निराश्रित नौनिहालों के लिए आगे आये योगी , अभिभावकों की बढ़ाई वार्षिक आय सीमा

    दिनांक 17-जून-2021   
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कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के प्रबंध के लिए "मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना" शुरू की गई. पहले इस योजना में प्रावधान किया गया था कि मासिक वित्तीय सहायता पाने के लिए ऐसे निराश्रित बच्चे पात्र होंगे जिनके अभिभावक अथवा देखभाल करने वाले संरक्षक की वार्षिक आय 2 लाख रूपये तक होगी.

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कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के प्रबंध के लिए "मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना" शुरू की गई. पहले इस योजना में प्रावधान किया गया था कि मासिक वित्तीय सहायता पाने के लिए ऐसे निराश्रित बच्चे पात्र होंगे जिनके अभिभावक अथवा देखभाल करने वाले संरक्षक की वार्षिक आय 2 लाख रूपये तक होगी. अब इस आय सीमा को बढ़ा कर 3 लाख रूपये प्रति वर्ष कर दिया गया है. अब ऐसे बच्चों के वयस्क होने तक, उनके अभिभावक अथवा संरक्षक को मासिक 4 हजार रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि "अनाथ बच्चों के पालन- पोषण एवं शिक्षा के सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए 'उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' शुरू की गई है. एक भी निराश्रित बच्चा इस योजना से वंचित न रहने पाए. इस योजना के अंतर्गत ऐसे बच्चे जो  कोरोना महामारी के  कारण अनाथ हो गए हों. राज्य सरकार उनकी समुचित देखभाल करेगी.  18 वर्ष से कम आयु वाले ऐसे बच्चे जिनका कोई अभिभावक अथवा परिवार नहीं है, उनके लिए भी प्रबंध किया गया है. स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को टैबलेट अथवा लैपटॉप दिया जाएगा. बालिकाओं के विवाह की समुचित व्यवस्था की जायेगी. बालिकाओं की शादी के लिए राज्य सरकार द्वारा एक लाख एक हजार रूपये की धनराशि दी जाएगी.

 

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के प्रमुख बिंदु---

 बच्चे के वयस्क होने तक उनके अभिभावक अथवा देखभाल करने वाले को चार हजार रूपये  प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.

  1. अठारह वर्ष की आयु से कम के ऐसे बच्चे जिनका कोई अभिभावक अथवा परिवार नहीं है, ऐसे सभी बच्चों को प्रदेश सरकार द्वारा भारत सरकार की सहायता से अथवा अपने संसाधनों से संचालित राजकीय बाल गृह (शिशु) में देखभाल की जाएगी. मथुरा, लखनऊ प्रयागराज, आगरा एवं रामपुर में राजकीय बाल गृह (शिशु) संचालित हैं.

  2. अवयस्क बालिकाओं की देखभाल सुनिश्चित की जाएगी.. इन्हें भारत सरकार द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (आवासीय) में अथवा प्रदेश सरकार द्वारा संचालित राजकीय बाल गृह (बालिका) में रखा जाएगा. जहां इनकी देखभाल और शिक्षा-दीक्षा के प्रबंध होंगे.  प्रदेश में 13 ऐसे बाल गृह संचालित हैं.इसके अलावा, सुविधानुसार इन्हें प्रदेश में स्थापित किए जा रहे 18 अटल आवासीय विद्यालयों में रखकर उनकी देखभाल की जाएगी.

  3. बालिकाओं के विवाह की समुचित व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार बालिकाओं की शादी हेतु रुपये एक लाख एक हजार रूपये प्रदान करेगी.

  4. स्कूल अथवा कॉलेज में पढ़ रहे अथवा व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे सभी बच्चों को टैबलेट/लैपटॉप की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी.