‘झूठिस्तान’ की आधुनिक दुनिया

    दिनांक 26-मई-2021
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  राहुल कौशिक

सोशल मीडिया में झूठी खबरें  इस तरह परोसी जाती हैं कि वे सच लगने लगती हैं। हालांकि सोशल मीडिया की हर खबर झूठी नहीं होती, पर ज्यादातर खबरों का कोई आधार नहीं होता
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आज के आधुनिक युग में सोशल मीडिया की उत्पत्ति अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है। एक जगह पर बैठा हुआ आदमी दुनिया के दूसरे कोने में बड़ी ही आसानी से अपनी पहुंच बना सकता है। वह पहुंच भले ही ‘वर्चुअल वर्ल्ड’ में हो लेकिन उसकी पहुंच उस इलाके में होती जरूर है। सोशल मीडिया के द्वारा विचारों का आदान-प्रदान भी होता है। किसी एक व्यक्ति को जानने और पहचानने के लिए अब उसके बारे में कोई किताब पढ़ने की आवश्यकता नहीं होती। आप सोशल मीडिया पर उसके विचारों को भलीभांति पढ़ सकते हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर वह व्यक्ति किस तरीके की सोच रखता है। राजनीति के अंदर सोशल मीडिया के पदार्पण ने दुनिया की राजनीति को बदल कर रख दिया है। 2014 में भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया के पदार्पण ने अनेक समीकरणों को बदल दिया है।

इसी पदार्पण को हम आज ‘फेक न्यूज’ की धारा में प्रवाहित होते देख रहे हैं। ‘फेक न्यूज’ यानी गलत खबरें। राजनेताओं के बोले जाने वाले झूठ से जितना नुकसान नहीं होता, उससे अधिक नुकसान झूठी खबरों के कारण होता है। यूं मान लीजिए कि झूठी खबरें राजनेताओं के झूठ का अद्यतन संस्करण हैं। कई मामलों में यह बहुत ज्यादा कारगर भी सिद्ध होता है। उदाहरण के लिए हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेते हैं। हिंदुत्व की प्रचंड धारा से निकले अपने उसूलों के ऊपर अडिग कहे जाने वाले आदित्यनाथ के बारे में लगभग दो साल पहले एक तस्वीर वायरल की गई। किसी खबरिया चैनल के नाम पर यह बताने का प्रयास किया गया था, ‘‘योगी ने यह कहा है कि यदि प्रदेश में उनकी जीत नहीं होगी तो उनके समर्थक इलाके को जला देंगे।’’ विडंबना यह है कि यह झूठ उस जमाने में फैलाया गया जब आधुनिकता का हर पैमाना नापने के तरीके उपलब्ध हैं।

उसी प्रकार 2014 में नरेंद्र मोदी का 2 करोड़ नौकरी और 15,00,000 रु. वाला वादा भी है। इसको हमारे देश के कलाकारों की कलाकारी कहें या राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की चपलता, 15,00,000 रु. के ‘मौद्रिक अंदाजे’ को वादा घोषित कर दिया गया। कमाल की बात है कि इसको सिद्ध भी कर दिया गया कि मोदी ने यह वादा किया है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि ये सब तब हुआ जब इस देश में मोदी सरकार है। झूठी खबरों की यही ताकत होती है। ऐसी खबरें बगुले को हंस सिद्ध करने की क्षमता रखती हैं।

आज की झूठी खबरों वाली दुनिया में यह आवश्यक हो जाता है कि आप अपनी पांच इंद्रियों के साथ छठी इंद्रिय को भी जागृत रखें। अगर आपकी छठी इंद्रिय सुप्त पड़ी है तो आप इन पांच इंद्रियों द्वारा भी धोखा खा सकते हैं। आज जो आप देखते हैं, जो सुनते हैं या जो आपको दिखाने का प्रयास किया जाता है, वह सत्य हो, यह आवश्यक नहीं। सोशल मीडिया की किसी भी खबर को एक झटके में सत्य मान लेना आपके बौद्धिक विचार के लिए सही नहीं होगा।
(लेखक सोशल मीडिया विशेषज्ञ हैं)