भारतीय बौद्ध भिक्षु ज्ञानेश्वर को मिला म्यांमार का सर्वोच्च धार्मिक सम्मान

    दिनांक 27-जून-2021   
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बौद्ध धर्मगुरू भदन्त ज्ञा 

कुशीनगर। वयोवृद्ध बौद्ध धर्मगुरु भदन्त ज्ञानेश्वर को म्यांमार का सर्वोच्च धार्मिक सम्मान 'अभिधजा महारथागुरु' सम्मान मिला है। भारत में म्यांमार के राजदूत ऊं मोचो आंग ने रविवार को कुशीनगर में यह सम्मान एक समारोह में बौद्ध भिक्षु को प्रदान किया।

म्यांमार सरकार ने चार जनवरी को बौद्ध धर्म गुरु को इस सर्वोच्च धार्मिक सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की थी। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते बौद्ध भिक्षु सम्मान लेने म्यांमार नहीं जा पा रहे थे तो म्यांमार सरकार ने यह सम्मान भारत भेजा है, जिसे लेकर राजदूत आंग शनिवार देर शाम को कुशीनगर पहुंचे।

राजदूत ने रविवार को म्यांमार बौद्ध विहार में आयोजित समारोह में बौद्ध भिक्षु को सम्मान प्रदान किया। कोविड प्रोटोकाल के तहत हुए समारोह में विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा, निकिता बोरा, बुद्ध पीजी कालेज के प्राचार्य डॉ. अमृतांशु कुमार शुक्ल, अधिशासी अधिकारी प्रेमशंकर गुप्त, विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षु इस क्षण के साक्षी बने। सभी ने बौद्ध भिक्षु को इस सम्मान के लिए बधाई दी और उनके सुखमय एवं निरोगी जीवन की कामना की। इसके पूर्व; राजदूत ने महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा कर दोनों देशों की खुशहाली की कामना की।

भारत-म्यांमार के प्रगाढ़ संबंध प्राचीन काल से

राजदूत आंग ने पत्रकारों से कहा कि भारत-म्यांमार के मध्य प्रगाढ़ सम्बन्ध प्राचीन काल से हैं। किसी भी देश के राजनीतिक हालात का कभी भी एक-दूसरे पर विपरीत असर नहीं पड़ा है। दोनों देश मिलकर धार्मिक, सांस्कृतिक, आधारभूत, कृषि, व्यापार, उद्योग, रक्षा के क्षेत्र में मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कुशीनगर एयरपोर्ट के निर्माण को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के मध्य पर्यटन बढ़ेगा। भारत-थाई-म्यांमार त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड के कारण परियोजना पूर्ण होने में विलंब हो रहा है। भारत म्यांमार के विकास में 1.5 अरब डॉलर से अधिक की आर्थिक सहायता दे रहा है।