इथेनॉल दूर करेगा गन्ने की कड़वाहट

    दिनांक 01-जून-2021   
Total Views |
 
उत्तर प्रदेश में अब इथेनॉल के जरिए गन्ने को ‘ग्रीन गोल्ड’ बनाया जाएगा. गन्ने से इथेनॉल बनाने के 54 और चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से इथेनॉल बनाने के 7 प्रोजेक्ट लगाए जायेंगे. गन्ने से इथेनॉल बनाने के 54  प्रोजेक्ट में से 27 प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं, जबकि 27 प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं, आगामी सितंबर के अंत तक शेष प्रोजेक्ट पूरे हो जायेंगे.  चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से इथेनॉल बनाने संबंधी प्रोजेक्ट कुछ माह में उत्पादन करने लगेंगे.
ganna kishan_1  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ने से इथेनॉल बनाने संबंधी प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए कहा है कि “जल्द से जल्द इनमें उत्पादन शुरू कराया जाए. उत्पादन शुरू करने के लिए एनओसी जारी करने में किसी प्रकार का विलंब न हो.” गन्ना राज्य के किसानों की एक मुख्य नगदी फसल है.

बुन्देलखंड को छोड़ कर राज्य के हर जिले में गन्ने की पैदावार होती है.  कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में  गन्ने तथा अन्य अनाजों से इथेनॉल बनाने संबंधी लगाए जा रहे कुल 61 प्रोजेक्ट से 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा. दो माह पहले केंद्र सरकार ने इथेनॉल को स्टैंडर्ड फ्यूल घोषित किया है. ऐसे में अब इथेनॉल की मांग में वृद्धि होगी.

उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष 126.10 करोड़ लीटर इथेनॉल बनाया जाता है. राज्य में करीब 50 आसवानियां इथेनॉल बना रही हैं. इस वर्ष इथेनॉल बनाने संबंधी नए प्रोजेक्ट में उत्पादन शुरू होने से इथेनॉल उत्पादन में प्रदेश, देश में सबसे ऊपर होगा और राज्य के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा. गन्ना देने वाले किसानों को उनके गन्ने का भुगतान पाने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा और किसान गन्ना की फसल बोने से संकोच नहीं करेंगे.



क्या होता है  इथेनॉल  :

इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इथेनॉल का उत्पादन वैसे तो गन्ने से होता है लेकिन अब प्रदेश सरकार ने चावल, गेहूं, जौ, मक्का तथा ज्वार से भी इसे तैयार करने के सात प्रोजेक्ट स्थापित करने की अनुमति दी है. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में स्थापित और नए लग रहे प्रोजेक्ट से उत्पादित इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर 35 फीसदी तक कार्बन मोनोऑक्साइड कम किया जा सकता है.  इससे सल्फर डाइऑक्साइड को भी कम किया जा सकता है. केंद्र सरकार सरकार ने 2030 तक 20 फीसदी इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने का लक्ष्य रखा है. सरकार के इस फैसले से आम लोगों को प्रदूषण से राहत मिलेगी.