरीद से जुड़े मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करना चाहते हैं और वह जल्द ही प्रधानमंत्री से मिलेंगे।

किसानों को एमएसपी का ऑनलाइन भुगतान करने में आड़े आने वाली अन्य कठिनाइयों के सवाल पर पंजाब के खाद्य मंत्री ने कहा, किसानों को आढ़तियों के जरिए सीधे उनके खाते में एमएसपी का भुगतान हो रहा है और इसमें कोई अड़चन नहीं है, लेकिन वह (केंद्र सरकार) आढ़तियों को बीच से निकालने को कहती है। बता दें कि हरियाणा आगामी इस सीजन से एमएसपी पर फसलों की खरीद का पूरा पैसा किसानों के खाते में सीधा भुगतान की व्यवस्था लागू करने जा रहा है। जमीन के रिकॉर्ड को लेकर वहां किसानों के पंजीकरण की कोई कठिनाई नहीं है, क्योंकि जिन्होंने जमीन पट्टे पर ले रखी है उनके पास एग्रीमेंट के कागज होते हैं।