कोरोना काल में हर तबके के लिए संवेदनशील यूपी सरकार

    दिनांक 30-जून-2021
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डॉ. विशाल मिश्र

जनसंख्या के लिहाज से विश्व का पांचवां सबसे बड़ा देश हो सकने वाले उत्तर प्रदेश को कोरोना काल में संभाल लेना कोई हंसी-खेल नहीं है। परंतु उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कुशल नेतृत्व, संवेदनशीलता और प्रशासन का अद्भुत समन्वय कर एक मिथक ही गढ़ा है। मुख्यमंत्री स्वयं हर मोर्चे पर आगे दिखाई दिए और कमियों का रोना रोने के बजाय उन्होंने इन कमियों को सामर्थ्य पैदा करने के अवसर के रूप में देखा।
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लगभग 24 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश को यदि अलग देश के रूप में देखा जाए तो यह विश्व का 5वां सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश होगा। ऐसी स्थिति में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की दूसरी लहर में जब चारों ओर चिंता की लकीरें, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, सभी के माथे पर दिखाई दे रही थीं, तब स्वयं भी कोरोनों की चपेट में आये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस संवेदनशीलता और मानवीयता के साथ इस महामारी को नियंत्रण में लाने के लिए जिस नेतृत्व और प्रशासन का संगम स्थापित किया, वह अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। इस आपदा को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं में जिजीविषा पैदा की और उपलब्ध संसाधनों को पूरी तरह चैनेलाइज कर दिया। आज इस महामारी को राज्य से पूर्णत: समाप्त करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ट्रिपल टी झ्र टेस्ट, ट्रेस, ट्रीट के मंत्र को लेकर आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार घर-घर जाकर कोरोना की पहचान करने के मामले में सबसे आगे है। ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर वहां वायरस की पहचान करके लोगों का परीक्षण कराया गया और उनको पहचानकर आइसोलेट किया गया। 75 जिलों के 97941 गांवों को कवर किया गया है।

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 लाख 41 हजार 610 लोगों की टीम का गठन कर 21,242 स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रें को कवर करने के लिए किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी माना कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए सामुदायिक, ग्रामीण और व्यक्तिगत स्तर पर काम हुआ है।

कोरोना को मात देने के बाद स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 दिन में प्रदेश के सभी 18 मण्डलों का दौरा पूरा कर लिया। प्रदेश के 75 में से लगभग 40 जिलों में स्वयं पहुँचकर एकीकृत कमाण्ड नियंत्रण का निरीक्षण किया और चलाए जा रहे अभियान की जमीनी हकीकत को देखा तथा कोरोना योद्धओं का उत्साहवर्धन करने के साथ-साथ जरूरी निर्देश भी दिए।

आज उत्तर प्रदेश में कुल 5,59,99,840 टेस्ट हो चुके हैं। नए केस महज 208 हैं और रिकवरी दर 98.5% पहुंच गई है। लेख लिखे जाने तक पॉजिटीविटी 0.09% पहुँच चुकी है। यह सब महज एक दिन में नहीं हो गया। यह मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व और उनके द्वारा गठित टीम-9, जिसका नेतृत्व स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा था, की दिन-रात की मेहनत का परिणाम था। उत्तर प्रदेश के मामले में यह कथन कि सेनापति की युद्ध में निर्णायक भूमिका होती है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सटीक बैठती है। इसके अंतर्गत कई कदम उठाये गये जैसे- विभिन्न धर्मगुरुओं से संपर्क बढ़ाना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम गठित करना और उनके साथ संवाद स्थापित करना, जिसका परिणाम है कि 11 जिलों में एक भी नया केस नहीं मिला है और महोबा कोरोनामुक्त पहला जनपद बना। 62 जिलों में इकाई संख्या में मामले हैं और दो जिलों में दहाई संख्या में मामले मिले हैं।

आॅक्सीजन और वैक्सीन की व्यवस्था
आॅक्सीजन आपूर्ति बढ़ाने के लिए आॅक्सीजन वितरण प्रणाली की स्थापना की गयी और आॅक्सीजन आपूर्ति को 350 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1050 मीट्रिक टन तक कर दिया। यही नहीं, आवंटित 533 आॅक्सीजन प्लांट की स्वीकृति प्रदान की गई जिसमें से 110 आॅक्सीजन प्लांट पूरी तरह क्रियाशील हैं। कंटेंनमेंट जोन की संख्या 83000 से घटकर 15 जून तक 5117 आ गई है।

जब स्वदेश निर्मित वैक्सीन को लेकर कई राज्य केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाकर भ्रम का मायाजाल फैला रहे थे, ऐसी स्थिति में टीके की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य बना जिसने कोविड-19 के टीके के लिए वैश्विक प्रस्ताव रखा। यही नहीं 23 मई को उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में 18-45 वर्ष के उम्र के लोगों को टीका लगाये जाने की शुरूआत हुई। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश चुनिंदा राज्यों में से एक था। यही नहीं, 1 जून से सभी 75 जिलों में 18-45 आयु वर्ग के लोगों को टीका लगाया जाने लगा। वर्तमान में 21 जून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शुरू हुए दुनिया के सबसे बड़े मुफ्त टीकाकरण अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 22 जून तक कुल 2,71,85,347 टीकाकरण किया गया जिसमें से अकेले 21 जून को 8,24,008 लोगों का टीकाकरण किया गया। यही नहीं, अब टीकाकरण के लिए बाकायदा घर-घर बुलावा पर्ची भेजी जायेगी जिसमें टीकाकरण की तिथि और स्थान का उल्लेख होगा। अगले 3 माह में 10 करोड़ लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। और इस क्रम में सर्वाधिक युवाओं को टीका लगाने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य बना। अब तक उत्तर प्रदेश में 9 करोड़ से अधिक युवाओं को टीके लगाये जा चुके हैं और 18-44 आयुवर्ग के कुल 16 करोड़ लोग उत्तर प्रदेश में हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 1 जुलाई से 10-12 लाख के टीकाकरण लक्ष्य के लिए तैयारियाँ पूरी कर ली जाएं। 21 जून को कोरोना टीकाकरण के मामले में एक नया रिकॉर्ड बना। 6 लाख लक्ष्य के सापेक्ष कुल 7.05 लाख लोगों का टीकाकरण हुआ जो अब तक की प्रदेश में एक दिन में सबसे बड़ी संख्या है।

बच्चों के अभिभावक
इस कोरोना आपदा में प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के बच्चों के अभिभावक की भूमिका में अपने दायित्वों का पूरी संवेदनशीलता के साथ निभीने वाले योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि कोरोना के चलते माता-पिता या घर के कमाऊ अभिभावक को खोने वाले बच्चों के पालन-पोषण से लेकर पढ़ाई-लिखाई तक की जिम्मेदारी सरकार उठायेगी। मानवीय संवेदनाओं की पहल करते हुए कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों की परवरिश के लिए शुरू की गई उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल-सेवा योजना के अंतर्गत संरक्षकों की आय सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया है। अब अभिभावकों या संरक्षकों, जिनकी आय 3 लाख रुपये से कम होगी, को 4,000 रुपये प्रतिमाह वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, गाँवों में बच्चों को मुफ्त दवा किट देने की शुरूआत की गई।
प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों का नियमित रात्रि प्रवास सुनिश्चित किया गया। उत्तर प्रदेश में कोरोना काल में सरकार द्वारा कोई भूखा न सोए, इसके लिए 75 जिलों में 416 सामुदायिक रसोई की स्थापना की गई। लगभग 14.71 करोड़ लाभार्थियों को नि:शुल्क राशन प्रदान किया जा रहा है। गांव में राशन दिलवाने के लिए निगरानी समितियाँ बनाई गई हैं।

किसानों को राहत, रिकॉर्ड खरीदी
राज्य के अन्नदाता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही संवेदशनशील है और किसानों की आय को दोगुना करने के लिए सतत् प्रयत्नशील है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच सरकार ने रिकॉर्ड गेहूं खरीद की है। प्रदेश के 12.75 लाख से अधिक किसानों से 56.38 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदारी हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 20.62 लाख मीट्रिक टन गेहूं अधिक खरीदा गया है और 72 घंटों की तय सीमा में किसानों को उनकी उपज का मूल्य सीधे बैंक खातों में पहुंच रहा है। कुल खरीद का लगभग 93 प्रतिशत (10,019 करोड़) भुगतान किया जा चुका है। यह योगी सरकार की किसानों के प्रति संवेदनशीलता को दशार्ता है। किसानों के प्रति योगी सरकार की संवेदनशीलता चीनी मिलों को किए गए गन्ना मूल्य भुगतान में भी दिखाई देता है। इस साल 21,228.61 करोड़ रुपये का भुगतान कर सरकार ने नया रिकॉर्ड बनाया है जबकि अभी मिलों का गन्ना मूल्य का भुगतान कार्य जारी है। पिछले तीन सालों में प्रदेश की 119 चीनी मिलों को गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है और प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है। पूर्ववर्ती सरकारें जहां चीनी मिलों को बंद करने का काम कर रही थीं, वहीं योगी सरकार चीनी मीलों की दशा सुधारने के साथ-साथ नई चीनी मीलों को खोलने के तरफ भी अग्रसर है। रमाला सहकारी चीनी मील का विस्तारीकरण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

तीसरी लहर के लिए पूर्व तैयारी
कोरोना की तीसरी लहर, जो बच्चों के लिए हानिकारक बताई जा रही है, से निपटने के लिए भी उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी तैयार कर ली है। राज्य के सभी प्रमुख शहरों में बच्चों के लिए 50 से 100 बाल चिकित्सा बेड (पीआईसीयू - पीकू) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में कुल 600 बालरोग विशेषज्ञों की भर्ती की जा रही है। स्वास्थ्य परामर्श समिति की रिपोर्ट को ध्यान में रखकर सरकार ने हर जिले की सुरक्षा के लिए चक्रव्यूह तैयार किया है।
कोरोना संक्रमण की सम्भावित तीसरी लहर और संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए सभी जिलों में पूरी सक्रियता से सरकार ने प्रयास शुरू कर दिये हैं। तीसरी लहर से निपटने के लिए सरकार ने स्वच्छता, सैनेटाइजेसन, पीकू, नीकू और मेडिकल किट के जरिये इस चक्रव्यूह को रचा है। युद्ध स्तर पर चीकू, नीकू की स्थापना और मेडिकल मेडिसिन किट के वितरण की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जून माह के अंत तक प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में 100 बेड वाले चीकू, नीकू और सीएचसी और पीएचसी में 50 नये बेड की व्यवस्था कर दी जायेगी। कोरोनो की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए सकरार ने बच्चों की स्वास्थ्य, सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य में 27 जून से मेडिकल किट और दवाएं घर-घर वितरित की जाएंगी। तीसरी लहर का डट का मुकाबला करने के लिए प्रदेश की 3011 पीएचसी और 855 सीएचसी को सभी अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है। मेडिकल किट में उपलब्ध दवाएं कोविड-19 के लक्षणों से बचाव के साथ 18 साल से कम उम्र के बच्चों को मौसमी बीमारियों से भी बचाएंगी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भी बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए और ब्लैक फंगस से बचाव के लिए राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की है।

आर्थिक प्रगति पर ध्यान
कोरोना काल के बावजूद उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति के लिए योगी सरकार सतत् प्रयत्नशील है। पिछले एक साल में एमएसएमई सेक्टर में रोजगार देने में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा है। प्रदेशष में मेक इन इंडिया का असर साफ दिखता है जहां सैमसंग इंडिया ने गौतमबुद्ध नगर में निर्माण इकाई लगाई है।

युवाओं के लिए यूपीटेट प्रमाणपत्र को आजीवन मान्य करने की बात हो या फिर दिसंबर तक 1 लाख युवाओं को नौकरी देने की घोषणा से मिशन रोजगार को रफ्रतार देने की बात हो, योगी सरकार हर मोर्चे पर अग्रिम पंक्ति में खड़ी दिखती है। यही कारण है कि इस कोरोना काल के आपदा के समय लिये गये सामान्य से दिखने वाले असाधारण और दूरदर्शी निर्णयों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यप्रणाली में नेतृत्व, संवेदनशीलता और प्रशासन का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। और इस बात पर तब मुहर लग जाती है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन, नीति आयोग, बॉम्बे और इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सराहना करने से स्वयं को रोक नहीं पाते हैं।