पाकिस्तान : इस्लामी कट्टरवाद का शिकार पोलियो मुक्ति अभियान

    दिनांक 16-जून-2021
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एस. वर्मा

अगस्त 2020 में पोलियो उन्मूलन के लिए अफ्रीकन रीजनल सर्टिफिकेशन कमीशन (एआरसीसी) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की, कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अफ्रीकी क्षेत्र के 47 देश अब पोलियो वायरस से मुक्त हैं, और यहां पिछले चार साल से पोलियो का कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। नाइजीरिया पोलियो से मुक्त घोषित होने वाला आखिरी अफ्रीकी देश था, जो एक दशक पहले वैश्विक पोलियो मामलों में आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार था। इसके साथ विश्व का सबसे पिछड़ा माना जाने वाला अफ्रीका महाद्वीप पोलियो जैसी महामारी से मुक्त हुआ। और अब विश्व में इस्लामी दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति पाकिस्तान और तालिबान के दंश से ग्रसित उसके पड़ोसी देश अफगानिस्तान, ऐसे दो देश बचे हुए हैं, जहां से पोलियो के मामले सामने आ रहे हैं। विगत वर्षों में पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि यहां पोलियो के मामलों में भारी गिरावट आई है, परन्तु जब तक यह पूर्ण रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता, स्थिति की गंभीरता को कम नहीं आंका जा सकता ।

पाकिस्तान में पोलियो टीकाकरण का इतिहास

हालांकि वैश्विक स्तर पर पोलियो टीकाकरण अभियान 1974 में आरंभ हुआ, परन्तु पाकिस्तान में इसके उन्मूलन के प्रयास आधिकारिक तौर पर 1994 में ही शुरू किये जा सके। उस समय, देश में हर साल औसतन 20,000 पोलियो के मामले दर्ज किए जा रहे थे। 2004 तक यानी इस अभियान के 10 साल में पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में भारी गिरावट आई। परन्तु अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमले के जवाब में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के खिलाफ छेड़े गए ऑपरेशन एन्ड्योरिंग फ्रीडम ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान को न केवल सैन्य, राजनैतिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया बल्कि इस क्षेत्र में पोलियो के विरुद्ध अभियान को गहरा आघात पहुंचाया। पाकिस्तान की सरकार की हमेशा से प्राथमिकता विदेशी सहायता को अधिक हड़पने और इस्लामी आतंकवाद को बढ़ावा देने की ही रही। इस युद्ध के दौरान भी बड़े पैमाने पर तालिबान लड़ाकों को उत्तरपश्चिम सीमावर्ती पश्तून बहुल आबादी वाले क्षेत्रों में बसाया गया। पाकिस्तान का यह क्षेत्र मुजाहिदीन युद्ध के समय से कट्टरपंथ का गढ़ बना हुआ था, अब इन तालिबानों के कारण यहां के हालात और बिगड़ गए। इनके कट्टर इस्लामी पूर्वाग्रहों का शिकार पोलियो टीकाकरण अभियान भी बना जिसका परिणाम यह हुआ कि 2004 के बाद से पोलियो संक्रमण में भारी तेजी देखने में आने लगी और सन 2014 में पाकिस्तान में दुनिया के सबसे ज्यादा पोलियो के मामले सामने आये (उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 27 मार्च को, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया गया था)।

पाकिस्तान में टीकाकरण !

पाकिस्तान के समारोही पोलियो उन्मूलन अभियान के नवीनतम संस्करण का आरम्भ प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामाबाद में 7 जून को किया । इस टीकाकरण अभियान का लक्ष्य देश के 124 जिलों में पांच साल से कम उम्र के 3.3 करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुंचना है। चालू वर्ष के दौरान यह तीसरा राष्ट्रव्यापी पोलियो विरोधी अभियान है, इससे पहले जनवरी और अप्रैल 2021 में पहले दो टीकाकरण अभियान संपन्न हो चुके हैं। पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में हालांकि गिरावट आई है, और विश्व के पोलियो मुक्त होने के बाद (अफगानिस्तान को छोड़कर) इसे बाहर से संक्रमण के खतरे का पूर्णत: अभाव है। पिछले कुछ वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात की खैरात से चलने वाले संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान असिस्टेंस प्रोग्राम (यूएई-पीएपी) के द्वारा पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन के प्रयासों में तेजी आई है। इस सहायता ने इन सात वर्षों में पाकिस्तान में 8.6 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो वैक्सीन की 50.8 करोड़ खुराकों का प्रबंध करने में सहायता प्रदान की है। 2019 में जहां पाकिस्तान में पोलियो के 147 मामले सामने आये थे, वहीं, 2020 में इनकी संख्या गिरकर 84 रह गई और मार्च 2021 की स्थिति में पोलियो का मात्र 1 मामला ही रिकॉर्ड में आया है।

पोलियो उन्मूलन की राह में रुकावटें !

यह आंकड़े उत्साहवर्धक हैं परन्तु पाकिस्तान में ऐसे कई कारक है, जो पोलियो उन्मूलन की राह में बड़े रोड़े बने हुए हैं। खैबर पख्तून्ख्वा और सम्पूर्ण उत्तर पश्चिमी जनजातीय पट्टी में टीकाकरण के विरुद्ध जो हिंसक प्रतिरोध देखने में आता है, वह इस कार्यक्रम के लिए सबसे बड़ा नकारात्मक बिंदु है। वर्तमान टीकाकरण अभियान में ही 9 जून को खैबर पख्तून्ख्वा के मरदान में पोलियो टीकाकरण टीम की सुरक्षा में तैनात दो सुरक्षा कर्मियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई। और यह लगभग हर साल होता है और मई 2011 में ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर के द्वारा जिस प्रकार ओसामा बिन लादेन को एबोटाबाद में मारा गया, इन कट्टरपंथियों को टीकाकरण का विरोध करने की जैसे एक वाजिब वजह ही मिल गई। जैसे पोलियो टीकाकरण अभियान पर हमला कर वह सभी संभावित शकील अफरीदियों से बदला ले रहे हैं!

पाकिस्तान को पोलियो मुक्त क्षेत्र बनाने के रास्ते में एक बड़ी चुनौती टीकाकरण अभियानों के दौरान छूटे हुए बच्चों की बड़ी संख्या भी है, जिनके पालकों और स्थायी घर के अभाव में टीकाकरण कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है। बहुत से मामलों में माता-पिता ही अपने बच्चों का टीकाकरण करवाने से इनकार करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि टीकाकरण "पश्चिम" द्वारा मुस्लिमों के बंध्याकरण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक रणनीति है। निरक्षरता, गरीबी, एक्सपायर्ड पोलियो वैक्सीन और इसके साथ साथ इस टीके के साथ हलाल से संबंधित भ्रांतियां इस टीकाकरण अभियान की रह में सबसे बड़े रोड़े हैं।

मार्च 2020 के अंत से एक और बड़ी रुकावट देखने में आई जब COVID19 के प्रकोप के बीच नियमित टीकाकरण में ठहराव देखा गया। स्कूलों, सार्वजनिक समारोहों, सार्वजनिक परिवहन के बंद हो जाने के कारण सार्वत्रिक टीकाकरण अभियान में रुकावट पैदा हुई। इसके साथ ही साथ सार्वजनिक और निजी अस्पतालों के बाहरी रोगी विभागों ने टीकाकरण रोक दिया है। पाकिस्तान सरकार ने भी अपने सभी कर्मचारियों और संसाधनों को COVID19 के खिलाफ लड़ने के लिए लगा दिया।

परन्तु समग्र रूप से देखा जाए तो पोलियो टीकाकरण प्रयासों की विफलता केवल इस्लामी आतंकवादियों की वजह से नहीं है, जिन्होंने नि;संदेह डर के माहौल का निर्माण कर इसे अवरुद्ध करने में भूमिका निभाई है, परन्तु इसके साथ ही साथ यह पाकिस्तान की सरकार पर विश्वास के अभाव उसके कुप्रबंधन और जवाबदेही के पूरी तरह से अभाव के कारण भी है।

पाकिस्तान में इस समय पोलियो उन्मूलन अभियान एक सकारात्मक दिशा में है। भारत पोलियो से सुरक्षा की दृष्टि से अपने पड़ोसी पाकिस्तान में पोलियो के उन्मूलन की सफलता की इच्छा रखता है।। परन्तु 2004 में भी पाकिस्तान सफलता के नजदीक था परन्तु वह दोबारा से उसी गर्त में वापस लौट गया । पाकिस्तान की सरकार की प्राथमिकताओं में जन स्वास्थ्य को वह वरीयता नहीं दी जाती, जो दी जानी चाहिए। आज भी पाकिस्तान विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिश की तुलना में स्वास्थ्य सेवा पर बहुत कम खर्च कर रहा है। पाकिस्तान के नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 बताता है कि इस देश का स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय, सकल घरेलू उत्पाद के 1.2 प्रतिशत से भी कम है। कोरोना जैसी भयावह आपदा को देखते हुए इस वर्ष संघीय और प्रांतीय सरकारों द्वारा कुल स्वास्थ्य व्यय 14.35 प्रतिशत बढ़ाकर पिछले साल के 421.78 अरब से बढ़ाकर इस साल 482.27 अरब रुपये कर दिया गया है जो पाकिस्तान की 20 करोड़ से अधिक आबादी के लिए बिलकुल भी पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। यह समय पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन के लिए बहुत ही संवेदनशील है और इसमें की गई लापरवाही उसे भारी पड़ सकती है।