पंजाब : कोरोना वैक्सीन पर भ्रष्टाचार के वायरस का हमला

    दिनांक 07-जून-2021   
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पूरे देश में जहां कांग्रेस वैक्सीन को लेकर भ्रामक जानकारियां फैला रही है और लोगों का मुफ्त टीकाकरण करने की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस शासित राज्यों में सरकारों के रवैये पर पार्टी की भद्द पिटने लगी है। विपक्षी दलों ने पंजाब सरकार पर वैक्सीन की कालाबाजारी के आरोप लगाए हैं
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कोरोना वैक्सीन पर चल रही चर्चा के दौरान सोशल मीडिया पर एक यूजर ने कहा कि अगर केन्द्र में कांग्रेस सरकार सत्तारूढ़ होती तो वह किसी भी सूरत में भारतीय वैक्सीन विकसित नहीं होने देती। हकीकत में ये होता कि सत्ताधारी दल के नेता विदेश से दवा मंगवा कर उसमें करोड़ों-अरबों रुपये का गड़बड़झाला करते।

ये केवल कयासबाजी ही थी। परन्तु पंजाब के सन्दर्भ में यही कयासबाजी सच्ची साबित होती दिखाई दे रही है। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर आरोप है कि राज्य सरकार व इससे जुड़े लोग वैक्सीन में भारी मुनाफाखोरी कर रहे हैं। आरोप हैं कि पंजाब सरकार वैक्सीन को तय कीमत पर खरीदकर उसे ज्यादा कीमत पर निजी अस्पतालों को बेच रही है। इसकी काली कमाई किसकी जेब में जा रही है, इसके लिए ज्यादा मत्थापच्ची करने की आवश्यकता नहीं है। पूरे मामले में रही सही कसर लुधियाना के उपायुक्त पूरी करते दिखाई दे रहे हैं। उनका मानना है कि लोगों को किसी भी कीमत पर कोरोना के टीके लगवाने चाहिए। जब लोग सिनेमा हॉल में पॉपकॉर्न व पिज्जा के लिए हजारों रुपये खर्च सकते हैंं तो दवा के लिए क्यों नहीं ?

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब सरकार कोटा के मुताबिक 400 रुपये की रियायती दर पर कोरोना की वैक्सीन ‘कोवैक्सिन’ की खुराक खरीद रही है। मगर राज्य सरकार इसे निजी अस्पतालों को 1060 रुपये प्रति खुराक पर बेच रही है, जो लोगों को 1560 रुपये में टीका लगाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य कोटे के तहत खरीदे गए कोवैक्सिन को निजी अस्पतालों को बेचने पर पंजाब सरकार ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के नाम पर 660 रुपये प्रति खुराक का लाभ कमाया है। इसके अलावा निजी अस्पताल को 500 रुपये प्रति डोज का लाभ होता है, क्योंकि ग्राहक प्रत्येक डोज के लिए 1,560 रुपये का भुगतान करता है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल ही में खरीदी गई एक लाख शीशियों में से पंजाब सरकार ने राज्यभर के निजी अस्पतालों को 1060 रुपये प्रति खुराक की दर से कम से कम 20,000 की बिक्री की, जिसकी कीमत 400 रुपये थी। जबकि क्षेत्र से प्राप्त रिपोर्टों से पता चलता है कि निजी अस्पताल लोगों से प्रति शॉट कम से कम 1,560 रुपये चार्ज कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टीकाकरण अभियान में शामिल अधिकारियों का दावा है कि सरकार ने टीकाकरण सीएसआर फण्ड के नाम से एक अलग बैंक खाता बनाया है और निजी अस्पताल इस खाते में ही पैसा जमा करते हैं। वैक्सीन की खरीद में शामिल राज्य के अधिकारियों ने कहा कि निजी अस्पतालों से एकत्र अतिरिक्त धन का उपयोग वैक्सीन खरीदने के लिए किया जाएगा। धीरे-धीरे यह मुद्दा राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है। पूरे देश में जहां कांग्रेस वैक्सीन को लेकर भ्रामक जानकारियां फैला रही है और लोगों का मुफ्त टीकाकरण करने की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस शासित राज्यों में सरकारों के रवैये पर पार्टी की भद्द पिटने लगी है। विपक्षी दलों ने पंजाब सरकार पर वैक्सीन की कालाबाजारी के आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस की ‘वन टू का फोर’ नीति : अनुराग ठाकुर

केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने पंजाब सरकार पर हमला बोला है। श्री ठाकुर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि केन्द्र सरकार वैक्सीन निर्माताओं से टीका खरीद कर राज्यों को 400 रुपये प्रति डोज के हिसाब से बेचती है, मगर पंजाब सरकार वही टीका निजी अस्पतालों को 1060 रुपये प्रति डोज की दर से बेच रही है। जिसके बाद निजी अस्पतालों ने आम जनता को वही टीका 1560 रुपये प्रति डोज की दर से लगाया है। जो टीका जनता को मुफ्त में लगाना था, कांग्रेस राज में वही टीका 3120 रुपये (दोनो शॉट) में लग रहा है। ये कांग्रेस की वन टू का फोर पॉलिसी है।

हाईकोर्ट की निगरानी में जांच हो : सुखबीर बादल

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने पूरे मामले को गम्भीर बताते हुए हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों की जान से खिलवाड़ करने पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह एक बहुत बड़ा घोटाला है। इसने राहुल गांधी को भी उजागर किया है, जो सभी के लिए मुफ्त वैक्सीन की मांग कर रहे हैं। अकाली दल प्रमुख ने दावा किया कि राज्य में वैक्सीन की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है। भारी लाभ पर निजी अस्पतालों को वैक्सीन दी जा रही हैं।

ये हैं आंकड़े

आरोप है कि पंजाब सरकार ने एक लाख 14 हजार टीकों को बेचा है, जो उसे 2 मई को मिले थे। जबकि पंजाब सरकार ने राज्य में 18-44 आयु वर्ग के लिए मुफ्त में टीका लगवाने के लिए कहा है। राज्य में कुल 39,65,219 व्यक्तियों को टीका लगाया गया है, जबकि उनमें से 7,84,099 को टीका की दूसरी खुराक भी मिल चुकी है।

लुधियाना के डीसी बोले-पॉपकार्न व पिज्जा से सस्ती है वैक्सीन


लुधियाना के निजी अस्पतालों ने वैक्सीन की 1.50 लाख डोज मंगवा रखी हैं। पिछले छह दिन में कुल दस हजार लोगों ने निजी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाई है। डीसी वरिन्दर शर्मा ने फेसबुक लाइव पर शहरवासियों से अपील की कि अगर पैसा खर्च कर सकते हैं तो प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लगवा लें। वैक्सीन पड़ी हैं, लेकिन जो लोग सम्पन्न हैं वह भी टीका नहीं लगवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैक्सीन सिनेमा हाल के पॉपकॉर्न और पिज्जा से सस्ती है। अगर इसके लिए पैसे खर्च करने पड़ें तो जरूर लगवाएं।

राजस्थान में कूड़े में मिली वैक्सीन

कांग्रेस शासित एक अन्य राज्य राजस्थान में वैक्सीन के ढेरों वॉयल कूड़े से मिलने की मीडिया में खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। मीडिया की रिपोर्ट अनुसार, जो वायल मिले उनमें से ज्यादातर में  वैक्सीन भरी पाई गईं। बून्दी जिले में पता चला कि यहां गांव वालों ने एक वॉयल से कुछ वैक्सीन लगवाई और बाकी लोग वैक्सीनेशन के लिए पहुंचे ही नहीं, जिसकी वजह से वैक्सीन को कूड़े में डालना पड़ा। देश में वैक्सीन की बर्बादी का औसत 6.3 फीसदी के आसपास है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने राजस्थान सरकार को पत्र लिख कर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।