चीन: उइगरों पर जारी है दमन, चीन की हेकड़ी के आगे झुके मुस्लिम देश

    दिनांक 30-जून-2021   
Total Views |
चीन अपने यहां तो उइगरों पर दमन कर ही रहा है, लेकिन जान बचाने को दूसरे देशों में जा बसे उइगरों को वहां से वापस प्रत्यर्पित भी करना रहा है, भले ही वे मुस्लिम देशों में हों
cheen_1  H x W:
चीनी दमन के शिकार उइगर   (फाइल चित्र)

 संयुक्त अरब अमीरात से आए एक ताजा समाचार से पता चलता है कि वहां से अभी अहमद तलिप नाम के एक उइगर मुस्लिम को चीन लौटाया गया है। उसे चीन की मांग पर प्रत्यर्पित किया गया है। और अनेक उइगर मुसलमानों पर ठीक ऐसी ही कार्रवाई इजिप्ट, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने की है। यह खुलासा हुआ है अमेरिका के सीएनएन चैनल की एक रिपोर्ट में। रिपोर्ट में बताया गया कि 2017 के बाद से, सिर्फ मिस्र से प्रत्यर्पण के ऐसे कम से कम 20 उदाहरण देखने में आए हैं। सीएनएन के अनुसार, इजिप्ट, यूएई और सऊदी अरब से जब इस बारे में बात करने कीश् उनकी प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की तो वहां से कोई बात नहीं की गई। चीन ने भी इस मामले में चुप्पी साधी हुई है।


पता चला है कि इजिप्ट से भेजते गए ज्यादातर युवा वहां की अल-अजहर यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे। उनके अलावा भी बड़ी संख्या में उइगर लोगों को इजिप्ट में जेल में ठूंसा हुआ है। सऊदी अरब से भी प्रत्यर्पण का एक मामता देखने में आया है। वहां हज के लिए गए एक उइगर मुस्लिम को हज के बाद पकड़कर चीन रवाना कर दिया गया। हैरानी की बात है कि इन मुस्लिम देशों ने उन उइगरों के मुसलमान होते हुए भी उनसे ऐसा परायापन दिखाया है और वह भी सिर्फ चीन के इशारे पर। वे जानते हैं कि उन्हें वहां भेजा तो है पर वहां चीन पहुंचने पर वे दमन के शिकार बनेंगे। पता चला है कि कुछ साल पहले सिंक्यांग में हुए आतंकवादी हमलों के संदर्भ में चीन सिंक्यांग से दूसरे देशों में जाने वाले उइगरों को वहां से वापस बुला रहा है, भले ही वे किसी इस्लामी देश में हों।

सीएनएन का कहना है कि इस्लामी देश चीन के बढ़ते प्रभाव की धमक में आ गए हैं। रिपोर्ट में है कि 2019 में 12 से ज्यादा मुस्लिम बहुल देशों ने सिंक्यांग प्रांत में चीन की नीतियों की खुलकर प्रशंसा की थी। इससे भी बढ़कर हैरानी की बात है कि उइगर मुसलमानों के कथित दमन का मामला संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद में पहुंचा तो करीब 37 मुस्लिम बहुल देशों ने वहां भी चीन का पक्ष लिया था।

सब जानते हैं कि तिब्बत सहित सिंक्यांग में चीन ने बड़ी तादाद में हान चीनियों को बसाया हुआ है। वहां का जनसांख्यिक स्वरूप बदल दिया है। सिंक्यांग उइगर स्वायत्तशासी क्षेत्र आंकड़ों की वार्षिकी को देखें तो 1949 में सिंक्यांग में हान चीनी आबादी 6.7 प्रतिशत थी, जो चीनी जनगणना 2020 के अनुसार, बढ़कर 42.24 प्रतिशत है। 1949 में इस क्षेत्र में 80 प्रतिशत आबादी उइगर मुस्लिमों की थी। 1949 में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत था। ताजा आंकड़ों में यह घटकर 45 प्रतिशत पर आ गया है।

शी जिनपिंग के राज में हान चीनियों को वहां तेजी से बसाया गया है। सिंक्यांग की क्षेत्रीय सरकार ने जो 2020 का डाटा जारी किया है, उससे साफ है कि बीते 10 साल में वहां हान चीनियों की आबादी 25 प्रतिशत बढ़ी है।
मई 2021 में आई ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने अपने पश्चिमी क्षेत्र में एक लाख मुसलमानों को गिरफ्तार कर लिया है, क्योंकि वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ दमन का अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन तुर्की, अरब, यूएई, पाकिस्तान जैसे इस्लामी देशों के उपरोक्त रवैये से चीन बेहद उत्साहित है। वह जल्दी ही तुर्की के साथ प्रत्यर्पण संधि करने जा रहा है। साफ है कि तुर्की में जा बसे उइगरों में डर समाया है।

पाकिस्तान की बात करें तो कश्‍मीर और इस्‍लामोफोबिया पर दुनिया को 'सबक' देने वाले प्रधानमंत्री इमरान खान चीन के उइगरों के खिलाफ अत्‍याचार पर मुंह सिल लेते हैं। हाल में एक चैनल ने उनसे जब उइगरों को लेकर सवाल पूछे तो ऐसा बचकाना जवाब दिया कि जिसको लेकर अब वे फिर मुंह छिपाए घूम रहे हैं। उइगरों के अत्‍याचारों की बात पर इमरान ने कहा कि वह ऐसे विषय पर चीन के साथ बंद कमरे में बात करते हैं।

ह्यूमन राइट्स वॉच की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने अपने पश्चिमी क्षेत्र में एक लाख मुसलमानों को गिरफ्तार कर लिया है, क्योंकि वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ दमन का अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन तुर्की, अरब, यूएई, पाकिस्तान जैसे इस्लामी देशों के वर्तमान में चीन के प्रति झुकाव वाले रवैये से बीजिंग उत्साहित है। वह जल्दी ही तुर्की के साथ प्रत्यर्पण संधि करने जा रहा है। साफ है कि तुर्की में जा बसे उइगरों में डर समाया है।

एक्सियोस चैनल को दिए इंटरव्‍यू में इमरान ने कहा कि अमेरिका पर 9/11 हमले के बाद दुनिया में 'इस्‍लामिक आतंकवाद' शब्‍द का चलन देखने में आया। इस्‍लामिक आतंकवाद के संदर्भ में पश्चिमी देशों में मान लिया जाता है कि इस्‍लाम की वजह से कट्टरता आई। 9/11 हमले के बाद जहां भी कोई हमला होता है, जिसमें मुस्लिम शामिल होता है तो पूरे 1.3 अरब मुस्लिमों को निशाना बनाया जाने लगता है।

इसमें शक नहीं कि इमरान खान पश्चिमी देशों में इस्‍लामोफोबिया का सवाल उठाते हैं लेकिन चीन के उइगर मुस्लिमों पर अत्‍याचार कुछ नहीं कहते हैं। उइगर मुस्लिमों का नरसंहार उन्हें नजर नहीं आता। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में इमरान ने कहा कि हम चीन से इस संबंध में बंद कमरे में बात करते हैं। चीन हमारा सबसे कठिन समय में सबसे अच्‍छा दोस्‍त रहा है। जब हमारी अर्थव्‍यवस्‍था संकट में थी, तब चीन ने हमारी मदद की थी। उन्‍होंने कहा कि जो मेरे देश की सीमा पर है, मैं उसके बारे में ज्‍यादा चिंता में हूं। उनका इशारा कश्मीर की तरफ था, लेकिन वे शायद भूल गए कि चीन का सिंक्यांग प्रांत भी पाकिस्‍तान की सीमा पर ही है। फंसने पर इमरान खान सफाई देने लगे कि वह अपने देश के 'हिस्‍से' कश्‍मीर की बात कर रहे हैं।

लेकिन इसमें दो राय नहीं है कि चीन अपने पैसे के ताकत के बल पर मुस्लिम देशों पर ऐसा रौब गांठ रहा है जिससे उनका मुस्लिम ब्रदरहुड का जुमला भूल में पड़ गया है। खुद को दुनिया के मुस्लिमों का हिमायती कहने वाले देश उइगरों पर हो रहे दमन को 'देख' ही नहीं पा रहे हैं।